राम मंदिर चढ़ावा चोरी: अयोध्या पहुंची SIT, नोट गिनने वालों की कुंडली खंगालना शुरू; रसूखदारों में हड़कंप

अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की धनराशि में हुई कथित करोड़ों की चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) अयोध्या पहुंच चुकी है। एसआईटी ने राम मंदिर परिसर के भीतर स्थित ‘गणना कक्ष’ (Donation Counting Room) को अपना पहला केंद्र बनाते हुए जांच की कमान संभाल ली है।

कर्मचारियों के बैंक खातों और रिश्तेदारों पर नजर

SIT ने आते ही सबसे पहला शिकंजा नोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों पर कसा है। पिछले कुछ वर्षों में तैनात रहे सभी कर्मचारियों के नाम, पते और उनकी प्रोफाइल की तस्दीक की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम इस बात पर विशेष ध्यान दे रही है कि गणना कक्ष में ड्यूटी लगने के बाद किन-किन कर्मचारियों की माली हालत (आर्थिक स्थिति) में अचानक बड़ा उछाल आया। इसके साथ ही, कर्मचारियों के बीच आपस में कोई पारिवारिक या नजदीकी रिश्तेदारी तो नहीं है, इसका भी पूरा डेटा खंगाला जा रहा है।

ट्रस्टियों की सूची तलब, 15 दिनों में आएगी फाइनल रिपोर्ट

जांच टीम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से सभी संबंधित अधिकारियों और ट्रस्टियों की एक सूची मांगी है, जिसके आधार पर जल्द ही पूछताछ का दौर शुरू होगा। शासन की ओर से एसआईटी को बेहद सख्त निर्देश दिए गए हैं। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व वाली इस 3 सदस्यीय टीम को एक हफ्ते के भीतर अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और अधिकतम 15 दिनों के अंदर पूरी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी। इस टीम में आईजी लखनऊ रेंज किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन भी शामिल हैं।

क्या रसूखदारों तक पहुंचेगी जांच की आंच?

अयोध्या के गलियारों में इस बात को लेकर सबसे बड़ी चर्चा है कि जांच का दायरा केवल नोट गिनने वाले निचले कर्मचारियों तक सीमित रहेगा या फिर पर्दे के पीछे बैठे बड़े चेहरों तक भी पहुंचेगा। यदि जांच का दायरा बढ़ता है, तो ट्रस्ट और प्रबंधन से जुड़े कई उच्च पदस्थ लोग भी इसकी जद में आ सकते हैं। चर्चाएं हैं कि राम मंदिर की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को जितना चाक-चौबंद दिखाया जाता था, हकीकत में कमीशनखोरी और मिसमैनेजमेंट के कारण जमीनी हकीकत कुछ और ही थी।

वीआईपी दर्शन और सुरक्षा पर भी उठ रहे सवाल

सूत्रों का दावा है कि राम मंदिर में नि:शुल्क दर्शन की व्यवस्था होने के बावजूद कई बार अवैध रूप से धन उगाही की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। हालांकि पहले कुछ लोगों पर कार्रवाई हुई, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसके अलावा, परिसर में कड़ी सुरक्षा और फोटोग्राफी पर पूरी तरह प्रतिबंध होने के बाद भी लगातार सोशल मीडिया पर भीतर की तस्वीरें लीक हो रही हैं, जिसकी जवाबदेही तय होना बाकी है।

संघ-विहिप पदाधिकारियों में बढ़ी धड़कनें, अंदरूनी कलह आई सामने

एसआईटी की धमक के बाद राम मंदिर की व्यवस्थाओं को संभालने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कुछ पदाधिकारियों में आंतरिक रूप से आशंका का माहौल है। संगठन के रसूख पर मनमर्जी चलाने वाले लोगों को डर है कि कहीं इस बार जवाबदेही सीधे उन पर न आ जाए।

दूसरी ओर, राम मंदिर के ग्राउंड स्टाफ और नियमित कर्मचारियों में इस जांच को लेकर संतोष है। कर्मचारियों का दर्द है कि काम का पूरा जिम्मा उन पर होता है, लेकिन ऐन वक्त पर सुपरविजन के नाम पर ऊपर से कुछ लोगों को बैठा दिया जाता है, जो नियमों को ताक पर रखकर दबाव बनाते हैं। कर्मचारियों ने आउटसोर्सिंग कंपनियों को ज्यादा भुगतान किए जाने और अपने कम वेतन को लेकर भी नाराजगी जाहिर की है।

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