उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के इतिहास में 13 जुलाई को एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह यूपी के पहले ‘बैरियर लेस’ (बिना बैरियर वाले) एक्सप्रेस-वे का भव्य उद्घाटन करेंगे। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे देश का ऐसा आधुनिक रूट बनने जा रहा है, जहां टोल टैक्स चुकाने के लिए गाड़ियों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा। गुजरात और दिल्ली के बाद उत्तर प्रदेश इस बेहद हाईटेक तकनीक को लागू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन जाएगा।
रफ्तार पर नहीं लगेगा ब्रेक, 100 की स्पीड में भी कट जाएगा टोल
लगभग 62 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘मल्टी लेन फ्री फ्लो बैरियर’ सिस्टम है। आमतौर पर टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारें लगती हैं, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती है। लेकिन लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे पर गाड़ियां 80 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बिना ब्रेक लगाए सीधे गुजर सकेंगी। टोल प्लाजा से करीब 500 मीटर पहले ही अत्याधुनिक कैमरे और रीडर्स वाहन की पहचान कर टैक्स वसूल लेंगे।
बीच में कोई टोल प्लाजा नहीं, सिर्फ एंट्री और एग्जिट पर लगेगी फीस
टोल का नया नियम: इस एक्सप्रेस-वे के मुख्य रूट के बीच में कोई भी टोल प्लाजा नहीं बनाया गया है। वाहन चालकों से टोल टैक्स केवल एक्सप्रेस-वे पर प्रवेश करने (एंट्री) और बाहर निकलने (एग्जिट) के वक्त ही लिया जाएगा।
इसके लिए एक्सप्रेस-वे के किनारों पर 5 प्रमुख जगहों पर साइड टोल प्लाजा स्थापित किए गए हैं:
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लखनऊ में मिरानपुर पिनवट, खांडेदेव/शिवपुरा और बनी।
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उन्नाव जिले में लालगंज/अमरसस गांव।
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कानपुर में आजाद नगर/शुक्लागंज बाईपास।
जानिए कैसे काम करती है ANPR और RFID तकनीक
इस अत्याधुनिक बैरियर लेस सिस्टम को पूरी तरह पारदर्शी और तेज बनाने के लिए दो मुख्य तकनीकों को आपस में जोड़ा गया है, जो सीधे लखनऊ और कानपुर के मुख्य कंट्रोल रूम से संचालित होती हैं:
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ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकोगनिशन): यह एक बेहद हाई-स्पीड ओवरहेड कैमरा होता है। जब कोई गाड़ी इसके नीचे से गुजरती है, तो यह चंद मिलीसेकंड में उसकी नंबर प्लेट की फोटो खींचकर वाहन की श्रेणी (कार, एसयूवी, ट्रक आदि) की पहचान कर लेता है। यदि गाड़ी पर फास्टैग नहीं है, तो सीधे इसी नंबर के आधार पर चालान या नोटिस घर भेज दिया जाएगा।
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RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन): यह सिस्टम गाड़ी के शीशे पर लगे फास्टैग पर रेडियो तरंगें भेजता है। फास्टैग से यूनिक आईडी मिलते ही सिस्टम जुड़े हुए बैंक खाते या वॉलेट से तय टोल टैक्स की राशि तुरंत काट लेता है। यह पूरी प्रक्रिया पलक झपकते ही पूरी हो जाती है।
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