ईंधन संकट से एशिया में आपातकाल: पाकिस्तान में स्कूल बंद, बांग्लादेश को भारत ने भेजी मदद; जानें आपके पड़ोसी देशों का हाल

नई दिल्ली: ईरान-इजरायल युद्ध की आग ने पूरी दुनिया, विशेषकर एशिया की अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले लिया है। मध्य-पूर्व से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने के कारण एशिया के लगभग सभी देशों में ऊर्जा बचाने के लिए युद्ध स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, एशिया अपनी 60% तेल जरूरतों के लिए मध्य-पूर्व पर निर्भर है, यही कारण है कि ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में तनाव का सबसे बड़ा असर इसी क्षेत्र पर पड़ा है।


पड़ोसी देशों में ‘एनर्जी इमरजेंसी’ के हालात

देश उठाए गए प्रमुख कदम वर्तमान स्थिति
पाकिस्तान सरकारी वाहनों के ईंधन में 50% कटौती, स्कूलों को 2 सप्ताह के लिए बंद किया गया। दफ्तरों में 4-दिवसीय कार्य सप्ताह और 50% स्टाफ के लिए WFH लागू।
बांग्लादेश विश्वविद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद किया गया, पेट्रोल पंपों पर राशनिंग (सीमित आपूर्ति) शुरू। 95% ऊर्जा आयात पर निर्भरता के कारण भारी किल्लत।
श्रीलंका सार्वजनिक परिवहन में कटौती और बिजली की बचत के लिए सख्त निर्देश। आर्थिक स्थिति और ईंधन संकट का दोहरा दबाव।

भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति: बांग्लादेश को सहारा

गंभीर संकट से जूझ रहे बांग्लादेश की मदद के लिए भारत सरकार आगे आई है। “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत भारत ने पाइपलाइन के जरिए 5,000 टन डीजल की पहली खेप बांग्लादेश भेजी है, ताकि वहां की आवश्यक सेवाएं बाधित न हों।

वहीं, घरेलू मोर्चे पर भारत ने अपने रणनीतिक तेल भंडार (SPR) का उपयोग शुरू कर दिया है और रूस से तेल आयात को और अधिक प्राथमिकता दी है। घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने औद्योगिक उपयोग वाली LPG को रोककर उसे घरों की ओर मोड़ दिया है।


अन्य एशियाई देशों की ‘सर्वाइवल’ स्ट्रैटेजी

  • चीन: अपने विशाल रणनीतिक भंडार (100 दिनों से अधिक का स्टॉक) का उपयोग शुरू किया और ईंधन निर्यात पर अस्थायी रोक लगा दी है।

  • दक्षिण कोरिया: 30 वर्षों में पहली बार ईंधन की कीमतों पर ‘प्राइस कैप’ (अधिकतम सीमा) लगाई गई है।

  • थाईलैंड और वियतनाम: सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्राओं पर रोक और निजी कंपनियों से वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) की अपील।

  • फिलिपीन्स: सरकारी दफ्तरों में एयर-कंडीशनिंग का तापमान 24°C से कम न रखने का सख्त निर्देश और 4-दिवसीय कार्य सप्ताह।


UN की चेतावनी: अब खाने की थाली पर संकट

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने आगाह किया है कि यह संकट केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा। यदि आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई, तो:

  1. खाद (Fertilizer) की कमी: ईंधन संकट से खाद का उत्पादन महंगा होगा।

  2. खाद्य सुरक्षा: खेती की लागत बढ़ने से पूरे एशिया में अनाज और सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

विशेषज्ञों की राय: एशिया के देशों के लिए अब नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) की ओर संक्रमण करना केवल पर्यावरण की बात नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूरी बन गया है।

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