नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को लखनऊ के एक वकील की उस विचित्र याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार से 1 करोड़ रुपये दिलाने की मांग की थी। वकील का दावा था कि उन्होंने 2018 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) दीपक मिश्रा को ‘बचाने’ के लिए छह अलग-अलग मामले दायर किए थे, जिसके लिए उन्हें यह राशि मिलनी चाहिए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने इस अर्जी को ‘पूरी तरह से गलत’ करार दिया।
क्या था पूरा मामला?
लखनऊ के वकील अशोक पांडे ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने पहले ही उनकी इस मांग को ठुकरा दिया था। पांडे का तर्क था:
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छह केस फाइल किए: उन्होंने जनवरी 2018 में चार वरिष्ठ जजों द्वारा की गई ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद तत्कालीन CJI दीपक मिश्रा के बचाव में छह याचिकाएं दायर की थीं।
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खर्च और फीस: पांडे के अनुसार, इन मुकदमों में उनका 2 लाख रुपये खर्च हुआ, जो उन्होंने अपनी बेटी से उधार लिए थे। अब वे इसकी फीस और हर्जाने के तौर पर केंद्र सरकार से 1 करोड़ रुपये चाहते थे।
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तर्क: याचिकाकर्ता ने कहा कि जजों का मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करना नियमों के खिलाफ था और उन्होंने संस्थान की गरिमा बचाने के लिए यह कदम उठाया।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी और ‘लताड़’
सुनवाई के दौरान बेंच और याचिकाकर्ता के बीच तीखी बहस हुई। कोर्ट ने वकील के विरोधाभासी बयानों पर उन्हें आड़े हाथों लिया:
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संस्थान की सेवा का मूल्य: जब वकील ने एक करोड़ रुपये की मांग की, तो चीफ जस्टिस ने कहा— “आपने संस्थान के लिए सोशल सर्विस (समाज सेवा) की। सोशल सर्विस हमेशा अनमोल होती है। इसकी कीमत एक करोड़ या दो करोड़ रुपये कैसे लगाई जा सकती है?”
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विरोधाभास पर सवाल: कोर्ट ने याद दिलाया कि पहले याचिकाकर्ता ने जजों के खिलाफ कई आरोप लगाए थे। सीजेआई ने पूछा— “जजों के खिलाफ हर तरह के आरोप लगाने के बाद, अब आप उनके लिए ‘माननीय’ (Respectable) शब्द का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं?”
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प्रशंसा की पेशकश: बेंच ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर आप अपनी सेवा के लिए सिर्फ तारीफ चाहते हैं, तो हम आपकी तारीफ करते हैं, लेकिन पैसे का दावा बिल्कुल गलत है।
हाई कोर्ट का पिछला रुख
इससे पहले, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट के सामने पांडे ने कानून और न्याय मंत्रालय के जुलाई 2024 के उस आदेश को भी चुनौती दी थी, जिसमें मंत्रालय ने उनके 1 करोड़ रुपये के दावे को खारिज कर दिया था।
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