
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक तापमान अभी से चढ़ने लगा है। राज्य की सत्ता में लगातार तीसरी बार वापसी की रणनीति पर काम कर रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने संगठन और चुनावी बिसात को मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंकने की योजना तैयार कर ली है। पार्टी इसी हफ्ते से अपने महाअभियान का आगाज करने जा रही है, जिसमें केंद्रीय स्तर के दिग्गज रणनीतिकार सीधे जमीनी कार्यकर्ताओं और संगठन के पदाधिकारियों के बीच उतरेंगे।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष के बैक-टू-बैक दौरों से प्रदेश का सियासी माहौल पूरी तरह गर्माने वाला है। संगठन के शीर्ष रणनीतिकारों का यह दखल साफ संकेत देता है कि बीजेपी उत्तर प्रदेश को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
पश्चिमी यूपी से नितिन नवीन करेंगे दौरों की शुरुआत: मेरठ और गाजियाबाद में बैठकों का दौर
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन उत्तर प्रदेश के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों का सघन दौरा करेंगे। उनके इन दौरों की औपचारिक शुरुआत राजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होने जा रही है।
तय कार्यक्रम के अनुसार, नितिन नवीन का दौरा इसी हफ्ते पश्चिमी यूपी के मेरठ मंडल से शुरू होगा। इसके बाद अगले दिन वह गाजियाबाद में प्रमुख नेताओं के साथ अहम बैठकें करेंगे। इस दौरान वे सांसदों, विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्षों, महापौरों, जिला प्रभारियों और जिलाध्यक्षों के साथ सीधा संवाद स्थापित करेंगे।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश हमेशा से चुनावी गणित में निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। जाट, किसान और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से इस इलाके में पार्टी की पकड़ को और अधिक मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेंगे और जमीनी फीडबैक लेंगे। पश्चिमी क्षेत्र के बाद वे अवध, काशी, गोरखपुर, ब्रज और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्रों का भी क्रमवार दौरा करेंगे।
बीएल संतोष परखेंगे लखनऊ में संगठन की नब्ज: सोशल मीडिया और बूथ स्तर पर फोकस
एक तरफ जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष मैदान में उतरकर क्षेत्रीय समीकरणों को साधेंगे, वहीं पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष राजधानी लखनऊ में डेरा डालकर संगठनात्मक तंत्र की बारीकियों की समीक्षा करेंगे। बीएल संतोष के साथ नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और सह-प्रभारी जगदीश भाई पटेल भी लखनऊ पहुंचेंगे।
प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े का हाल ही में हुआ दो दिवसीय दौरा मुख्य रूप से परिचयात्मक रहा था। अब 10 और 11 सितंबर को प्रस्तावित बीएल संतोष के दौरे में संगठनात्मक मशीनरी का विस्तृत ऑडिट किया जाएगा। इस बैठक में खासतौर से प्रदेश पदाधिकारियों, विभिन्न मोर्चा प्रभारियों और आईटी-सोशल मीडिया सेल की कार्यप्रणाली पर मंथन होगा।
चूंकि मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और अन्य विरोधी खेमे सोशल मीडिया पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, इसलिए बीजेपी अपने डिजिटल और नैरेटिव वॉर को धार देने के लिए विशेष रणनीति तैयार कर रही है। बीएल संतोष मीडिया और सोशल मीडिया टीम को विपक्ष के हर हमले का तुरंत और प्रभावी जवाब देने का नया रोडमैप सौंपेंगे। इसके साथ ही शक्ति केंद्रों और बूथ समितियों के पुनर्गठन और पन्ना प्रमुखों की सक्रियता की भी बिंदुवार समीक्षा की जाएगी।
यूपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह का भी इसी माह दौरा प्रस्तावित
बीजेपी की चुनावी रणनीति की चर्चा गृह मंत्री अमित शाह के बिना अधूरी मानी जाती है। वर्ष 2013 में यूपी प्रभारी बनने के बाद से अमित शाह का उत्तर प्रदेश की राजनीति और यहां के सामाजिक ताने-बाने पर गहरा प्रभाव रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इसी महीने के उत्तरार्ध में गृह मंत्री अमित शाह का भी उत्तर प्रदेश दौरा प्रस्तावित है।
अमित शाह के दौरे के दौरान कोर कमेटी की उच्चस्तरीय बैठक हो सकती है, जिसमें चुनावी रणनीति, सहयोगियों के साथ सीट शेयरिंग के बुनियादी सिद्धांतों और संगठनात्मक फेरबदल को अंतिम रूप दिया जाएगा। शाह के यूपी आने से कार्यकर्ताओं और नेताओं में एक अलग मनोवैज्ञानिक ऊर्जा का संचार होता है। पार्टी का प्रदेश नेतृत्व उनके दौरे को लेकर अभी से तैयारियों में जुट गया है।
सीएम योगी आदित्यनाथ का चेहरा और धुआंधार दौरे: डबल इंजन की मजबूती पर जोर
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे और उनके पिछले कार्यकाल के कामकाज के आधार पर ही जनता की अदालत में जाने वाली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले से ही पूरी तरह चुनावी मोड में नजर आ रहे हैं। वे लगातार प्रदेश के अलग-अलग मंडलों और जिलों का दौरा कर विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास कर रहे हैं।
कानून-व्यवस्था, माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और गरीब कल्याण योजनाओं के सीधे लाभ को बीजेपी अपने मुख्य चुनावी हथियार के रूप में पेश कर रही है। संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के साथ केंद्रीय नेतृत्व की लगातार समन्वय बैठकें हो रही हैं।
प्रदेश और क्षेत्रीय टीमों की घोषणा के बाद अब जल्द ही महिला मोर्चा, युवा मोर्चा, किसान मोर्चा और पिछड़ा वर्ग मोर्चा जैसी इकाइयों के गठन की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है, ताकि हर सामाजिक वर्ग को सीधे पार्टी के साथ जोड़ा जा सके।
विपक्ष की घेराबंदी और बीजेपी का काउंटर प्लान
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी और इंडिया गठबंधन के दल भी अपनी तैयारियों को तेज कर रहे हैं। अखिलेश यादव रथयात्रा निकालने और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और अधिक धार देने की योजना बना रहे हैं। विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई और स्थानीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।
विपक्ष के इन दावों और हमलों की काट के लिए बीजेपी अपने कैडर आधारित ढांचे को सक्रिय कर रही है। नितिन नवीन, अमित शाह और बीएल संतोष की तिकड़ी का यह संयुक्त प्रयास न केवल संगठन की आंतरिक कमियों को दूर करेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को यह स्पष्ट संदेश भी देगा कि 2027 की लड़ाई के लिए दिल्ली से लेकर लखनऊ तक की लीडरशिप पूरी तरह एकजुट और आक्रामक है।
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