कांग्रेस में ‘ऑपरेशन बदलाव’: राहुल-प्रियंका ने 130 नेताओं से पूछे तीखे सवाल, AICC के आधे सचिवों की छुट्टी तय

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस में बड़े स्तर पर सांगठनिक सर्जरी की तैयारी पूरी हो चुकी है। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद संगठन को चुस्त-दुरुस्त और जमीनी स्तर पर जवाबदेह बनाने के लिए पार्टी नेतृत्व ने ‘ऑपरेशन बदलाव’ की शुरुआत कर दी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के स्तर पर होने वाले इस व्यापक फेरबदल की कमान खुद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अपने हाथों में ले रखी है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में राहुल और प्रियंका ने करीब 130 संभावित युवा और सक्रिय नेताओं के व्यक्तिगत व सामूहिक इंटरव्यू लिए हैं। इस कवायद के बाद वर्तमान में कार्यरत 64 AICC सचिवों में से करीब आधे (50 फीसदी) सचिवों की छुट्टी होना तय माना जा रहा है। कांग्रेस अब केवल सिफारिशी या ‘दरबारी’ राजनीति के बजाय ठोस रिपोर्ट कार्ड और परफॉर्मेंस के आधार पर ही पद देने के मूड में है।

12-14 नेताओं के बैच में इंटरव्यू: 1 मिनट में परिचय और तीखे सवाल

नए सचिवों के चयन के लिए यह स्क्रीनिंग प्रक्रिया 7 सितंबर से नई दिल्ली में शुरू हुई थी। इंटरव्यू का अंदाज बेहद कॉरपोरेट और प्रोफेशनल रखा गया, जहां 12 से 14 नेताओं के छोटे-छोटे बैच बनाकर उनसे सीधे सवाल-जवाब किए गए:

  • तैयार था विस्तृत डोजियर: इंटरव्यू टेबल पर बैठे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के सामने हर नेता का पूरा राजनीतिक कच्चा-चिट्ठा (डोजियर) मौजूद था। इसमें उनके द्वारा पिछले वर्षों में किए गए जमीनी काम, आंदोलन में हिस्सेदारी और चुनावी प्रदर्शन का पूरा ब्योरा दर्ज था।

  • एक मिनट में परिचय: नेताओं को औपचारिकता से बचाते हुए सबसे पहले 60 सेकंड (एक मिनट) में अपना संक्षिप्त परिचय और मुख्य राजनीतिक उपलब्धियां बताने को कहा गया।

  • जवाबदेही पर सवाल: नेतृत्व ने नेताओं से दो टूक पूछा कि आपको पूर्व में जो जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, उसमें आपने क्या नया किया? पार्टी में आपका वास्तविक योगदान क्या रहा और किन मोर्चों पर आपसे चूक हुई?

काल्पनिक राजनीतिक परिस्थितियों पर टेस्ट: ‘कमजोर राज्य मिले तो क्या करेंगे?’

इस पूरी चयन प्रक्रिया का सबसे दिलचस्प पहलू उम्मीदवारों को दी गई ‘हाइपोथेटिकल’ (काल्पनिक) राजनीतिक चुनौतियां थीं। इंटरव्यू में शामिल नेताओं के अनुसार, उनसे पूछा गया:

  • “यदि आपको किसी ऐसे राज्य का प्रभार सौंपा जाए जहां पिछले 15-20 वर्षों से कांग्रेस का जनाधार पूरी तरह कमजोर हो चुका है या आने वाले महीनों में चुनाव होने हैं, तो संगठन को दोबारा खड़ा करने का आपका 100 दिनों का रोडमैप क्या होगा?”

  • नेताओं से यह भी पूछा गया कि स्थानीय गुटबाजी से निपटने और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए वे क्या ठोस कदम उठाएंगे।

इसके अलावा पार्टी द्वारा देश भर में चलाए जा रहे ‘संगठन सृजन अभियान’ को लेकर भी नेताओं की समझ परखी गई कि वे संगठन में ब्लॉक व जिला स्तर पर हो रहे बदलावों को किस नजरिए से देखते हैं।

64 में से 30 से अधिक सचिवों पर गिर सकती है गाज

वर्तमान में AICC में 64 सचिव हैं, जिन्हें अलग-अलग राज्यों के प्रभारियों (महासचिवों) के साथ अटैच किया गया है या फिर वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे व केसी वेणुगोपाल के दफ्तर का कामकाज संभाल रहे हैं।

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की समीक्षा में सामने आया है कि कई सचिव केवल कागजी दौरों और सोशल मीडिया तक सीमित हैं, जबकि राज्यों में उनका जमीनी जुड़ाव शून्य के बराबर रहा है। राहुल और प्रियंका गांधी मौजूदा सचिवों के साथ बैठक कर उनके कामकाज का निष्पक्ष रिपोर्ट कार्ड उनके सामने रखने वाले हैं। माना जा रहा है कि 50 फीसदी यानी लगभग 30 से 32 सचिवों को पदमुक्त कर दिया जाएगा। हालांकि, जिन 6-7 नेताओं को हाल ही में दूसरी सांगठनिक जिम्मेदारियां मिली हैं, उन्हें पदोन्नति के तहत नई भूमिकाएं दी जा सकती हैं।

कागजी नेताओं की जगह पसीना बहाने वाले चेहरों को तरजीह

कांग्रेस आलाकमान का यह कड़ा रुख साफ संकेत देता है कि 2026-2027 के महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों (जैसे पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश) से पहले पार्टी अपने सांगठनिक ढांचे को पूरी तरह एक्टिव मोड में लाना चाहती है।

नेतृत्व का संदेश स्पष्ट है—अब केवल दिल्ली के चक्कर लगाने या बड़े नेताओं के करीबी होने से पद नहीं मिलेगा। जो नेता धूप और बारिश में सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर सकते हैं, जनहित के मुद्दों पर जनता को जोड़ सकते हैं, केवल उन्हें ही पार्टी की मुख्यधारा में सचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। बैठक के बाद किसी भी समय AICC के नए और युवा सचिवों की बहुप्रतीक्षित सूची जारी की जा सकती है।

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