दीवार का प्लास्टर फूलकर गुब्बारे जैसा हो रहा है? तुरंत करें ये 3 जरूरी काम, सीलन और पपड़ी होगी हमेशा के लिए खत्म

बरसात के मौसम में या जमीन से उठने वाली नमी के चलते घरों की दीवारों का प्लास्टर फूलना, पपड़ी बनकर झड़ना और रंग-रोगन का खराब होना एक बेहद आम समस्या है। कई बार लोग दीवार पर उभरे इस गुब्बारे जैसी फूली हुई परत को नजरअंदाज कर देते हैं या फिर सीधे ऊपर से पुट्टी और पेंट की नई परत चढ़ाकर उसे ढकने की कोशिश करते हैं। यह तरीका पूरी तरह से गलत है, क्योंकि जब तक दीवार के अंदर फंसी नमी और सीलन (Dampness) का पक्का इलाज नहीं किया जाएगा, तब तक नया पेंट भी कुछ ही हफ्तों में दोबारा उखड़कर गिर जाएगा। दीवार का प्लास्टर फूलने का मुख्य कारण ईंटों के जरिए पानी का रिसाव, पाइपलाइन में लीकेज या जमीन से कैपिलरी एक्शन के जरिए ऊपर चढ़ने वाला ग्राउंड वाटर होता है। अगर आपके घर में भी यह समस्या आ चुकी है, तो सही समय पर वैज्ञानिक और कारगर तरीके अपनाकर दीवार को स्थायी रूप से मजबूत और सूखा बनाया जा सकता है।

फूले हुए प्लास्टर को पूरी तरह हटाएं: सिर्फ पुट्टी लगाना नहीं है समाधान

दीवार की मरम्मत शुरू करने का सबसे पहला और बुनियादी नियम यह है कि फूले हुए और कमजोर हो चुके हिस्से को जड़ से साफ किया जाए। जहां भी प्लास्टर खोखला या गुब्बारे जैसा नजर आ रहा हो, वहां किसी लोहे की पत्ती (Scraper), छेनी या वायर ब्रश की मदद से सारी ढीली पपड़ी और खराब प्लास्टर को खुरचकर पूरी तरह निकाल दें। जब आप इसे हटाएंगे, तो अक्सर दीवार पर सफेद रंग का नमक जैसा पाउडर (Efflorescence या शोरा) जमा दिखाई देगा। यह पानी के सूखने के बाद बचा हुआ मिनरल साल्ट होता है, जो प्लास्टर और पेंट को ईंटों से अलग कर देता है।

इस सफेद शोरे को सूती सूखे कपड़े या सख्त वायर ब्रश से रगड़कर पूरी तरह साफ करें। इसके बाद उस हिस्से को एक-दो दिन के लिए खुला छोड़ दें ताकि हवा और धूप से दीवार के अंदर की बची हुई गीली नमी पूरी तरह सूख जाए। कभी भी गीली या नम दीवार पर केमिकल या नया सीमेंट लगाने की जल्दबाजी न करें, क्योंकि अगर दीवार के पोरों में पानी बंद रह गया तो वह कुछ दिनों बाद दोबारा भाप बनकर नए प्लास्टर को उखाड़ देगा।

वॉटरप्रूफिंग केमिकल और डैम्प-ब्लॉक कोटिंग: सीलन को रोकें वहीं का वहीं

जब दीवार की सतह पूरी तरह सूख जाए, तो सामान्य सीमेंट लगाने से पहले उस पर उच्च गुणवत्ता वाले वॉटरप्रूफिंग बॉन्डिंग एजेंट या सीलन-रोधी केमिकल का इस्तेमाल करना जरूरी होता है। बाजार में एसबीआर (SBR) लेटेक्स बेस्ड या सिलिकॉन आधारित डैम्प प्रूफ प्राइमर आसानी से मिल जाते हैं। एक हिस्से केमिकल में थोड़ा सा पानी मिलाकर ब्रश की मदद से खुरची हुई ईंटों और उसके आसपास के मजबूत प्लास्टर पर कम से कम दो कोट लगाएं। पहला कोट सूखने के 4 से 6 घंटे बाद ही दूसरा कोट लगाना चाहिए।

यह वॉटरप्रूफिंग लेयर दीवार के भीतर मौजूद सूक्ष्म छिद्रों (Pores) को पूरी तरह सील कर देती है, जिससे भविष्य में पानी या नमी आगे नहीं बढ़ पाती। इसके बाद जब नया प्लास्टर तैयार करें, तो सादे सीमेंट और रेत के मिश्रण में भी वाटरप्रूफिंग लिक्विड एडिटिव जरूर मिलाएं। इस नए वॉटरप्रूफ प्लास्टर को समतल तरीके से दीवार पर लगाएं और इसे ठीक से सूखने दें। इसके ऊपर सामान्य चॉक बेस्ड पुट्टी के बजाय ‘वॉटरप्रूफ पॉलीमर बेस्ड पुट्टी’ का ही उपयोग करें ताकि दीवार में नमी का एक कतरा भी टिक न सके।

सीलन की असली जड़ पहचानें: बाहरी दीवार और प्लंबिंग की जांच बेहद जरूरी

भीतरी दीवार पर कितना भी अच्छा केमिकल लगा लिया जाए, लेकिन अगर पानी आने का मुख्य स्रोत बंद नहीं किया गया, तो सीलन पास के किसी दूसरे हिस्से में उभर आएगी। इसलिए जरूरी है कि समस्या के मूल स्रोत का पता लगाया जाए। घर के बाथरूम या किचन की जो दीवार प्रभावित कमरे से सटी हुई है, वहां प्लंबिंग पाइप, जोड़ों और टाइल्स के बीच के गैप (Grout) की बारीकी से जांच करें। अगर टाइल्स के जोड़ों से पानी रिस रहा है, तो वहां तुरंत एपॉक्सी ग्राउटिंग कराएं।

इसके अलावा, अगर दीवार बाहरी दिशा में खुलती है, तो बाहर की तरफ से पड़ने वाली बारिश का पानी ईंटों में सोख लिया जाता है। बाहरी दीवार पर आए किसी भी बारीक क्रैक (Hairline Cracks) को क्रैक फिलर पेस्ट से भरें और पूरी बाहरी दीवार पर रेन-प्रूफ वॉटरप्रूफ एक्सटीरियर पेंट का कोट करवाएं। वहीं, अगर सीलन जमीन से ऊपर की तरफ 2 से 3 फीट तक चढ़ रही है, तो यह ‘राइजिंग डैम्प’ की समस्या है। इसके लिए स्कर्टिंग लेवल पर सिलिकॉन इंजेक्शन ट्रीटमेंट या नीचे से केमिकल डैम्प प्रूफ कोर्स (DPC) तैयार करवाकर सीलन के रास्ते को हमेशा के लिए तोड़ा जा सकता है।

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