
प्योंगयांग/सियोल। उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच जारी सैन्य तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दुश्मन ताकतों द्वारा शुरू किए गए ताजा सैन्य प्रशिक्षण के अगले ही दिन उत्तर कोरियाई सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन की शक्तिशाली बहन किम यो-जोंग ने कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है। किम यो-जोंग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सैन्य उकसावे की कार्रवाई बंद नहीं की गई, तो इसके परिणाम इतने भयावह और अकल्पनीय होंगे कि उन्हें संभालना किसी के वश में नहीं होगा। इस बयान के बाद पूरे कोरियाई प्रायद्वीप में युद्ध की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
सैन्य अभ्यास के शुरू होते ही प्योंगयांग का सख्त रुख
जैसे ही सीमा पर दुश्मन ताकतों ने अपना युद्धाभ्यास और प्रशिक्षण शुरू किया, उत्तर कोरिया की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। किम यो-जोंग, जिन्हें उत्तर कोरिया की सत्ता में नंबर दो की हैसियत प्राप्त है, ने विदेशी ताकतों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया की संप्रभुता को चुनौती देने वाला कोई भी कदम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्योंगयांग इस सैन्य प्रशिक्षण को अपनी सुरक्षा के लिए सीधे खतरे और युद्ध की तैयारी के रूप में देख रहा है, जिसे लेकर उसकी आक्रामकता अब चरम पर है।
‘भयावह परिणाम’ की धमकी से दुनिया में हड़कंप
किम यो-जोंग का यह बयान केवल एक राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि एक सीधी धमकी के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में ‘अकल्पनीय और भयावह’ जैसे शब्दों का प्रयोग कर यह संकेत दिया है कि उत्तर कोरिया जवाबी कार्रवाई के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया अपने मिसाइल परीक्षणों या परमाणु शक्ति के प्रदर्शन के जरिए इस चेतावनी को हकीकत में बदल सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात को लेकर चिंतित है कि क्या यह जुबानी जंग जल्द ही किसी बड़े सैन्य टकराव में तब्दील हो सकती है।
कोरियाई प्रायद्वीप में मंडरा रहे युद्ध के बादल
दक्षिण कोरिया और अमेरिका के संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास को लेकर उत्तर कोरिया हमेशा से ही हमलावर रहा है, लेकिन इस बार किम यो-जोंग का तेवर पहले से कहीं अधिक सख्त नजर आ रहा है। प्योंगयांग ने साफ कर दिया है कि उनकी सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर है। ऐसे में एक छोटी सी गलती भी इस क्षेत्र को एक ऐसी तबाही की ओर धकेल सकती है, जिसकी कल्पना भी डराने वाली है। दुनिया भर की निगाहें अब उत्तर कोरिया के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे केवल धमकियों तक सीमित रहेंगे या फिर कोई बड़ा सैन्य एक्शन लेंगे।
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