
अचानक दिल की धड़कन रुक जाने या कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में मरीज के पास बचने के लिए बेहद कम समय होता है। जब दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है, तो दिमाग और शरीर के अन्य अहम अंगों तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई तुरंत रुक जाती है। ऐसी मेडिकल इमरजेंसी में एम्बुलेंस या डॉक्टर के आने से पहले दिया जाने वाला सीपीआर यानी ‘कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन’ (Cardiopulmonary Resuscitation) जीवन और मृत्यु के बीच की सबसे मजबूत कड़ी साबित होता है। हालांकि, सीपीआर जितना जीवनरक्षक है, गलत समय या गलत तरीके से दिया जाने पर उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि सीपीआर कब देना चाहिए, कब इससे बचना चाहिए और इसे देने का सही चिकित्सीय तरीका क्या है।
सीपीआर कब देना चाहिए? पहचानें ये आपातकालीन संकेत
सीपीआर केवल और केवल उस स्थिति में दिया जाता है जब पीड़ित व्यक्ति की सांसें और दिल की धड़कन पूरी तरह थम चुकी हों या असामान्य हो गई हों। इसे शुरू करने से पहले तीन मुख्य बातों की तुरंत जांच करें:
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बेहोशी और कोई प्रतिक्रिया न होना: पीड़ित व्यक्ति अचानक जमीन पर गिर पड़े और हिलाने-डुलाने या जोर से आवाज देने पर भी कोई प्रतिक्रिया न दे।
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सांस का पूरी तरह रुकना या हांफना (Agonal Breathing): यदि व्यक्ति बिल्कुल सांस नहीं ले रहा है, या फिर केवल हवा खींचने जैसी असामान्य आवाजें निकाल रहा है (गैस्पिंग कर रहा है), तो यह कार्डियक अरेस्ट का स्पष्ट लक्षण है।
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नब्ज (Pulse) का न मिलना: गले के किनारे कैरोटिड आर्टरी (Carotid Artery) पर 5 से 10 सेकंड तक उंगलियां रखकर देखें। अगर कोई धड़कन या पल्स महसूस न हो, तो बिना एक सेकंड गंवाए तुरंत सीपीआर शुरू करना चाहिए।
किन स्थितियों में सीपीआर बिल्कुल नहीं देना चाहिए?
सीपीआर देने से पहले यह समझना सबसे जरूरी है कि इसे हर बेहोश व्यक्ति पर नहीं आजमाया जा सकता। यदि मरीज की सांसें सामान्य रूप से चल रही हैं और उसकी नब्ज महसूस हो रही है, तो सीपीआर कभी न दें।
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सामान्य बेहोशी या लो ब्लड प्रेशर: यदि कोई व्यक्ति गर्मी, डिहाइड्रेशन, लो बीपी या कमजोरी की वजह से बेहोश हुआ है लेकिन उसकी सांस और नब्ज सामान्य चल रही है, तो उसे सीपीआर की जरूरत नहीं होती। ऐसे में उसे हवादार जगह पर लिटाकर पैरों को थोड़ा ऊपर उठाएं।
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मरीज अगर होश में हो या खांस रहा हो: यदि पीड़ित बात कर रहा है, खांस रहा है या हिल-डुल रहा है, तो उसकी छाती पर दबाव न डालें।
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हार्ट अटैक बनाम कार्डियक अरेस्ट: यदि मरीज को सीने में तेज दर्द हो रहा है और पसीना आ रहा है (हार्ट अटैक), लेकिन वह होश में है और सांस ले रहा है, तो सीपीआर न दें। उसे तुरंत अस्पताल ले जाएं। धड़कते हुए दिल पर तेज दबाव डालने से दिल की गति (Heart Rhythm) बिगड़ सकती है और पसलियां टूट सकती हैं।
‘हैंड्स-ओनली सीपीआर’ देने का सही और सुरक्षित तरीका
अगर आप ट्रेंड मेडिकल प्रोफेशनल नहीं हैं, तो मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार केवल हाथों से दिया जाने वाला ‘हैंड्स-ओनली सीपीआर’ सबसे असरदार और सुरक्षित माना जाता है। इसे सही ढंग से करने के कदम निम्नलिखित हैं:
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मदद के लिए पुकारें: सबसे पहले तुरंत एम्बुलेंस (108/112) को कॉल करें या आसपास के किसी व्यक्ति को इमरजेंसी कॉल करने और एईडी (AED) मशीन ढूंढने को कहें।
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सख्त सतह पर लिटाएं: मरीज को किसी सख्त और समतल फर्श पर सीधा पीठ के बल लिटाएं। गद्दे या सोफे पर सीपीआर कभी असरदार नहीं होता।
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हाथों की सही पोजीशन: मरीज के बगल में घुटनों के बल बैठें। अपनी एक हथेली को मरीज के सीने के बिल्कुल बीचों-बीच (ब्रेस्टबोन/स्टर्नम पर) रखें। दूसरी हथेली को उसके ऊपर रखकर उंगलियों को आपस में इंटरलॉक कर लें।
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कोहनियां सीधी रखें: अपनी कोहनियों को बिल्कुल सीधा रखें और अपने कंधों को मरीज की छाती के ठीक ऊपर रखें, ताकि दबाव आपके शरीर के वजन से पड़े, सिर्फ बांहों की ताकत से नहीं।
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कम्प्रेशन की गति और गहराई: छाती को कम से कम 2 से 2.4 इंच (5 से 6 सेंटीमीटर) गहराई तक दबाएं। दबाव की गति प्रति मिनट 100 से 120 बार होनी चाहिए (जैसे ‘Stayin’ Alive’ गाने की बीट)।
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छाती को वापस ऊपर आने दें: हर बार दबाने के बाद छाती को पूरी तरह वापस सामान्य स्थिति में आने दें, ताकि दिल में दोबारा खून भर सके।
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जारी रखें: इस प्रक्रिया को तब तक लगातार चालू रखें जब तक कि मेडिकल टीम न आ जाए या मरीज में सांस और होश के लक्षण न दिखने लगें।
सीपीआर देते समय इन बड़ी गलतियों से बचें
सीपीआर के दौरान जल्दबाजी या घबराहट में अक्सर कुछ गलतियां हो जाती हैं जो नुकसान पहुंचा सकती हैं। कभी भी छाती पर बहुत ऊपर (गर्दन के पास) या बहुत नीचे (पेट के ऊपरी हिस्से) दबाव न डालें, इससे पसलियां टूटने और अंदरूनी अंगों जैसे लिवर या फेफड़ों के क्षतिग्रस्त होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा, कम्प्रेशन के बीच बहुत लंबे ब्रेक न लें; खून का प्रवाह लगातार बना रहना चाहिए। यदि मुंह से सांस देने (Rescue Breaths) की उचित ट्रेनिंग नहीं है, तो उसमें समय बर्बाद न करें और केवल लगातार छाती दबाने पर ही ध्यान दें। सही समय पर लिया गया सही फैसला ही किसी की जिंदगी बचा सकता है।
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