अतीक परिवार के खौफ से सलीम बना ‘देवव्रत’: पुलिस ने घर पर मारा छापा तो उड़े होश

प्रयागराज। माफिया अतीक अहमद और उसके कुनबे का खौफ भले ही कानूनी कार्रवाइयों और मुठभेड़ों के बाद खत्म होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन उस आतंक के साए में सालों तक घुट-घुट कर जीने वाले लोगों की जो दास्तानें अब सामने आ रही हैं, वे किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं हैं। ऐसा ही एक रोंगटे खड़े कर देने वाला सनसनीखेज मामला तब उजागर हुआ जब पुलिस की एक विशेष टीम एक पुराने मामले की तफ्तीश करते हुए एक संदिग्ध पते पर छापेमारी करने पहुंची। पुलिस जिसे एक हिंदू नाम ‘देवव्रत’ के रूप में तलाश रही थी, घर का दरवाजा खुलते ही और दस्तावेजों की पड़ताल होते ही जो सच सामने आया, उसने जांच अधिकारियों के होश उड़ा दिए। दरअसल, ‘देवव्रत’ के नाम से सादगी भरी और गुमनाम जिंदगी काट रहा यह शख्स कोई और नहीं बल्कि सलीम था, जिसने अतीक अहमद के गैंग, उसकी बेगम शाइस्ता परवीन और गुर्गों की जानलेवा धमकियों से बचने के लिए अपनी पूरी पहचान ही बदल डाली थी।

पुलिस की दस्तक और पहचान का चौंकाने वाला खुलासा

मामले की शुरुआत उस वक्त हुई जब प्रयागराज पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम अवैध संपत्ति, फर्जी पहचान पत्रों और अतीक गैंग के पुराने लेन-देन के मामलों की कड़ी जोड़ते हुए एक इनपुट के आधार पर दबिश देने पहुंची।

पुलिस के पास सूचना थी कि इलाके में एक व्यक्ति संदिग्ध गतिविधियों और बदले हुए नाम के साथ रह रहा है। पुलिस जब घर में दाखिल हुई, तो वहां रहने वाले शख्स ने खुद को ‘देवव्रत’ बताया और उसी नाम से जुड़े पहचान पत्र दिखाने की कोशिश की। लेकिन जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की और बायोमेट्रिक व पुराने आपराधिक-नागरिक रिकॉर्ड्स का मिलान किया, तो उसकी असली पहचान ‘सलीम’ के रूप में पुख्ता हो गई। जब पुलिस ने पहचान छुपाने की वजह पूछी, तो उसने हाथ जोड़कर जो दास्तान सुनाई, उसने पुलिसकर्मियों को भी स्तब्ध कर दिया।

क्यों सलीम को बनना पड़ा ‘देवव्रत’? अतीक गैंग का वो काला सच

सलीम ने पुलिस पूछताछ में बिलखते हुए बताया कि यह कदम उसने किसी अपराध को अंजाम देने के लिए नहीं, बल्कि अपनी और अपने परिवार की जान बचाने की अंतिम कोशिश के तहत उठाया था।

  • जमीनों पर जबरन कब्जे का विरोध: सलीम का कसूर सिर्फ इतना था कि उसके पुश्तैनी मकान और कीमती जमीन पर अतीक अहमद के बेटों और शूटरों की नजर पड़ गई थी। जब उसने अपनी जमीन कौड़ियों के भाव माफिया को सौंपने से इनकार कर दिया, तो उसे जान से मारने की धमकियां मिलनी शुरू हो गईं।

  • रंगदारी और जानलेवा हमले का खौफ: सलीम के मुताबिक, अतीक के जेल में रहने के दौरान भी उसके गुर्गे घर आकर खुलेआम असलहे लहराते थे और परिवार को जिंदा जलाने की धमकी देते थे। एक बार उस पर जानलेवा हमला भी किया गया, जिसमें वह बाल-बाल बचा था।

  • पहचान मिटाकर भागने का फैसला: जब थाने और चौकियों के चक्कर काटने के बाद भी माफिया के रसूख के आगे कोई रास्ता नहीं दिखा, तो सलीम ने शहर छोड़कर अपनी पूरी पहचान बदलने का खौफनाक फैसला लिया। उसने अपना नाम बदलकर ‘देवव्रत’ रख लिया, हिंदू वेशभूषा अपनाई और माथे पर तिलक लगाकर एक अनजान बस्ती में दिहाड़ी व छोटा-मोटा काम करके छिपकर रहने लगा ताकि अतीक के मुखबिर उस तक कभी न पहुंच सकें।

फर्जी दस्तावेजों का जाल या जान बचाने की बेबसी?

जांच के दौरान पुलिस को उसके पास से नए नाम वाले कुछ दस्तावेज भी मिले हैं, जिन्हें उसने स्थानीय स्तर पर बनवा लिया था।

सलीम ने रोते हुए पुलिस अधिकारियों से कहा, ‘अतीक और उसके गुर्गों की नजर में अगर कोई एक बार चढ़ जाता था, तो वह कब्र में ही जाकर दम लेता था। मेरे पास अपने बच्चों को अनाथ होने से बचाने के लिए हिंदू नाम अपनाने और खुद को खत्म मान लेने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। मुझे डर था कि अगर मैं सलीम बनकर रहा, तो अतीक के शूटर मुझे ढूंढकर मार डालेंगे।’

पुलिस जांच में जुटी: कानूनी पहलू और पीड़ित की सुरक्षा

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है।

अधिकारी यह पड़ताल कर रहे हैं कि पहचान बदलने के पीछे केवल माफिया के डर की ही वजह थी या इसके पीछे किसी कानूनी केस से बचने का कोई अन्य पहलू भी जुड़ा है। हालांकि, प्राथमिक जांच में सलीम के दावों में दम नजर आ रहा है क्योंकि अतीक अहमद के आतंक के दौर में दर्जनों व्यापारियों और आम नागरिकों ने डर के मारे प्रयागराज से पलायन किया था। पुलिस अब उसके बयानों को दर्ज कर रही है और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि फर्जी कागजात के कानूनी प्रावधानों और पीड़ित की मानवीय परिस्थितियों के बीच निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि प्रयागराज में अतीक अहमद का माफिया राज आम इंसानों की जिंदगी और उनकी पहचान तक को निगल जाने की हद तक खौफनाक था।

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