
आजकल जिम में वर्कआउट करते हुए, मंच पर भाषण देते हुए या घर पर सामान्य बातचीत करते समय अचानक लोगों के गिरने और जान गंवाने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह होती है कि इनमें से कई लोगों ने कुछ दिन पहले ही फुल बॉडी चेकअप कराया होता है और उनकी ब्लड रिपोर्ट, ईसीजी (ECG), ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के आंकड़े पूरी तरह सामान्य यानी नॉर्मल निकले होते हैं। ऐसे में परिजनों और आम लोगों के मन में यह गहरा सवाल उठता है कि जब रिपोर्ट में कोई खराबी नहीं थी, तो फिर दिल ने अचानक काम करना क्यों बंद कर दिया। कार्डियोलॉजिस्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य जांच रिपोर्टें दिल की सेहत की पूरी गारंटी नहीं होतीं। हार्ट अटैक और सडन कार्डियक अरेस्ट (Sudden Cardiac Arrest) के बीच एक बुनियादी अंतर होता है जिसे समझना बेहद जरूरी है।
हार्ट अटैक बनाम कार्डियक अरेस्ट: प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल सिस्टम का बड़ा फर्क
आम लोग अक्सर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों की प्रकृति बिल्कुल अलग होती है। हार्ट अटैक एक ‘प्लंबिंग’ समस्या है, जिसमें दिल की किसी धमनी में खून का थक्का जमने से रक्त संचार रुक जाता है और मांसपेशियों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इसके विपरीत, कार्डियक अरेस्ट दिल की ‘इलेक्ट्रिकल’ व्यवस्था की खराबी है। हमारा दिल एक प्राकृतिक पेसमेकर (SA नोड) से निकलने वाले सूक्ष्म बिजली के संकेतों के सहारे धड़कता है। जब इस इलेक्ट्रिकल सर्किट में अचानक कोई शॉर्ट सर्किट या गंभीर गड़बड़ी (एरिथमिया / वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन) होती है, तो दिल धड़कने के बजाय कांपने लगता है और पूरे शरीर में खून पंप करना तुरंत बंद कर देता है। व्यक्ति पलक झपकते ही बेहोश हो जाता है और चंद मिनटों में उसकी नब्ज गायब हो जाती है। यह इलेक्ट्रिकल खराबी सामान्य ब्लड टेस्ट या शांत अवस्था में किए गए रूटीन ईसीजी में अक्सर पकड़ में नहीं आती।
सॉफ्ट प्लाक और साइलेंट रप्चर: जो रूटीन टीएमटी टेस्ट में भी नहीं दिखते
कई लोग यह मान लेते हैं कि ट्रेडमिल टेस्ट (TMT) या लिपिड प्रोफाइल नॉर्मल आ गई तो नसों में कोई रुकावट नहीं है। हकीकत यह है कि रूटीन स्ट्रेस टेस्ट आमतौर पर केवल उन्हीं ब्लॉकेजेस को पकड़ पाते हैं जो 70 प्रतिशत से अधिक बड़े और सख्त (कैल्सीफाइड) होते हैं। दिल की धमनियों में अक्सर 20 से 40 प्रतिशत के छोटे, नर्म फैट जमाव (सॉफ्ट प्लाक) होते हैं, जो खून के सामान्य बहाव को नहीं रोकते। लेकिन अत्यधिक मानसिक तनाव, नींद की कमी, भारी शारीरिक थकान या अचानक कोर्टिसोल व एड्रेनालाईन हार्मोन के तेजी से बढ़ने पर ये नर्म प्लाक अचानक फट (Rupture) जाते हैं। प्लाक के फटते ही शरीर वहां तुरंत खून का थक्का (Blood Clot) बना देता है, जो धमनी को 100 प्रतिशत ब्लॉक कर देता है और यह तीव्र झटका तुरंत वेंट्रिकुलर एरिथमिया पैदा करके कार्डियक अरेस्ट का रूप ले लेता है।
जेनेटिक गड़बड़ी, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और छिपी हुई कार्डियोमायोपैथी
बिना किसी पूर्व चेतावनी के कार्डियक अरेस्ट आने का एक प्रमुख कारण आनुवंशिक और जन्मजात हृदय विकार भी होते हैं। इनमें ‘हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी’ (दिल की मांसपेशियों का अस्वाभाविक रूप से मोटा होना), ‘लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम’ (LQTS) और ‘ब्रुगाडा सिंड्रोम’ जैसी स्थितियां शामिल हैं। ये समस्याएं सामान्य ब्लड टेस्ट में कभी नहीं दिखतीं और जब तक कोई विशिष्ट 2D-इको या जेनेटिक कार्डियक स्क्रीनिंग न कराई जाए, तब तक व्यक्ति को पता भी नहीं चलता कि वह इस खतरे के साथ जी रहा है। इसके अलावा शरीर में पोटैशियम, मैग्नीशियम और सोडियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स का अचानक असंतुलन, डिहाइड्रेशन, अत्यधिक कैफीन या एनर्जी ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन भी दिल के इलेक्ट्रिकल तालमेल को बिगाड़कर जानलेवा अरेस्ट पैदा कर सकता है।
आधुनिक जीवनशैली: क्रॉनिक स्ट्रेस, खराब नींद और अनियंत्रित वर्कआउट का जोखिम
वर्तमान भागदौड़ भरी जिंदगी में युवाओं के बीच कार्डियक अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़ने का सीधा संबंध ‘क्रॉनिक स्ट्रेस’ और शरीर की जैविक घड़ी (सर्कैडियन रिदम) के बिगड़ने से है। रात में 6 से 7 घंटे की गहरी नींद न लेना, अत्यधिक वर्क प्रेशर, लंबे समय तक स्क्रीन पर बैठे रहना और तनाव को दूर करने के लिए स्मोकिंग या शराब का सहारा लेना धमनियों के भीतर सूक्ष्म सूजन (Endothelial Inflammation) पैदा करता है। कई युवा बिना उचित वॉर्म-अप और अपनी शारीरिक क्षमता को जाने बिना जिम में भारी वजन उठाने या स्टेरॉयड्स व सप्लीमेंट्स लेने लगते हैं। जब पहले से थके हुए और सूजन ग्रस्त दिल पर अचानक अत्यधिक भारी शारीरिक दबाव डाला जाता है, तो दिल का इलेक्ट्रिकल रिदम बिगड़ जाता है और सडन कार्डियक डेथ की नौबत आ जाती है।
किन एडवांस्ड जांचों और सावधानियों से समय रहते पहचाना जा सकता है खतरा?
केवल बेसिक लिपिड प्रोफाइल या शुगर टेस्ट पर निर्भर रहने के बजाय दिल की गहरी जांच के लिए कुछ आधुनिक टेस्ट मददगार साबित हो सकते हैं। इनमें ‘सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी’ (CT Coronary Angio) और ‘कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम (CAC) स्कोर’ शामिल हैं, जो बिना किसी चीर-फाड़ के यह बता देते हैं कि नसों में कोई छिपा हुआ सॉफ्ट या हार्ड प्लाक तो नहीं बन रहा। इसके अलावा हाई-सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन (hs-CRP) टेस्ट से शरीर और रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी सूजन का पता चलता है। यदि परिवार में किसी को कम उम्र में अचानक दिल की बीमारी का इतिहास रहा हो, या कभी भी अचानक चक्कर आना, सीने में भारीपन, सांस फूलना या दिल की असामान्य धड़कन (Palpitations) महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज न करें। स्वस्थ संतुलित आहार, नियमित मध्यम व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन ही इस मूक खतरे से बचाव की सबसे मजबूत ढाल हैं।
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