
हेल्थ डेस्क – पुरुषों में होने वाली बीमारियों की जब बात आती है, तो प्रोस्टेट कैंसर एक ऐसी समस्या है जो खामोशी से शरीर को अपना शिकार बनाती है। आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों में होने वाले सबसे आम कैंसरों में प्रोस्टेट कैंसर का नाम प्रमुखता से आता है। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इसका सटीक इलाज संभव है, लेकिन समाज में फैली तमाम गलत धारणाएं और मिथक लोगों को सही समय पर जांच कराने से रोक देते हैं। कैंसर सर्जन के अनुसार, अक्सर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। आइए जानते हैं प्रोस्टेट कैंसर से जुड़े वो 5 बड़े मिथक, जो आपकी सेहत के लिए घातक साबित हो सकते हैं।
मिथक 1: केवल बुजुर्गों को ही होता है प्रोस्टेट कैंसर
अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि प्रोस्टेट कैंसर केवल 70 या 80 साल की उम्र के बाद ही होता है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह एक बड़ी गलतफहमी है। कैंसर सर्जन के मुताबिक, आजकल खराब जीवनशैली और जेनेटिक कारणों से 40 से 50 साल की उम्र के पुरुषों में भी इसके मामले तेजी से देखे जा रहे हैं। यदि आपके परिवार में पहले किसी को यह बीमारी रही है, तो आपको कम उम्र से ही सतर्क रहने और नियमित स्क्रीनिंग कराने की आवश्यकता है।
मिथक 2: अगर कोई लक्षण नहीं, तो मतलब कोई खतरा नहीं
प्रोस्टेट कैंसर को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरणों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। लोग सोचते हैं कि जब तक पेशाब में जलन या दर्द न हो, तब तक घबराने की बात नहीं है। जबकि सच्चाई यह है कि जब लक्षण दिखने शुरू होते हैं, तब तक कैंसर अक्सर प्रोस्टेट की ग्रंथियों से बाहर फैल चुका होता है। इसलिए, 50 साल की उम्र के बाद बिना किसी लक्षण के भी ‘पीएसए’ (PSA) टेस्ट और डॉक्टर की सलाह लेना जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
मिथक 3: प्रोस्टेट बढ़ने का मतलब हमेशा कैंसर ही है
उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसे बीपीएच (BPH) कहा जाता है। कई लोग प्रोस्टेट बढ़ने की खबर सुनते ही इसे कैंसर मानकर डर जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हर बढ़ा हुआ प्रोस्टेट कैंसर नहीं होता। हालांकि, दोनों के लक्षण कुछ हद तक समान हो सकते हैं, इसलिए बायोप्सी या एमआरआई के जरिए ही इसकी पुष्टि की जा सकती है। बिना जांच के खुद ही नतीजे पर पहुंचना और तनाव लेना गलत है।
मिथक 4: प्रोस्टेट कैंसर के इलाज से खत्म हो जाती है मर्दानगी
मरीजों के बीच सबसे बड़ा डर यह होता है कि सर्जरी या रेडिएशन के बाद उनकी यौन क्षमता या मर्दानगी खत्म हो जाएगी। कैंसर सर्जन बताते हैं कि आधुनिक ‘नर्व-स्पेरिंग’ सर्जरी और सटीक रेडिएशन तकनीकों की मदद से अब इन अंगों की नसों को सुरक्षित रखा जा सकता है। इलाज के बाद अधिकांश पुरुष एक सामान्य और स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं। बीमारी के डर से इलाज में देरी करना जानलेवा हो सकता है, जबकि समय पर इलाज आपको पूरी तरह स्वस्थ बना सकता है।
मिथक 5: यह कैंसर बहुत धीरे फैलता है, इसलिए इलाज की जल्दी नहीं
यह सच है कि प्रोस्टेट कैंसर के कुछ प्रकार बहुत धीमी गति से बढ़ते हैं, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि इसे नजरअंदाज किया जाए। प्रोस्टेट कैंसर के कुछ रूप बहुत ही आक्रामक (Aggressive) होते हैं जो बहुत कम समय में हड्डियों और अन्य अंगों तक फैल जाते हैं। कैंसर विशेषज्ञ ही यह तय कर सकते हैं कि आपका कैंसर किस श्रेणी का है। सही समय पर सही जांच और विशेषज्ञों की देखरेख ही इस बीमारी को मात देने का एकमात्र रास्ता है।
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