पिछले डेढ़ महीने में अमेरिका और इजरायल के ताबड़तोड़ हमलों से ईरान को भारी नुकसान झेलना पड़ा है, लेकिन तेहरान अब फिर से अपनी सैन्य ताकत को तेजी से संवारने में जुट गया है। सीएनएन की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, ईरान उम्मीद से कहीं ज्यादा रफ्तार से अपनी सैन्य क्षमताओं को पुनर्स्थापित कर रहा है। ताजा खुफिया जानकारी यह इशारा कर रही है कि ईरान अपने ड्रोन पावर को अगले छह महीनों के भीतर न केवल फिर से तैयार कर सकता है, बल्कि युद्ध विराम के दौरान उसने चुपचाप ड्रोन उत्पादन भी शुरू कर दिया है।
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने बढ़ाई टेंशन
अमेरिकी खुफिया आकलन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ईरान की सेना का पुनर्निर्माण कार्य अनुमान से कहीं अधिक तेज है। अमेरिकी अधिकारियों की मानें तो ईरान ने सैन्य साजो-सामान बनाने की सभी तय समय-सीमाओं को पीछे छोड़ दिया है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान की जिन मिसाइल साइट्स, लॉन्चर्स और प्रमुख हथियार प्रणालियों को नष्ट कर दिया गया था, उन्हें बेहद तेजी से बदला जा रहा है। यह सक्रियता साफ तौर पर दर्शाती है कि तेहरान किसी भी हाल में अपनी रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं को कमजोर नहीं होने देना चाहता।
शांति की कोशिशें और पाकिस्तान की सक्रियता
यह सनसनीखेज खुलासा ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास चरम पर हैं। इसी कड़ी में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने तेहरान का दौरा किया और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर चर्चा की। पाकिस्तान दोनों संघर्षरत देशों के बीच मध्यस्थता कर खाई पाटने की कोशिश में जुटा है। हालांकि, कूटनीतिक प्रयासों और लगातार बातचीत के बावजूद, ईरान और अमेरिका के बीच गहरे मतभेद अभी भी बने हुए हैं, जिससे शांति की राह मुश्किल नजर आ रही है।
ट्रंप की चेतावनी और ईरान का कड़ा रुख
दूसरी ओर, वाशिंगटन का रुख भी सख्त बना हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि समझौता नहीं होता है, तो हमले फिर से शुरू कर दिए जाएंगे। जवाब में ईरान ने भी कोई नरमी नहीं दिखाई है। विदेश मंत्री अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध फिर से भड़का, तो इसके परिणाम अप्रत्याशित होंगे। वहीं, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने यह साफ कर दिया है कि ईरान पर किया गया कोई भी नया हमला एक ऐसे संघर्ष को जन्म देगा, जिसकी आग पश्चिम एशिया की सीमाओं से कहीं आगे तक फैल जाएगी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति सफल होगी या क्षेत्र एक बार फिर बड़े युद्ध की विभीषिका झेलेगा।
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