ट्रंप को बड़ा झटका! स्पेन ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों के लिए बंद किया अपना आसमान; ईरान युद्ध को बताया ‘अवैध’, नाटो देशों में मची खलबली

Spain Ban US Airspace: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहे भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए ट्रंप प्रशासन को अब अपने ही सहयोगी देश स्पेन (Spain) से करारा झटका लगा है। सोमवार को स्पेन सरकार ने एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) पूरी तरह बंद करने का एलान कर दिया है। रक्षा मंत्री मार्गरिटा रोब्लेस ने स्पष्ट किया है कि स्पेन की धरती या आसमान का इस्तेमाल किसी भी ऐसी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होने दिया जाएगा, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करती हो।

स्पेन की रक्षा मंत्री का कड़ा संदेश: “न बेस, न आसमान”

स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गरिटा रोब्लेस ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप प्रशासन को आईना दिखाते हुए कहा कि स्पेन ने पहले ही अमेरिकी सेना को आगाह कर दिया था। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा, “हमने रोता (Rota) और मोरॉन (Morón) जैसे रणनीतिक सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल पर पहले ही रोक लगा दी थी। अब यही प्रतिबंध स्पेनिश एयरस्पेस पर भी लागू होगा।” स्पेन के इस फैसले के बाद अमेरिकी वायुसेना को अब यूरोप के रास्ते मिडिल ईस्ट तक पहुंचने के लिए लंबा और पेचीदा रास्ता तय करना होगा।

ईरान युद्ध को बताया ‘अवैध’ और ‘अन्यायपूर्ण’

यूरोपीय संघ के देशों में स्पेन शुरुआत से ही अमेरिका और इजरायल की आक्रामक नीतियों का सबसे मुखर आलोचक रहा है। रोब्लेस ने वर्तमान ईरान युद्ध को न केवल ‘अवैध’ करार दिया, बल्कि इसे पूरी तरह ‘अन्यायपूर्ण’ बताया। स्पेन सरकार का तर्क है कि अमेरिका की ये सैन्य कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) की धज्जियां उड़ा रही हैं। स्पेन का यह कड़ा स्टैंड नाटो (NATO) गठबंधन के भीतर बढ़ती दरार को भी उजागर करता है।

डोनाल्ड ट्रंप की बढ़ी टेंशन, रणनीतिक चुनौतियां

डोनाल्ड ट्रंप, जो ‘ग्रेटर नॉर्थ अमेरिका’ के जरिए दुनिया पर अपनी धौंस जमाने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए स्पेन का यह रुख एक बड़ी कूटनीतिक हार माना जा रहा है। स्पेनिश एयरस्पेस बंद होने का मतलब है:

  • लॉजिस्टिक समस्या: अमेरिकी विमानों को अब ईंधन भरने और आवाजाही के लिए वैकल्पिक रास्तों की तलाश करनी होगी।

  • समय और खर्च: लंबा रूट लेने से सैन्य ऑपरेशनों में देरी होगी और ईंधन पर खर्च कई गुना बढ़ जाएगा।

  • नाटो में फूट: स्पेन के इस कदम के बाद अन्य यूरोपीय देशों जैसे आयरलैंड और बेल्जियम पर भी अमेरिका को सहयोग न देने का दबाव बढ़ सकता है।

यूरोप में अलग-थलग पड़ता अमेरिका?

स्पेन के इस फैसले ने वैश्विक स्तर पर एक नई बहस छेड़ दी है। जहां ट्रंप प्रशासन ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत अपने सहयोगियों को मजबूर कर रहा है, वहीं स्पेन ने संप्रभुता और नैतिकता का हवाला देकर वाशिंगटन को चुनौती दी है। जानकारों का मानना है कि अगर अन्य यूरोपीय देशों ने भी स्पेन की राह चुनी, तो ईरान के खिलाफ ट्रंप की घेराबंदी कमजोर पड़ सकती है।

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