ब्रिटेन की राजनीति में पिछले कुछ सालों से जारी अस्थिरता का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. साल 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी को प्रचंड बहुमत दिलाकर सत्ता में आए प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) अब खुद चौतरफा संकट में घिर गए हैं. ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के मुताबिक, भारी आंतरिक कलह और दबाव के बाद सोमवार को स्टार्मर अपने पद से इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो ब्रिटेन पिछले एक दशक में अपना सातवां प्रधानमंत्री देखने की राह पर आगे बढ़ जाएगा. इस सियासी उथल-पुथल ने भारत की भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह संकट दोनों देशों के बीच होने वाली ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील (FTA) के ठीक पहले आया है.
‘चेकर्स’ में पत्नी संग लंबी चर्चा और 100 सांसदों का खुला विद्रोह
ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने संकेत दिए हैं कि प्रधानमंत्री स्टार्मर जल्द ही अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा बयान जारी कर सकते हैं. स्टार्मर ने ब्रिटिश पीएम के आधिकारिक ग्रामीण आवास ‘चेकर्स’ (Checkers) में अपनी पत्नी के साथ इस गंभीर मुद्दे पर लंबी चर्चा की है, जिसके बाद उनके विदाई की अटकलें तेज हो गई हैं.
हालांकि, डाउनिंग स्ट्रीट के आधिकारिक सूत्रों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री का पूरा ध्यान देश चलाने पर है. लेकिन हकीकत यह है कि लेबर पार्टी के करीब 100 सांसदों ने सार्वजनिक रूप से बगावत करते हुए स्टार्मर से तुरंत इस्तीफे की तारीख तय करने की मांग कर दी है.
आखिर क्यों चौतरफा घिरे पीएम कीर स्टार्मर?
कीर स्टार्मर की कुर्सी डगमगाने के पीछे दो सबसे मुख्य कारण माने जा रहे हैं:
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एन्डी बर्नहैम की बंपर जीत और चुनौती: शुक्रवार को आए एक संसदीय उपचुनाव के नतीजे ने स्टार्मर की जड़ें हिला दीं. स्टार्मर के धुर विरोधी और ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर 56 वर्षीय एन्डी बर्नहैम (Andy Burnham) उपचुनाव में बंपर जीत हासिल कर संसद पहुंच गए हैं. उन्होंने दक्षिणपंथी नेता नाइजेल फराज की पार्टी के उम्मीदवार को करारी शिकस्त दी. संसद पहुंचते ही बर्नहैम ने देश को ‘नई दिशा’ में ले जाने की बात कहकर प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी मजबूत दावेदारी ठोक दी है.
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राजदूत नियुक्ति पर महाविवाद: स्टार्मर को एक और बड़ा राजनीतिक और नैतिक झटका तब लगा, जब उन्होंने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का नया राजदूत नियुक्त किया. नियुक्ति के तुरंत बाद पीटर मैंडेलसन के संबंध कुख्यात सेक्स ऑफेंडर जेफ्री एपस्टीन (Jeffrey Epstein) के साथ होने का बड़ा खुलासा हो गया, जिससे सरकार की भारी फजीहत हुई.
रेस में कौन है आगे?
लेबर पार्टी के भीतर चर्चा है कि बर्नहैम के करीबियों ने स्टार्मर को गरिमा के साथ पद छोड़ने की सलाह दी है. माना जा रहा है कि बर्नहैम के कमान संभालते ही वर्तमान वित्त मंत्री रेचल रीव्स की छुट्टी हो सकती है. इसके अलावा प्रधानमंत्री की इस रेस में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग का नाम भी तेजी से आगे चल रहा है.
क्या खतरे में पड़ जाएगी भारत-ब्रिटेन ऐतिहासिक ट्रेड डील?
यह पूरा सियासी संकट भारत के लिहाज से बेहद संवेदनशील समय पर आया है. भारत और ब्रिटेन के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-UK FTA) आगामी 15 जुलाई से लागू होने वाला है. इस महा-डील को स्टार्मर सरकार की अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक कामयाबी माना जा रहा था. इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार में 25.5 अरब पाउंड की बढ़ोतरी और यूके की अर्थव्यवस्था में 4.8 अरब पाउंड जुड़ने का अनुमान है.
हाल ही में हुए जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कीर स्टार्मर ने इस डील को अंतिम रूप दिया था. अब ब्रिटिश पीएम के संभावित इस्तीफे के बाद इस समझौते की टाइमलाइन को लेकर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं. हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि शॉर्ट टर्म में भले ही कुछ प्रशासनिक देरी हो, लेकिन लॉन्ग टर्म में ब्रिटेन की कोई भी नई सरकार भारत के साथ इस महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते को आगे ही बढ़ाएगी.
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