पश्चिम बंगाल चुनाव: 91.46% की बंपर वोटिंग ने बढ़ाई धड़कनें, क्या दीदी की होगी विदाई या खिलेगा कमल

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का रण समाप्त हो चुका है और जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने राजनीतिक पंडितों से लेकर आम जनता तक को हैरान कर दिया है। 16 जिलों की 152 सीटों पर हुए इस मतदान में बंगाल की जनता ने लोकतंत्र के उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में रिकॉर्ड 91.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। यह भारी मतदान न केवल टीएमसी और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर का संकेत दे रहा है, बल्कि सत्ता के गलियारों में हलचल भी तेज कर दी है।

वोटिंग का भारी प्रतिशत: सत्ता परिवर्तन या फिर ममता की वापसी?

राजनीति में एक पुरानी धारणा रही है कि जब भी वोटिंग प्रतिशत में अप्रत्याशित उछाल आता है, तो वह सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) का संकेत होता है। कई दशकों से चल रही सरकार के खिलाफ अक्सर लोग गुस्से में बड़ी संख्या में घर से बाहर निकलते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का एक धड़ा यह भी मानता है कि हाई-प्रोफाइल मुकाबलों में जब मतदाता अपने पसंदीदा नेता को बचाने के लिए उत्साहित होते हैं, तब भी वोट शेयर बढ़ता है। इस बार बंगाल में एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के कारण लाखों नाम कटने के बाद प्रतिशत में यह बढ़ोतरी और भी रहस्यमयी हो गई है।

एक्सपर्ट्स की राय: क्या भाजपा पाट पाएगी 7 फीसदी का अंतर?

पॉलिटिकल एक्सपर्ट आशुतोष के अनुसार, केवल बंपर वोटिंग के आधार पर किसी एक पक्ष की जीत का दावा करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए बताया कि पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी और भाजपा के बीच 10 फीसदी वोटों का अंतर था, जो लोकसभा चुनाव में घटकर 7 फीसदी रह गया था। मुख्य सवाल यह है कि क्या भाजपा इस 7 प्रतिशत के अंतर को पाटने में सफल होगी? यदि भाजपा अपना वोट शेयर 42-43 फीसदी तक ले जाने में कामयाब रहती है, तो बंगाल के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

ममता बनर्जी का बड़ा दावा: हम जीत की दहलीज पर

बंपर वोटिंग पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी जीत का अटूट विश्वास जताया है। कोलकाता के बो बाजार में आयोजित एक रैली में उन्होंने कहा कि पहले चरण के रुझान बता रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) अभी से ही जीत की स्थिति में है। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि बंगाल फतह करने के बाद वह विपक्षी दलों को एकजुट कर दिल्ली की सत्ता से भाजपा को बेदखल करेंगी। ममता ने साफ किया कि उन्हें कुर्सी का मोह नहीं है, बल्कि वह राज्य और देश के हित में काम करना चाहती हैं।

अमित शाह और पीएम मोदी का प्रहार: टीएमसी के ‘जंगलराज’ का अंत करीब

दूसरी ओर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि बंगाल में टीएमसी के भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का सूरज अब अस्त हो चुका है। उन्होंने रोड शो की भीड़ को टीएमसी के खिलाफ आक्रोश और प्रतिशोध का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मथुरापुर की रैली में कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि 4 मई को बंगाल में टीएमसी के 15 साल पुराने ‘सिंडिकेट राज’ का अंत होगा। पीएम ने कहा कि भारी मतदान इस बात का सबूत है कि जनता ने भाजपा के ‘भरोसे’ को टीएमसी के ‘भय’ पर वरीयता दी है।

Check Also

IFS अधिकारी सिबी जॉर्ज: वह राजनयिक जिसने नॉर्वे में अपनी बेबाकी से जीता दिल

हाल ही में नॉर्वे में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान भारतीय विदेश सेवा (IFS) …