बीजिंग/अबू धाबी: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते युद्ध के बादलों के बीच अब चीन ने ‘शांति दूत’ बनकर अपनी वैश्विक धाक जमाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए एक 4-सूत्रीय शांति प्रस्ताव (4-Point Peace Proposal) पेश किया है। यह कदम तब उठाया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई 21 घंटे की लंबी वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई।
क्या है जिनपिंग का 4-सूत्रीय फॉर्मूला?
अबू धाबी के क्राउन प्रिंस जायेद अल नहयान के साथ बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने निम्नलिखित चार बिंदुओं पर जोर दिया:
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साझा सुरक्षा व्यवस्था: खाड़ी क्षेत्र के लिए एक ऐसी सुरक्षा प्रणाली बनाई जाए जो विस्तृत, सहयोगपूर्ण और टिकाऊ हो।
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संप्रभुता का सम्मान: सभी देशों की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का पूर्ण सम्मान होना चाहिए।
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नागरिकों की सुरक्षा: युद्ध के दौरान आम नागरिकों और बुनियादी ढांचों (Infrastructure) को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
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अंतरराष्ट्रीय कानून: दुनिया को ‘जंगल राज’ बनने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों का सख्ती से पालन हो और विकास व सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जाए।
स्ट्रैट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका को ‘लाल आंख’
चीन का यह शांति प्रस्ताव महज कूटनीति नहीं, बल्कि सामरिक चेतावनी के साथ आया है। चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नाकेबंदी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“ईरान के साथ हमारे ऊर्जा और व्यापारिक समझौते हैं और हम उन्हें निभाएंगे। हमारे जहाज होर्मुज के पानी से गुजर रहे हैं और हम उम्मीद करते हैं कि कोई दूसरा (अमेरिका) हमारे मामलों में दखल नहीं देगा।”
गौरतलब है कि चीन, ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है और अमेरिकी नाकेबंदी सीधे तौर पर चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रहार करती है।
रूस-चीन की जुगलबंदी और विफल ‘इस्लामाबाद वार्ता’
मिडल ईस्ट में शांति के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान को एक मेज पर लाने की कोशिश की थी। इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली मैराथन वार्ता विफल रहने के बाद अब रूस और चीन सक्रिय हो गए हैं।
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रूस की भूमिका: राष्ट्रपति पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बात कर कूटनीतिक समाधान की पेशकश की है।
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लावरोव का बीजिंग दौरा: रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव इस वक्त चीन में हैं, जहाँ वे राष्ट्रपति पुतिन और शी जिनपिंग के बीच आगामी मुलाकात और क्षेत्रीय संकट पर साझा रणनीति तैयार कर रहे हैं।
फ्रांस की भी एंट्री?
मिडल ईस्ट के इस ‘पावर गेम’ में अब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भी मध्यस्थ के रूप में उतरने की चर्चा है। ऐसे में अमेरिका के लिए चुनौती बढ़ गई है कि वह अपने सहयोगियों और विरोधियों के बीच इस संकट को कैसे संभालता है।
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