नई दिल्ली: एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार में आग लगा रखी है, तो दूसरी तरफ चीन की एक गुप्त रणनीति ने दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों की चिंता बढ़ा दी है। वर्ल्ड बैंक के पूर्व अध्यक्ष डेविड मालपास ने एक बड़ा खुलासा करते हुए आरोप लगाया है कि चीन गुपचुप तरीके से अनाज और खाद (Fertilizer) का विशाल भंडार जमा कर रहा है। मालपास ने चेतावनी दी है कि अगर चीन ने यह जमाखोरी तुरंत बंद नहीं की, तो दुनिया के सामने भोजन और खेती का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
वर्ल्ड बैंक के पूर्व चीफ का खुलासा: “चीन को तुरंत रुकना होगा”
बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में डेविड मालपास ने बताया कि चीन इस वक्त दुनिया का सबसे बड़ा अनाज और खाद भंडार खड़ा कर चुका है। यह खुलासा बीजिंग में होने वाले ट्रंप-शी जिनपिंग शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुआ है। मालपास का कहना है कि चीन को वैश्विक सप्लाई चेन को सुचारू बनाने के लिए इस जमाखोरी को बंद करना चाहिए। चीन द्वारा निर्यात पर लगाई गई पाबंदियों ने उन देशों की कमर तोड़ दी है जो अपनी खेती के लिए खाद के आयात पर निर्भर हैं।
दोगुने हो गए खाद के दाम: भारत पर पड़ रही है दोहरी मार
चीन ने घरेलू आपूर्ति का बहाना बनाकर मार्च से ही खाद के निर्यात पर रोक लगा रखी है। इसका सबसे बुरा असर भारत पर पड़ रहा है।
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यूरिया की कीमतों में आग: ईरान युद्ध से पहले भारत यूरिया के लिए 512 डॉलर प्रति टन चुका रहा था।
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ताजा स्थिति: अब यही कीमत बढ़कर 959 डॉलर प्रति टन हो गई है।
यानी भारत को अपनी खेती बचाने के लिए लगभग दोगुनी कीमत चुकानी पड़ रही है। इससे देश के राजकोषीय घाटे और सब्सिडी के बोझ में भारी बढ़ोतरी होने की आशंका है।
आखिर चीन क्यों कर रहा है जमाखोरी? विशेषज्ञों ने खोला राज
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की इस चाल के पीछे सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी ‘जियो-पॉलिटिकल’ रणनीति है:
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होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट: ईरान युद्ध के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद है, जिससे जहाजों की आवाजाही ठप है। चीन को डर है कि लंबी आपूर्ति बाधा उसके यहां अकाल जैसी स्थिति न पैदा कर दे।
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दबदबे की राजनीति: अनाज और खाद पर नियंत्रण पाकर चीन अन्य देशों पर दबाव बनाने की स्थिति में आ जाएगा।
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मुनाफाखोरी: जब दुनिया में हाहाकार मचेगा और कीमतें आसमान छूएंगी, तब चीन अपने भंडार को ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाने की फिराक में है।
भारत के लिए ‘अलार्म बेल’: किसान और आम आदमी दोनों संकट में
भारत के लिए यह खबर किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। हमारी अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान है और हम यूरिया व डीएपी (DAP) के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं।
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बढ़ जाएगी लागत: अगर खाद महंगी होगी, तो फसल उगाने की लागत बढ़ेगी।
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महंगाई का झटका: लागत बढ़ने का सीधा असर अनाज, फल और सब्जियों की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आम आदमी की थाली और महंगी हो जाएगी।
भारत पहले ही महंगे कच्चे तेल (Crude Oil) का बोझ सह रहा है, ऐसे में खाद संकट देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक नई चुनौती बन गया है।
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