धातु के कछुए वाली रिंग पहनने के बाद न करें ये 2 गलतियां, फेंगशुई के अनुसार वरना रुक जाएगा धन का प्रवाह

आधुनिक समय में कछुए के आकार वाली अंगूठी (Tortoise Ring) केवल एक फैशन एक्सेसरी या आभूषण नहीं रह गई है, बल्कि इसे फेंगशुई और सनातन वास्तु शास्त्र में सकारात्मक ऊर्जा व धन-समृद्धि को आकर्षित करने वाले एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में देखा जाता है। फेंगशुई में कछुए को दीर्घायु, स्थिरता, धैर्य और निरंतर प्रगति का प्रतीक माना गया है। वहीं, हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कछुआ भगवान विष्णु के ‘कूर्म अवतार’ का प्रतिनिधित्व करता है और इसका सीधा संबंध धन की देवी माता लक्ष्मी से है, क्योंकि दोनों का उद्भव समुद्र मंथन से हुआ माना जाता है।

चांदी या पंचधातु से बनी कछुए की अंगूठी पहनने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है, कार्यस्थल पर आ रही अड़चनें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी समाप्त होती है। हालांकि, फेंगशुई और ज्योतिष शास्त्रों में यह बात स्पष्ट रूप से कही गई है कि कोई भी शुभ वस्तु तभी फलदायी होती है जब उसे सही नियमों के साथ धारण किया जाए। यदि इसे पहनने के बाद नियमों की अनदेखी की जाती है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाता है।

कछुए की अंगूठी पहनने के बाद भूलकर भी न करें ये 2 बड़ी गलतियां

फेंगशुई विशेषज्ञों के अनुसार, कछुए वाली रिंग धारण करने के बाद अधिकतर लोग अनजाने में 2 ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो उनके जीवन में सुख-समृद्धि आने के रास्ते को पूरी तरह बंद कर देती हैं:

1. पहली गलती: कछुए का मुख बाहर की तरफ रखना और बार-बार अंगूठी को घुमाना

अंगूठी पहनते समय या पहनने के बाद सबसे बड़ी गलती कछुए के मुख (सिर) की दिशा को लेकर होती है। कई लोग अंगूठी पहनते समय कछुए का मुंह बाहर की तरफ (उंगलियों के नाखूनों की दिशा में) रख लेते हैं। फेंगशुई के अनुसार, कछुए का मुख आपकी हथेली यानी आपकी खुद की तरफ होना अनिवार्य है। जब कछुए का मुंह आपकी तरफ होता है, तो यह ऊर्जा और धन को आपकी ओर खींचता है। यदि इसका मुख बाहर की ओर होगा, तो यह इस बात का संकेत है कि आपके घर की समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बाहर जा रही है।

इसके साथ ही, कई लोगों की आदत होती है कि वे बात करते-करते या खाली बैठे-बैठे अपनी अंगूठी को उंगली में बार-बार घुमाते रहते हैं। ऐसा करने से कछुए का मुख बार-बार अपनी दिशा बदलता है, जिससे फेंगशुई ऊर्जा का चक्र टूट जाता है और व्यक्ति को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

2. दूसरी गलती: अपनी रिंग किसी अन्य व्यक्ति को देना या कहीं भी उतारकर रख देना

फेंगशुई और रत्न शास्त्र का एक बुनियादी नियम है कि जब भी आप कोई धातु या आध्यात्मिक प्रतीक धारण करते हैं, तो वह आपकी व्यक्तिगत ऊर्जा (Personal Energy) से जुड़ जाता है। कई बार लोग दोस्तों या रिश्तेदारों के मांगने पर अपनी कछुए की अंगूठी उतारकर उन्हें पहनने या देखने के लिए दे देते हैं, जो कि बहुत बड़ी भूल है। अपनी पहनी हुई अंगूठी किसी दूसरे को देने से आपकी ऊर्जा बाधित होती है।

इसके अलावा, यदि किसी कारणवश (जैसे नहाते समय, आटा गूंथते समय या सफाई करते समय) आपको अंगूठी उतारनी भी पड़े, तो इसे घर में किसी भी मेज, अलमारी या बाथरूम में न रखें। उतारी गई कछुए की रिंग को हमेशा घर के मंदिर में या मां लक्ष्मी के चरणों के पास ही रखना चाहिए। दोबारा पहनने से पहले इसे स्वच्छ पानी या कच्चे दूध से धोकर ही धारण करना चाहिए।

धातु की कछुआ रिंग धारण करने का सही तरीका और नियम

कछुए की अंगूठी का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इसे धारण करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • सर्वोत्तम धातु: कछुए की अंगूठी के लिए चांदी (Silver) को सबसे उत्तम धातु माना गया है। चांदी शीतल प्रकृति की होती है और मन को शांत रखती है। यदि संभव हो तो कछुए की पीठ पर ‘श्रीं’ या ‘श्री’ शब्द खुदवा लें।

  • सही उंगली: इस अंगूठी को हमेशा सीधे हाथ (Right Hand) की मध्यमा (Middle Finger) या तर्जनी (Index Finger) उंगली में ही पहनना चाहिए।

  • शुभ दिन: मां लक्ष्मी और फेंगशुई ऊर्जा को जागृत करने के लिए शुक्रवार के दिन कछुए की अंगूठी धारण करना सबसे फलदायी माना जाता है।

इन राशियों के लोग बरतें विशेष सावधानी

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सभी राशियों के लिए कछुए की अंगूठी एक समान फलदायक नहीं होती। जल तत्व और अग्नि तत्व की कुछ विशेष राशियों—जैसे मेष, वृश्चिक, मीन और कर्क—के जातकों को बिना ज्योतिषीय सलाह के कछुए की अंगूठी धारण करने से बचना चाहिए। इन राशियों के तत्वों के साथ कछुए का प्रभाव विपरीत हो सकता है, जिससे लाभ के स्थान पर अकारण रुकावटें आ सकती हैं।

यदि आप फेंगशुई और वास्तु के इन सरल नियमों का पालन करते हुए धातु की कछुए वाली अंगूठी धारण करेंगे और ऊपर बताई गई 2 गलतियों से बचेंगे, तो आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता का निरंतर प्रवाह बना रहेगा।

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