
मानव शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जिनमें से ‘आयरन’ (लोहा) एक अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज है। हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) के निर्माण और उनमें मौजूद प्रोटीन ‘हीमोग्लोबिन’ को बनाने में आयरन की मुख्य भूमिका होती है। हीमोग्लोबिन फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के हर एक अंग, ऊतक और कोशिका तक पहुंचाने का काम करता है। जब शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, तो हीमोग्लोबिन का स्तर गिर जाता है और कोशिकाओं तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। शुरुआत में लोग इसे केवल सामान्य थकान समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक शरीर में आयरन का स्तर कम रहने पर यह एक या दो नहीं, बल्कि कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है।
आयरन की कमी से होने वाली सबसे प्रमुख बीमारी: आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया
आयरन की कमी से होने वाली सबसे आम और खतरनाक बीमारी है ‘आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया’ (Iron Deficiency Anemia)। जब शरीर में पर्याप्त आयरन नहीं होता, तो शरीर लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण नहीं कर पाता। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में और विशेष रूप से भारत में महिलाएं और छोटे बच्चे इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। एनीमिया होने पर व्यक्ति को हर समय अत्यधिक थकान, कमजोरी, चक्कर आना, और सिरदर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। चेहरे, जीभ और नाखूनों की रंगत पीली पड़ने लगती है। थोड़ा सा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलने लगती है, क्योंकि दिल को शरीर तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
दिल की सेहत पर पड़ता है सीधा असर: हार्ट एनलार्जमेंट और हार्ट फेलियर का खतरा
बहुत से लोग नहीं जानते कि आयरन की भारी कमी का सीधा असर हमारे हृदय (Heart) की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। जब रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर बहुत कम हो जाता है, तो शरीर के अंगों में ऑक्सीजन की आपूर्ति बनाए रखने के लिए दिल को सामान्य से ज्यादा तेजी से और जोर से पंप करना पड़ता है। इस स्थिति को संतुलित करने के लिए हृदय पर अतिरिक्त दबाव बनता है। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो एरिथमिया (असामान्य दिल की धड़कन), दिल का आकार बढ़ना (Enlarged Heart) और गंभीर मामलों में ‘हार्ट फेलियर’ (Heart Failure) जैसी जानलेवा स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। जिन लोगों को पहले से ही हृदय रोग है, उनमें आयरन की कमी उनकी स्थिति को और अधिक विकट बना देती है।
कमजोर इम्यूनिटी, रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम और दिमागी विकास पर बुरा असर
आयरन की कमी केवल रक्त और हृदय तक ही सीमित नहीं रहती, बल्कि यह हमारे प्रतिरक्षा तंत्र (Immunity) को भी पूरी तरह से कमजोर कर देती है। पर्याप्त आयरन न मिलने के कारण टी-सेल और लिम्फोसाइट्स ठीक से काम नहीं कर पाते, जिससे व्यक्ति बार-बार वायरल, बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन का शिकार होने लगता है। इसके अलावा, न्यूरोलॉजिकल स्तर पर ‘रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम’ (Restless Legs Syndrome – RLS) नाम की एक स्थिति हो सकती है। इस बीमारी में व्यक्ति को अपने पैरों में एक अजीब सी झनझनाहट और खिंचाव महसूस होता है, जिससे पैर हिलाने की तीव्र इच्छा होती है और रात की नींद उड़ जाती है। मस्तिष्क तक सही मात्रा में ऑक्सीजन न पहुंचने से ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, याददाश्त में कमी और बच्चों में सीखने की क्षमता प्रभावित होती है।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए आयरन की कमी क्यों है सबसे ज्यादा खतरनाक?
गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर को न केवल अपने लिए, बल्कि गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए भी अतिरिक्त आयरन की आवश्यकता होती है। यदि गर्भवती महिला में आयरन की भारी कमी हो जाए, तो इसे ‘सिवियर मैटरनल एनीमिया’ कहते हैं। इसके कारण समय से पहले प्रसव (Preterm Delivery), बच्चे का वजन कम होना (Low Birth Weight) और प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव जैसे गंभीर जोखिम पैदा हो जाते हैं। बच्चों में आयरन की कमी उनके शारीरिक और मानसिक विकास को पूरी तरह से अवरुद्ध कर सकती है। ऐसे बच्चे पढ़ाई में पिछड़ने लगते हैं और उनमें ‘पाईका’ (Pica) जैसी स्थिति पैदा हो जाती है, जिसमें बच्चे मिट्टी, चौक, बर्फ या पेंट की पपड़ी जैसी अजीब चीजें खाने लगते हैं।
आयरन की कमी के मुख्य कारण और इसके शुरुआती लक्षण
आयरन की कमी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। आहार में आयरन युक्त पोषक तत्वों की कमी इसका प्राथमिक कारण है। इसके अलावा, शरीर में पोषक तत्वों का ठीक से अवशोषण न होना (जैसे सीलिएक रोग या आंतों की समस्या होना), अत्यधिक रक्तस्राव (भारी पीरियड होना, अल्सर, बवासीर या चोट लगना) और बार-बार रक्तदान करना भी इसके प्रमुख कारण हैं। इसके शुरुआती संकेतों में बालों का अत्यधिक झड़ना, नाखूनों का चम्मच के आकार में मुड़ना (Koilonychia), ठंड ज्यादा लगना, हाथों और पैरों का हमेशा ठंडा रहना और बार-बार मुंह में छाले होना शामिल हैं।
कैसे बढ़ाएं शरीर में आयरन का स्तर? जानिए डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव
शरीर में आयरन का स्तर बनाए रखना कोई कठिन काम नहीं है, बस आपको अपनी दैनिक जीवनशैली और आहार में थोड़े बदलाव करने की जरूरत है। शाकाहारी लोग अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां (जैसे पालक, मेथी, सरसों), बीटरूट (चुकंदर), अनार, गुड़, खजूर, बीन्स, दालें, और कद्दू के बीज शामिल कर सकते हैं। मांसाहारी लोग अंडे, रेड मीट और सी-फूड के जरिए आयरन की आपूर्ति कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शरीर में आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए ‘विटामिन सी’ बहुत जरूरी है। इसलिए आयरन युक्त आहार के साथ नींबू, आंवला, संतरा या टमाटर का सेवन जरूर करें। साथ ही, भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने से बचें, क्योंकि इनमें मौजूद टैनिन और फाइटेट्स आयरन के अवशोषण को रोकते हैं। यदि ब्लड टेस्ट में आयरन या हीमोग्लोबिन बहुत कम निकलता है, तो डॉक्टर की सलाह से आयरन सप्लीमेंट्स जरूर लें।
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