डोनाल्ड ट्रंप का ‘ग्रेटर नॉर्थ अमेरिका’ मास्टरप्लान! ईरान-वेनेजुएला तो सिर्फ झांकी है, असली खेल तो अब शुरू हुआ; जानें भारत पर क्या होगा असर

Trump’s New World Order: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभालते ही दुनिया भर के समीकरणों को हिला कर रख दिया है। पहले कनाडा को ’51वां राज्य’ बनाने की बात, फिर ग्रीनलैंड पर नजर और अब वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को जेल भेजना—ये महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी भू-राजनीतिक (Geopolitical) बिसात का हिस्सा है। ट्रंप के ‘युद्ध मंत्री’ पीट हेगसेथ ने ‘ग्रेटर नॉर्थ अमेरिका’ (Greater North America) की जो नई रणनीति पेश की है, उसने न केवल नाटो देशों बल्कि भारत की ‘ग्लोबल साउथ’ नीति के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है।

क्या है ‘ग्रेटर नॉर्थ अमेरिका’ का खतरनाक प्लान?

ट्रंप प्रशासन की इस नई नीति का मकसद उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) पर पूर्ण अमेरिकी नियंत्रण स्थापित करना है। पीट हेगसेथ के अनुसार, इस क्षेत्र का दायरा उत्तर में ग्रीनलैंड से लेकर दक्षिण में पनामा और गुयाना तक फैला हुआ है। इसमें अलास्का से लेकर मेक्सिको की खाड़ी तक का पूरा हिस्सा शामिल है। अमेरिका अब इन सभी देशों को एक साझा ‘सुरक्षा क्षेत्र’ (Security Zone) के रूप में देख रहा है, जिसका नेतृत्व वाशिंगटन करेगा।

मुनरो डॉक्ट्रीन की वापसी और सैन्य विस्तार

ट्रंप प्रशासन एक तरह से पुरानी ‘मुनरो डॉक्ट्रीन’ को नए कलेवर में वापस ला रहा है। इसके तहत अमेरिका यह साफ कर रहा है कि इस क्षेत्र के देशों की जिम्मेदारी सिर्फ उसकी है और किसी भी बाहरी ताकत (जैसे रूस या चीन) का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • सैन्य ठिकाने: अमेरिका इस पूरे क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति और ठिकानों को बढ़ाने की तैयारी में है।

  • खर्चे का बंटवारा: ट्रंप ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा का पूरा बिल अमेरिका नहीं भरेगा; इस क्षेत्र के अन्य देशों को भी अपनी रक्षा के लिए मोटी रकम चुकानी होगी।

भारत की ‘ग्लोबल साउथ’ नीति को सीधी चुनौती

भारत पिछले कुछ वर्षों से ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की आवाज बनकर उभरा है। पीएम मोदी ने हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर गुयाना, क्यूबा और वेनेजुएला जैसे देशों के हितों की वकालत की है। लेकिन ट्रंप का नया प्लान भारत के इस प्रभाव को कम कर सकता है:

  1. रणनीतिक टकराव: हेगसेथ ने स्पष्ट कहा है कि गुयाना और वेनेजुएला जैसे देशों को ‘ग्लोबल साउथ’ का हिस्सा न मानकर ‘ग्रेटर नॉर्थ अमेरिका’ के सुरक्षा ढांचे में शामिल माना जाना चाहिए।

  2. प्रभाव क्षेत्र की जंग: अगर अमेरिका इन देशों पर अपना पूर्ण नियंत्रण कर लेता है, तो भारत के लिए इन क्षेत्रों में अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के हितों को साधना मुश्किल हो जाएगा।

प्रकृति की सीमाओं से महाद्वीपों का बंटवारा

अमेरिकी रणनीति अब भूगोल को भी अपने हिसाब से परिभाषित कर रही है। हेगसेथ ने तर्क दिया है कि अमेजन के वर्षावन और एंडीज पर्वतमाला एक प्राकृतिक सीमा है जो उत्तर और दक्षिण अमेरिका को अलग करती है। इस सीमा के उत्तर में जितने भी देश हैं, उन्हें अमेरिका अपने ‘सुरक्षा छतरी’ के नीचे लाना चाहता है। इसमें क्यूबा और पनामा जैसे रणनीतिक देश शामिल हैं, जिन्हें ट्रंप प्रशासन अगला निशाना बना सकता है।

ट्रंप का अगला कदम: क्या होगा असर?

जेलेंस्की के साथ कड़ा व्यवहार और नाटो सहयोगियों को टैरिफ की धमकी देने के बाद अब ट्रंप ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति को आक्रामक तरीके से लागू कर रहे हैं। ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति और वेनेजुएला में तख्तापलट के बाद, अब क्यूबा और ग्रीनलैंड ट्रंप के रडार पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘लंबा गेम’ दुनिया को फिर से दो ध्रुवों में बांट सकता है, जहां एक तरफ ट्रंप का ‘ग्रेटर नॉर्थ अमेरिका’ होगा और दूसरी तरफ चीन-रूस का गठबंधन।

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