ईरान इस वक्त इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। एक तरफ सीमा पर अमेरिका के साथ भीषण सैन्य संघर्ष जारी है, तो दूसरी तरफ कुदरत ने भी तेहरान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मंगलवार को राजधानी तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिससे युद्ध की विभीषिका झेल रहे नागरिकों में अफरा-तफरी मच गई। भूगर्भीय सक्रियता और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान के लिए यह किसी नई मुसीबत से कम नहीं है।
राजधानी के बेहद करीब था भूकंप का केंद्र
शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 4.6 मापी गई है। भूकंप का केंद्र जमीन से महज 10 किलोमीटर नीचे तेहरान-माजनदरान प्रांत की सीमा के पास स्थित था। यह स्थान राजधानी तेहरान से सिर्फ 41 किलोमीटर और औद्योगिक शहर करज से 77 किलोमीटर की दूरी पर है। तेहरान के पूर्वी हिस्सों के अलावा माजनदरान, कोम और अलबोर्ज प्रांतों में भी लोगों ने धरती हिलते हुए महसूस की।
रेड क्रीसेंट अलर्ट पर, नुकसान की खबर नहीं
इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) के अनुसार, भूकंप के बाद फिलहाल किसी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। हालांकि, स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने रेड क्रीसेंट फोर्सेज को चारों प्रभावित प्रांतों में हाई अलर्ट पर रखा है। विशेषज्ञों का कहना है कि 10 किमी की गहराई वाले भूकंप अक्सर टेक्टोनिक गतिविधियों का परिणाम होते हैं और ईरान के इस हिस्से में यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले मार्च में भी गेराश क्षेत्र में 4.3 तीव्रता का भूकंप आया था।
डोनाल्ड ट्रंप की सीधी धमकी: “समझौता करो वरना विनाश तय”
यह भूकंप ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध अपने चरम पर है। 28 फरवरी से शुरू हुई जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेहरान शांति समझौते के लिए तैयार नहीं होता है, तो वह उस मुल्क को “खत्म” करने में संकोच नहीं करेंगे। ट्रंप का दावा है कि स्थिति पूरी तरह वाशिंगटन के नियंत्रण में है और ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए उन्हें किसी तीसरे देश (चीन) के सहयोग की आवश्यकता नहीं है।
‘ऑपरेशन प्रोजेक्ट फ्रीडम’ और सैन्य कार्रवाई की तैयारी
अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों और सीएनएन के हवाले से खबर है कि वाइट हाउस पश्चिमी एशिया में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर से शुरू करने पर विचार कर रहा है। होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही को फिर से बहाल करने के लिए ‘ऑपरेशन प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को सक्रिय किया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन ईरान के अड़ियल रुख और होर्मुज के बंद रहने से काफी नाराज है, और सूत्र बताते हैं कि वे अब किसी भी समय बड़े हमले का आदेश दे सकते हैं।
ईरान के लिए यह समय ‘इधर कुआं उधर खाई’ जैसा है, जहां उसे एक तरफ कुदरती आपदाओं से निपटना है, तो दूसरी तरफ दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति के घातक प्रहारों से खुद को बचाना है।
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