मिडिल ईस्ट में भूचाल! डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा- ‘हमने ईरान पर कर लिया है कब्जा’, जानें क्या है पूरी सच्चाई

Iran-US tension : मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सनसनीखेज बयान ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। वाशिंगटन डीसी के पास जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान पर असल में ‘कब्जा’ कर लिया है। उनके इस दावे ने न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि वैश्विक कूटनीतिक स्तर पर भी चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

ट्रंप का चौंकाने वाला खुलासा

तेहरान के साथ चल रही बातचीत में देरी और मध्यस्थता से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा, “मैं यहाँ तीन महीने से हूँ और अधिकतर समय युद्धविराम की स्थिति रही है। हमने ईरान पर असल में कब्जा कर लिया है।” राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी इस टिप्पणी की तुलना वियतनाम और अफगानिस्तान जैसे ऐतिहासिक अमेरिकी युद्धों से की, हालांकि उनके इस बयान के बाद विश्लेषक अब इसके मायने निकालने में जुट गए हैं।

हमले के मुहाने पर था अमेरिका, आखिरी वक्त पर टली जंग

ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव चरम पर है। राष्ट्रपति ने खुलासा किया कि वे ईरान पर सैन्य हमला शुरू करने के फैसले से महज एक घंटे की दूरी पर थे। ट्रंप ने बताया, “हम तैयार थे, हमले हो रहे होते। लेकिन तभी कतर और यूएई जैसे देशों के मध्यस्थों का फोन आया। उन्होंने बताया कि ईरान शांति वार्ता को लेकर उचित रवैया अपना रहा है, जिसके बाद मैंने हमले का फैसला फिलहाल टाल दिया।”

‘टीम’ बनकर काम कर रहे खाड़ी देश

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के साथ जारी कूटनीतिक प्रयासों में कई खाड़ी देशों की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा, “पिछले दो दिनों में वार्ता में काफी प्रगति हुई है। सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत और बहरीन समेत कई देश एक ‘टीम’ की तरह मिलकर काम कर रहे हैं। हम उन सभी को बातचीत में शामिल कर रहे हैं और हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”

क्या ये ट्रंप की कूटनीतिक चाल है?

ट्रंप के इस ‘कब्जे’ वाले दावे को लेकर विशेषज्ञों के बीच दो तरह की राय है। जहां एक ओर इसे अमेरिका की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे तेहरान पर दबाव बनाने की ट्रंप की एक कूटनीतिक चाल (Diplomatic Pressure) के तौर पर भी देखा जा रहा है। ट्रंप का कहना है कि अगर शांति वार्ता सफल नहीं होती, तो अमेरिका सैन्य विकल्पों के लिए पूरी तरह तैयार है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहे इस हाई-वोल्टेज ड्रामे पर टिकी हैं।

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