नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच स्थिति और अधिक विस्फोटक हो गई है। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने सोमवार को इजरायल पर एक बड़े मिसाइल हमले की जिम्मेदारी ली है। इसके साथ ही हूतियों ने वैश्विक व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री मार्ग, ‘लाल सागर’ (Red Sea) में इजरायली जहाजों के आवागमन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। हूतियों के इस आक्रामक कदम से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार जगत में हड़कंप मच गया है और सप्लाई चेन के गंभीर रूप से प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
हूतियों की खुली चेतावनी: ‘दुश्मन का हर जहाज अब हमारा सैन्य लक्ष्य’
हूती विद्रोहियों ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर एक लिखित बयान जारी कर इस बात की सार्वजनिक घोषणा की। हूतियों ने कहा, “हम लाल सागर में इजरायली समुद्री नौवहन (Shipping) पर पूर्ण और कुल प्रतिबंध का ऐलान करते हैं। अब से इस समुद्री क्षेत्र में दुश्मन की किसी भी तरह की गतिविधि या जहाज को हम अपने सशस्त्र बलों के लिए एक वैध सैन्य लक्ष्य (Military Target) मानेंगे।” इसके साथ ही विद्रोही समूह ने दावा किया कि उन्होंने इजरायली ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलों की बौछार की है, और उनके ये हमले पूरी तरह से सटीक रहे हैं।
इजरायली सेना ने की मिसाइल हमले की पुष्टि, सुरक्षा तंत्र हाई अलर्ट पर
हूतियों के इस दावे के तुरंत बाद इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने भी यमन की तरफ से हुए इस हमले की पुष्टि की है। इजरायली सेना द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि यमन की ओर से इजरायली क्षेत्र को निशाना बनाकर एक मिसाइल दागी गई थी। सेना ने कहा कि देश की अत्याधुनिक हवाई रक्षा प्रणालियां (Air Defense Systems) तुरंत सक्रिय हो गईं और खतरे को हवा में ही रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
यह मिसाइल अटैक ऐसे समय में हुआ है जब इजरायल और ईरान के बीच पहले से ही सीधे तौर पर गोलीबारी और सैन्य टकराव जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में 8 अप्रैल से लागू हुए बेहद नाजुक युद्धविराम के बावजूद हूतियों का यह ताजा हमला क्षेत्रीय शांति की संभावनाओं को बड़ा झटका दे सकता है।
वैश्विक व्यापार पर मंडराया संकट, शिपिंग कंपनियों को अपनाना होगा लंबा रास्ता
आपको बता दें कि हूती विद्रोहियों ने इसी साल मार्च महीने में आधिकारिक तौर पर ईरान के समर्थन में इस संघर्ष में प्रवेश किया था। इजरायल-हमास युद्ध की शुरुआत के बाद से ही हूतियों ने लाल सागर से गुजरने वाले और इजरायली हितों से जुड़े व्यावसायिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइलों से कई बार हमले किए हैं।
हूतियों के लगातार बढ़ते हमलों के खौफ के कारण कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को लाल सागर का छोटा रास्ता छोड़कर, अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ से होकर गुजरने वाला लंबा और अत्यधिक खर्चीला समुद्री मार्ग अपनाने पर मजबूर होना पड़ा है। इससे वैश्विक स्तर पर माल ढुलाई के किराए और समय दोनों में भारी बढ़ोतरी हुई है।
कौन हैं हूती विद्रोही और क्या है इनका इतिहास?
यमन के हूती विद्रोही मध्य पूर्व में ईरान के नेतृत्व वाले उस ‘प्रतिरोध की धुरी’ (Axis of Resistance) का एक प्रमुख हिस्सा हैं, जिसमें लेबनान का हिजबुल्लाह और हमास जैसे संगठन भी शामिल हैं। यह पूरा गठबंधन इजरायल और अमेरिका को अपना परम शत्रु मानता है।
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सना पर कब्जा: हूतियों ने सितंबर 2014 में एक बड़ा सैन्य तख्तापलट करते हुए यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था और वहां की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था।
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भयानक गृहयुद्ध: मार्च 2015 में यमन की सरकार को बहाल करने के लिए पड़ोसी देश सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने यमन में हस्तक्षेप किया, जिसके बाद वहां एक विनाशकारी गृहयुद्ध छिड़ गया। इस लंबे युद्ध में अब तक लाखों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिससे यमन में दुनिया का सबसे गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है।
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