
ओट्टावा/इस्लामाबाद: भारत द्वारा सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty) निलंबित किए जाने के बाद से पाकिस्तान में हाहाकार मचा हुआ है। जल संकट और आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब कनाडा से इस मामले में हस्तक्षेप करने और संधि बहाल कराने की गुहार लगाई है।
पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार (Ishaq Dar) ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद (Anita Anand) की दो दिवसीय पाकिस्तान यात्रा के दौरान उनसे इस मुद्दे पर समर्थन मांगा। हालांकि, कनाडा सरकार और अनीता आनंद ने इस पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखी, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की एक बार फिर फजीहत हुई है।
भारत ने क्यों निलंबित की सिंधु जल संधि?
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अप्रैल 2025 में सख्त फैसला: पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए थे) के बाद भारत सरकार ने अप्रैल 2025 में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था।
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भारत की स्पष्ट शर्त: नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि जब तक इस्लामाबाद सीमा पार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism) पर ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक यह संधि स्थगित रहेगी।
पाकिस्तान का पैंतरा और कनाडा का रुख (Key Facts)
| पहलू | विवरण / स्थिति |
| पाकिस्तान का दावा | भारत का फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है; ‘पानी को हथियार’ के रूप में इस्तेमाल न किया जाए। |
| कनाडा का रुख | कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद ने इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं दिया; आधिकारिक प्रेस रिलीज में भी कोई जिक्र नहीं। |
| 1960 की संधि | विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई इस संधि में 6 नदियों (पूर्वी नदियां भारत को, पश्चिमी नदियां पाकिस्तान को) के पानी का बंटवारा शामिल है। |
कौन हैं कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद?
पाकिस्तानी विदेश मंत्री के सामने चर्चा में आईं अनीता आनंद भारतीय मूल की प्रमुख कनाडाई राजनेता हैं:
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भारतीय मूल से जुड़ाव: उनका जन्म 20 मई 1967 को कनाडा में हुआ था। उनकी मां (डॉ. सरोज राम) पंजाब से और पिता (डॉ. एस.वी. आनंद) तमिलनाडु से ताल्लुक रखते हैं, जो 1960 के दशक में कनाडा जाकर बस गए थे।
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शानदार शैक्षणिक व कानूनी करियर: उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर्स और टोरंटो यूनिवर्सिटी में कानून की प्रोफेसर के रूप में कार्य किया है।
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राजनीतिक कद: साल 2019 में ओकविले (Oakville) से पहली बार सांसद चुनी गईं। कनाडा में पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के वक्त उनका नाम प्रधानमंत्री पद की रेस में भी प्रमुखता से शामिल था।
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