पश्चिम एशिया और मिडिल ईस्ट में जारी भीषण भू-राजनीतिक टकराव के बीच दुनिया के तेल बाजार से एक बेहद सनसनीखेज और गेम-चेंजर खबर सामने आ रही है। ईरान द्वारा सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) पर बार-बार कड़ा पहरा बिठाने और धमकियां देने से तंग आकर अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इसका परमानेंट इलाज ढूंढ लिया है। यूएई ने इस विवादित समुद्री रास्ते को पूरी तरह बायपास करने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी ‘वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन’ प्रोजेक्ट पर काम अभूतपूर्व रूप से तेज कर दिया है। अबू धाबी के आधिकारिक मीडिया ऑफिस से आई ताजा जानकारी के मुताबिक, इस मेगा ऑयल पाइपलाइन परियोजना को अगले साल से ही क्रियान्वित करने की पुरजोर तैयारियां चल रही हैं। इस बड़े कदम से न सिर्फ ईरान का कूटनीतिक और रणनीतिक घमंड टूटेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार की इस संवेदनशील रूट पर निर्भरता भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
क्राउन प्रिंस का सीधे एक्शन का निर्देश, फुजैराह बंदरगाह बनेगा दुनिया का नया तेल केंद्र
इस बेहद गुप्त और रणनीतिक प्रोजेक्ट की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने खुद मैदान में उतरकर यूएई की सरकारी तेल कंपनी ‘एडनॉक’ (ADNOC) को इस परियोजना की रफ्तार दोगुनी करने का सख्त निर्देश जारी किया है। रक्षा और ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन पूरी तरह से चालू हो जाती है, तो यह फुजैराह बंदरगाह के सुरक्षित रास्ते से यूएई की तेल निर्यात क्षमता को सीधे तौर पर दोगुना कर देगी। आपको बता दें कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के विनाशकारी हमलों के बाद से ही इस पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। जवाब में ईरान ने होर्मुज जलमार्ग को ब्लॉक कर दिया था, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में कच्चे तेल और एलपीजी गैस की सप्लाई बुरी तरह चरमरा गई और ईंधन के दामों को लेकर चौतरफा हाहाकार मच गया। यूएई का यह नया कदम इसी वैश्विक संकट की काट माना जा रहा है।
जानिए कब तक शुरू होगा यह मेगा प्रोजेक्ट और क्या है इसकी क्षमता
खाड़ी देशों के शीर्ष प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह अत्याधुनिक पाइपलाइन फिलहाल निर्माण के बेहद एडवांस स्टेज में है और पूरी उम्मीद है कि साल 2027 तक यह पूरी तरह से ऑपरेशनल होकर काम करने लगेगी। हालांकि, सुरक्षा कारणों से उच्च अधिकारियों ने अभी इसकी सटीक अंतिम तारीख का खुलासा नहीं किया है। वर्तमान में यूएई के पास पहले से ही ‘अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन’ मौजूद है, जिसे मुख्य रूप से ‘हबशान-फुजैराह पाइपलाइन’ के नाम से जाना जाता है। इस मौजूदा पाइपलाइन के पास रोजाना 1.8 मिलियन बैरल कच्चा तेल सीधे ओमान की खाड़ी के तट तक पहुंचाने की विशाल क्षमता है। सबसे बड़ी और राहत की बात यह है कि यह पूरा तेल परिवहन बिना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बेहद जोखिम भरे दायरे में कदम रखे बिना, बिल्कुल सुरक्षित तरीके से सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंच जाता है।
कुवैत, इराक और कतर समेत कई देशों को मिलेगी ईरान के डर से बड़ी राहत
वर्तमान में खाड़ी देशों की भौगोलिक स्थिति को देखें तो केवल यूएई और सऊदी अरब ही दो ऐसे बड़े तेल उत्पादक देश हैं, जिनके पास निर्यात के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अलावा वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं। वहीं, ओमान को उसकी खाड़ी तट से सटी लंबी और रणनीतिक कोस्टलाइन (समुद्री सीमा) का प्राकृतिक रूप से बड़ा फायदा मिलता है। लेकिन दूसरी तरफ कुवैत, इराक, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी के बेहद अमीर देश तेल के मामले में पूरी तरह से लाचार हैं क्योंकि उनका शत-प्रतिशत ऊर्जा निर्यात पूरी तरह से इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर है। ईरान जब भी इस रास्ते को बंद करता है, इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं वेंटिलेटर पर आ जाती हैं। ऐसे में यूएई की यह नई वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन इन बेबस देशों के लिए भी एक संजीवनी बूटी साबित होने जा रही है, जिससे मिडिल ईस्ट की पूरी जियो-पॉलिटिक्स हमेशा-हमेशा के लिए बदल जाएगी।
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