
घुटने में दर्द और जकड़न महसूस होना आजकल बेहद आम हो चुका है। यह समस्या अब केवल 60 की उम्र पार कर चुके बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि 30-40 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं, जिससे उनके रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, जितनी बड़ी समस्या घुटने का दर्द है, उससे कहीं ज्यादा खतरनाक उसका गलत इलाज या उससे जुड़ी गलत आदतें हैं।
फिजियोथेरेपिस्ट्स का मानना है कि जब लोग घुटने में दर्द महसूस करते हैं, तो अक्सर कुछ ऐसी अनजाने गलतियां कर बैठते हैं जिससे राहत मिलने के बजाय घुटनों का डैमेज और तेजी से बढ़ने लगता है। आइए जानते हैं वे 6 बड़ी गलतियां कौन सी हैं, जिनसे खास तौर पर बुजुर्गों और युवाओं को बचना चाहिए:
1. घुटने में दर्द होने पर पूरी तरह आराम करना
अक्सर लोग घुटने में दर्द होते ही फिजिकल एक्टिविटी बंद कर देते हैं और बिस्तर पर आराम करने लगते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदत घुटनों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।
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नुकसान: पूरी तरह आराम करने से घुटने के आसपास की मांसपेशियां (खासकर क्वाड्रासेप्स – Quadriceps) कमजोर होने लगती हैं। कमजोर मसल्स जोड़ों पर और अधिक लोड डालती हैं, जिससे दर्द कम होने की बजाय और बढ़ जाता है।
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क्या करें: आराम करने के बजाय छोटी वॉक करें, स्ट्रेट लेग रेज (Straight Leg Raise) एक्सरसाइज करें या हल्की साइकिलिंग करें। जोड़ों को ठीक होने के लिए ब्लड सर्कुलेशन की जरूरत होती है, न कि पूरी तरह निष्क्रिय रहने की।
2. सूजन वाले घुटनों में हीट मसाज (गर्म सिंकाई) करना
यदि घुटनों में दर्द के साथ सूजन (Swelling) दिख रही है और छूने पर गर्माहट महसूस हो रही है, तो बहुत से लोग गर्म पानी की बोतल या हीटिंग पैड से सिंकाई करने लगते हैं।
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नुकसान: गर्माहट से उस एरिया में ब्लड फ्लो बढ़ जाता है, जबकि वहां पहले से ही सूजन मौजूद है। हीट इस सूजन को और अधिक बढ़ा देती है।
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क्या करें: अगर जोड़ों में सूजन है, तो उसका इलाज बर्फ की सिंकाई है। कपड़े में बर्फ लपेटकर 15-20 मिनट तक ठंडी सिंकाई करें। हां, यदि जोड़ों में केवल टाइटनेस या जकड़न (Stiffness) महसूस हो, तब गर्म सिंकाई करना फायदेमंद होता है।
3. जमीन पर पालथी मारकर देर तक बैठना
भारतीय घरों में जमीन पर बैठकर खाना खाना, पूजा करना या फर्श पर पैर मोड़कर बैठना आम बात है। लेकिन 20 से 30 मिनट तक लगातार पैरों को मोड़कर जमीन पर बैठे रहने से घुटनों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
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नुकसान: जिन लोगों को कार्टिलेज घिसने या शुरुआती ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) की समस्या है, उनके लिए यह आदत धीरे-धीरे घुटनों को अंदर से खोखला कर देती है।
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क्या करें: लंबे समय तक एक ही पोजीशन में घुटनों को लॉक करके बैठने से बचें। बीच-बीच में पैर सीधी करें या कुर्सी का इस्तेमाल करें।
4. शरीर के बढ़ते वजन और खराब पोश्चर को नजरअंदाज करना
आर्थराइटिस फाउंडेशन की रिसर्च के मुताबिक, शरीर का 1 किलो बढ़ा हुआ वजन चलते समय घुटनों पर 4 किलो का अतिरिक्त दबाव डालता है। लोग घुटने के दर्द से राहत पाने के लिए कई तरह के महंगे इलाज करवाते हैं, लेकिन अपने बढ़े हुए वजन और गलत पोश्चर को सुधारने पर ध्यान नहीं देते। जबकि कई बार वजन नियंत्रित करना ही घुटनों के दर्द का सबसे बड़ा इलाज होता है।
5. स्क्वाट या उठने-बैठने की गलत पोजीशन
गांवों या छोटे शहरों में इंडियन स्टाइल टॉयलेट का इस्तेमाल, जमीन पर बैठकर खाना बनाने और बहुत कम ऊंचाई वाली चारपाई या मोढ़े पर बैठने का चलन आम है। इन जगहों पर उठते-बैठते वक्त पैरों की गलत पोजीशन (गलत स्क्वाट्स) घुटनों पर सीधा दबाव डालती है।
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क्या करें: इसके लिए जरूरी कामकाज बंद करने की आवश्यकता नहीं है, बस उठने-बैठنے के सही तरीकों (Proper Ergonomics and Posture) को अपनाने की जरूरत है।
6. लंबे समय तक पेनकिलर (दर्द निवारक दवाएं) खाना
किसी भी दर्द का स्थायी समाधान पेनकिलर दवाएं नहीं हो सकतीं। जब लोग घुटने के दर्द में लगातार पेनकिलर खाते हैं, तो इससे केवल दिमाग तक दर्द का सिग्नल पहुंचना बंद होता है, लेकिन दर्द को पैदा करने वाले असल कारण (जैसे गलत पोश्चर, कमजोर मांसपेशियां या सूजन) वैसे ही बने रहते हैं। नतीजा यह होता है कि अंदरूनी डैमेज चुपचाप बढ़ता रहता है।
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