सहारनपुर: नगीना से नवनिर्वाचित सांसद और आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। साल 2017 में सहारनपुर के रामनगर में हुई जातीय हिंसा के एक मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। विशेष न्यायाधीश मिनल चावला ने अदालत में पेश न होने पर सांसद चंद्रशेखर सहित आठ आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है।
क्या था 2017 का रामनगर हिंसा मामला?
मामले की जड़ें 9 मई 2017 को हुई उस हिंसा से जुड़ी हैं, जिसने पूरे सहारनपुर को दहला दिया था। देहात कोतवाली क्षेत्र के रामनगर गांव में भड़की इस हिंसा में जमकर आगजनी और पथराव हुआ था, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में वादी सुधीर कुमार गुप्ता ने मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि मौके पर मची भगदड़ और उपद्रव के दौरान उनकी बाइक सहित कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था।
कोर्ट में क्यों जारी हुआ वारंट?
विशेष लोक अभियोजक गुलाब सिंह के अनुसार, इस मामले में कुल 14 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कुछ आरोपी तो कोर्ट में मौजूद थे, लेकिन सांसद चंद्रशेखर आजाद, दीपक बौद्ध, कमल वालिया, कालू उर्फ अमित, कदम सिंह, अंकित, बंटी और राजन गैर-हाजिर रहे। काफी समय से अदालत में पेश न होने के कारण न्यायाधीश ने कड़ी नाराजगी जाहिर की और सभी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 20 मई की तारीख मुकर्रर की है। वर्तमान में मामले में ‘चार्ज फ्रेम’ (आरोप तय) होने की प्रक्रिया पर सुनवाई चल रही है।
लालवाला विवाद: 8 घंटे ‘हाउस अरेस्ट’ रहे सांसद
वारंट के बीच चंद्रशेखर आजाद को एक और मोर्चे पर प्रशासन की सख्ती का सामना करना पड़ा। देवबंद के गांव लालवाला में दो पक्षों के बीच हुए खूनी संघर्ष के बाद पीड़ितों से मिलने जा रहे चंद्रशेखर को पुलिस ने रोक दिया। एहतियात के तौर पर उन्हें उनके आवास पर ही लगभग 8 घंटे तक नजरबंद (हाउस अरेस्ट) रखा गया। इस दौरान उनकी पूरी कॉलोनी पुलिस छावनी में तब्दील रही। लालवाला में दो बीघा जमीन को लेकर हुए विवाद ने शनिवार को हिंसक रूप ले लिया था, जिसमें जमकर पथराव और फायरिंग हुई थी।
आगे क्या होगा?
कोर्ट द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद अब चंद्रशेखर आजाद को 20 मई को अदालत में पेश होना पड़ सकता है। यदि वे पेश नहीं होते हैं, तो उनकी गिरफ्तारी की तलवार लटक सकती है। चुनावी जीत के बाद सांसद के लिए यह कानूनी पेच ‘मिशन 2027’ की तैयारियों के बीच एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
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