कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा जा रहा है। अब तक के रुझानों ने साफ कर दिया है कि ममता बनर्जी के ‘अजेय’ किले में सेंध लग चुकी है और भारतीय जनता पार्टी पहली बार राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता की ओर बढ़ती दिख रही है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि बंगाल की इस ‘प्रचंड जीत’ की पटकथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज से ठीक 6 महीने पहले ही लिख दी थी?
बिहार की जीत और गंगा का वो संदेश
बीते साल नवंबर में जब बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आए और बीजेपी ने वहां ऐतिहासिक प्रदर्शन किया, तब दिल्ली के पार्टी मुख्यालय से पीएम मोदी ने एक ‘विजय संबोधन’ दिया था। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि बिहार की जीत का जश्न मनाते हुए पीएम मोदी बंगाल के भविष्य की घोषणा कर रहे हैं। पीएम ने बड़े ही दार्शनिक अंदाज में कहा था कि “गंगा जी बिहार से बहते हुए ही बंगाल तक पहुंचती हैं।” उनके इस एक वाक्य में गहरा सियासी संदेश छिपा था, जिसे आज के रुझानों ने हकीकत में बदल दिया है।
‘जंगलराज’ के खात्मे की अपील और 10 साल की तपस्या
पीएम मोदी ने बिहार की जीत को ‘विकास की राजनीति’ की जीत बताया था और वहीं से बंगाल की जनता को एक प्रतीकात्मक संदेश दिया था। उन्होंने बंगाल के लोगों से बिहार की तर्ज पर ही ‘जंगलराज’ को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया था। बंगाल में बीजेपी का यह प्रदर्शन कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे पिछले 10 वर्षों की जमीनी मेहनत और कैडर निर्माण की लंबी प्रक्रिया है। साल 2016 में जहां बीजेपी महज 3 सीटों पर सिमटी थी, वहीं 2021 के 77 सीटों के सफर को पार करते हुए आज पार्टी दो-तिहाई बहुमत की दहलीज पर खड़ी है।
दक्षिण भारत तक जाएगी इस जीत की गूंज
प्रधानमंत्री ने अपने उसी संबोधन में एक और दूरगामी बात कही थी। उन्होंने कहा था कि बंगाल की यह जीत केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह दक्षिण भारत में भी पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए संजीवनी का काम करेगी। आज जिस तरह से टीएमसी का शासन खत्म होने की कगार पर है, उसने साफ कर दिया है कि पीएम मोदी की चुनावी रणनीति और भावी आकलन कितना सटीक था।
ऐतिहासिक उलटफेर की ओर पश्चिम बंगाल
बता दें कि पिछले चुनाव में ममता बनर्जी की टीएमसी ने 213 सीटें जीतकर प्रचंड वापसी की थी, लेकिन इस बार एंटी-इंकंबेंसी और बीजेपी के आक्रामक चुनाव प्रचार ने बाजी पलट दी है। रुझान अगर अंतिम नतीजों में बदलते हैं, तो बंगाल के राजनीतिक इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर माना जाएगा। फिलहाल, बीजेपी खेमे में उत्साह है, हालांकि चुनाव आयोग की पाबंदियों के कारण जश्न पर फिलहाल ब्रेक लगा हुआ है।
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