नई दिल्ली | देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर मोदी सरकार ने एक बार फिर अपना कड़ा रुख साफ कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा गिरफ्तार किए गए एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों के मामले में बड़ा खुलासा किया है। शाह ने स्पष्ट किया कि भारत की धरती का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए ‘ट्रांजिट पॉइंट’ के रूप में करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। गिरफ्तार किए गए ये विदेशी नागरिक मिजोरम के रास्ते म्यांमार जाकर विद्रोही गुटों से ट्रेनिंग लेने और उन्हें हथियार सप्लाई करने की फिराक में थे।
म्यांमार के विद्रोही गुटों से कनेक्शन: क्या था ‘विदेशी गैंग’ का प्लान?
NIA की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। गिरफ्तार किए गए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वान डाइक और उनके छह यूक्रेनी साथियों पर आरोप है कि वे वैध वीजा पर भारत आए, लेकिन उनका इरादा बेहद खतरनाक था। ये लोग बिना अनुमति के मिजोरम के संरक्षित क्षेत्रों में घुसे और वहां से म्यांमार के सशस्त्र विद्रोही समूहों के संपर्क में थे। गृह मंत्री ने बताया कि इनका मुख्य लक्ष्य म्यांमार के शिविरों में आतंकी ट्रेनिंग लेना और वहां के गुटों को आधुनिक ड्रोन व घातक हथियार मुहैया कराना था।
कोर्ट ने बढ़ाई 10 दिन की रिमांड: UAPA के तहत कसा शिकंजा
नई दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सातों विदेशी नागरिकों की कस्टडी 10 दिनों के लिए और बढ़ा दी है। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि पूछताछ में कुछ संदिग्ध भारतीयों और अन्य विदेशी नागरिकों के नाम भी सामने आए हैं। इन आरोपियों पर UAPA की धारा 18 (आतंकी साजिश) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन पर यूरोप से ड्रोन की खेप लाने और एके-47 से लैस अज्ञात आतंकियों के संपर्क में रहने के गंभीर आरोप हैं।
“गलत इरादे से आए तो खैर नहीं”: शाह की दोटूक चेतावनी
अमित शाह ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, “इन विदेशी नागरिकों से फिलहाल भारत को सीधा खतरा नहीं था, लेकिन वे हमारे देश के रास्ते का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। हमारी नीति जीरो टॉलरेंस की है—यदि कोई भी विदेशी नागरिक गलत इरादे या अवैध गतिविधियों के लिए भारत की जमीन पर कदम रखेगा, तो उसे कानून के सबसे सख्त प्रावधानों का सामना करना होगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा एजेंसियां अब हर उस विदेशी गतिविधि पर नजर रख रही हैं जो सीमावर्ती राज्यों की शांति भंग कर सकती हैं।
नक्सलवाद का अंत: 31 मार्च 2026 की डेडलाइन पर क्या बोले गृह मंत्री?
इंटरव्यू के दौरान जब शाह से नक्सलवाद के खात्मे की समय सीमा (31 मार्च, 2026) पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि यह हार-जीत का नहीं, बल्कि सुरक्षा का विषय है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य बम विस्फोटों और हमलों को पूरी तरह शून्य पर लाना है।” शाह ने बताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में ‘तिरुपति-पशुपतिनाथ कॉरिडोर’ के आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों ने नक्सलवाद की कमर तोड़ दी है। सरकार अब अंतिम प्रहार की तैयारी में है ताकि देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को अभेद्य बनाया जा सके।
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