‘अमेरिका से कोई शांति वार्ता नहीं’: ईरानी राजदूत ने ट्रंप के दावों की खोली पोल, बोले- यह जंग वाशिंगटन की धोखेबाजी का नतीजा

इस्लामाबाद: पश्चिम एशिया में बारूद की गंध और गहराते युद्ध के बीच शांति वार्ता की खबरों पर ईरान ने बड़ा बयान देकर सनसनी मचा दी है। पाकिस्तान में तैनात ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोगदम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि दोनों देश समझौते की मेज पर हैं। ईरानी राजदूत ने दो टूक शब्दों में कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच किसी भी स्तर पर कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने मौजूदा संघर्ष को अमेरिका की ‘धोखेबाजी’ का परिणाम बताते हुए साफ किया कि हालात समझौते की नहीं, बल्कि टकराव की दिशा में हैं।

ट्रंप का दावा बनाम ईरान की सच्चाई: कौन बोल रहा है झूठ?

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर दावा किया था कि ईरान युद्ध खत्म करने के लिए उतावला है और दोनों पक्षों के बीच गुप्त वार्ता जारी है। हालांकि, राजदूत मोगदम ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका पहले भी बातचीत की कोशिशों को तोड़ चुका है और भरोसे के काबिल नहीं है। उन्होंने कहा, “यह युद्ध अमेरिका की वादाखिलाफी का नतीजा है। जो देश धोखेबाजी पर उतारू हो, उससे शांति की उम्मीद कैसे की जा सकती है?” ईरान के इस सख्त रुख ने ट्रंप प्रशासन की उस रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें वे ईरान के ‘सरेंडर’ करने का दावा कर रहे थे।

इस्राइल का रुख: ‘बातचीत की खबर नहीं, हमारा ऑपरेशन जारी रहेगा’

शांति वार्ता के दावों पर केवल ईरान ही नहीं, बल्कि इस्राइल ने भी अनभिज्ञता जाहिर की है। संयुक्त राष्ट्र में इस्राइल के राजदूत डैनी डैनन ने स्पष्ट किया है कि उन्हें ऐसी किसी भी मध्यस्थता या बातचीत की जानकारी नहीं है। डैनन ने कहा, “हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना। जब तक हम ईरान के सैन्य और कमांड ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त नहीं कर देते, तब तक हमारे हमले जारी रहेंगे।” इस्राइल का दावा है कि उसने अमेरिकी सहयोग से ईरान की वायुसेना और नौसेना को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है।

तेहरान के आसमान पर अमेरिकी विमान? दावों और हकीकत की जंग

डोनाल्ड ट्रंप ने यहां तक दावा किया है कि अमेरिकी लड़ाकू विमान अब बेखौफ होकर तेहरान के ऊपर उड़ान भर रहे हैं और ईरान की सैन्य ताकत लगभग शून्य हो चुकी है। वहीं, ईरान इन दावों को मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) करार दे रहा है। ईरानी पक्ष का कहना है कि वे अब भी जवाबी हमले करने में सक्षम हैं और उन्होंने कई चरणों में इस्राइल को निशाना बनाया है। दोनों देशों के बयानों में जमीन-आ आसमान का अंतर यह संकेत दे रहा है कि पश्चिम एशिया में शांति की फिलहाल कोई गुंजाइश नहीं है और दुनिया एक बड़े विनाशकारी युद्ध की दहलीज पर खड़ी है।

मध्यस्थता की कोशिशें भी हुईं नाकाम?

इससे पहले चर्चा थी कि कुछ मुस्लिम देश इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच दूरियां मिटाने के लिए मध्यस्थता बैठक कर सकते हैं। लेकिन राजदूत मोगदम के ताजा बयान ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। तेहरान का रुख अब और भी कड़ा नजर आ रहा है, जिससे साफ है कि वे बिना किसी ठोस गारंटी के अमेरिका से कोई भी संवाद नहीं करेंगे। फिलहाल, पूरा क्षेत्र एक ऐसी अनिश्चितता में फंस गया है जहां कूटनीति की जगह मिसाइलों की गूंज ज्यादा सुनाई दे रही है।

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