NTA का होगा संपूर्ण कायाकल्प: पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार का मेगा प्लान; 1000 नए सरकारी परीक्षा केंद्र, ‘डिजी-एग्जाम’ बायोमेट्रिक सिस्टम और स्थायी अफसरों की तैनाती समेत होंगे ये बड़े बदलाव

नई दिल्ली: देश में नीट (NEET-UG), जेईई मेन (JEE Main), सीयूईटी (CUET) और यूजीसी-नेट (UGC-NET) जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी व प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को पूरी तरह बदलने और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाना शुरू कर दिया है। पिछले सत्रों में पेपर लीक विवादों, धांधली के आरोपों और सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणियों के बाद गठित उच्च स्तरीय डॉ. के. राधाकृष्णन विशेषज्ञ समिति की 101 सिफारिशों को अब मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि देश के करोड़ों छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले माफिया तंत्र को जड़ से खत्म किया जाए और एनटीए को केवल एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के बजाय विश्वस्तरीय, तकनीकी रूप से सुरक्षित और स्थायी प्रशासनिक क्षमता वाला संस्थान बनाया जाए। इस व्यापक सुधार अभियान के तहत परीक्षा केंद्रों के चयन, प्रश्नपत्रों के वितरण, उम्मीदवारों के बायोमेट्रिक सत्यापन और एजेंसी के आंतरिक प्रशासनिक ढांचे में युगांतरकारी बदलाव किए जा रहे हैं।

राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशें: परीक्षा सुधारों का ऐतिहासिक ब्लूप्रिंट

एनटीए की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने देश भर के शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों, छात्रों और अभिभावकों से 37 हजार से अधिक सुझाव लेने के बाद 46 प्रमुख कार्य बिंदुओं के तहत 101 ठोस सिफारिशें सरकार को सौंपी थीं।

समिति ने अपने विश्लेषण में पाया कि एनटीए ने अपनी स्थापना के बाद से 240 से अधिक परीक्षाएं आयोजित कर लगभग 5.4 करोड़ अभ्यर्थियों का प्रबंधन किया, लेकिन इसके पास पर्याप्त स्थायी विशेषज्ञ और खुद का बुनियादी ढांचा नहीं था। एजेंसी परीक्षा संचालन के लिए निजी आउटसोर्सिंग कंपनियों, प्राइवेट कंप्यूटर लैब्स और अनुबंध पर रखे गए कर्मचारियों पर अत्यधिक निर्भर थी, जिससे सुरक्षा में सेंध लगने का खतरा लगातार बना रहता था। अब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर स्पष्ट किया है कि समिति की अधिकांश सिफारिशों को लागू कर दिया गया है और शेष दीर्घकालिक सुधारों को तेजी से पूरा किया जा रहा है।

प्राइवेट सेंटरों की छुट्टी: 1000 सरकारी ‘सिक्योर टेस्टिंग सेंटर’ का बनेगा नेटवर्क

एनटीए के नए सुधारों में सबसे बड़ा जमीनी बदलाव परीक्षा केंद्रों के चयन को लेकर है। अब तक कई परीक्षाओं में सुदूर इलाकों की गैर-मान्यता प्राप्त प्राइवेट कंप्यूटर लैब्स और संदेहास्पद स्कूलों को परीक्षा केंद्र बना दिया जाता था, जहां नेटवर्क हैकिंग, रिमोट एक्सेस और पेपर लीक जैसी गड़बड़ियों की गुंजाइश रहती थी।

सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने का फैसला किया है। अब देश भर के प्रतिष्ठित सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों, केंद्रीय विद्यालयों (KV), नवोदय विद्यालयों (JNV), आईआईटी (IIT), एनआईटी (NIT) और सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में कम से कम 1000 ‘सिक्योर टेस्टिंग सेंटर’ (Secure Testing Centres) का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। इन केंद्रों पर निर्बाध हाई-स्पीड इंटरनेट, 24 घंटे बिजली बैकअप, आधुनिक सीसीटीवी सर्विलांस, मोबाइल नेटवर्क जैमर्स, फोन लॉकर्स और छात्रों व उनके अभिभावकों के लिए सुरक्षित वेटिंग एरिया की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। इसके अलावा पूर्वोत्तर, हिमालयी और दुर्गम क्षेत्रों के अभ्यर्थियों के लिए विशेष ‘मोबाइल टेस्टिंग सेंटर बसें’ चलाई जाएंगी, जो लैपटॉप और सुरक्षित इन-बिल्ट सर्वर्स से लैस होंगी।

‘डिजी-एग्जाम’ और मल्टी-स्टेज बायोमेट्रिक: मुन्नाभाइयों और फर्जीवाड़े पर फुल स्टॉप

परीक्षाओं में दूसरे की जगह बैठकर परीक्षा देने वाले सॉल्वर गैंग (डमी कैंडिडेट्स) पर लगाम लगाने के लिए विमानन क्षेत्र की ‘डिजि यात्रा’ की तर्ज पर ‘डिजी-एग्जाम’ (DIGI-EXAM) प्रमाणीकरण ढांचा लागू किया जा रहा है।

इस नई व्यवस्था के तहत किसी भी छात्र की पहचान का सत्यापन केवल एक बार नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग स्तरों पर किया जाएगा:

  1. आवेदन के समय: फॉर्म भरते ही आधार-आधारित डिजिटल पहचान और लाइव फोटो कैप्चरिंग।

  2. परीक्षा केंद्र के प्रवेश द्वार पर: एआई (AI) आधारित फेशियल रिकग्निशन, मल्टी-लेयर डिजिटल फ्रिस्किंग और बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट ऑथेंटिकेशन।

  3. काउंसलिंग और दाखिले के समय: अंतिम प्रवेश के समय पूर्व डेटा से फेशियल और बायोमेट्रिक मिलान, जिससे यह 100 फीसदी सुनिश्चित हो सके कि जिस उम्मीदवार ने परीक्षा दी है, वही कॉलेज में प्रवेश ले रहा है।

CPPT मॉडल और हाइब्रिड परीक्षा प्रणाली: प्रश्नपत्र परिवहन में लीक का खतरा खत्म

पारंपरिक पेन-एंड-पेपर (OMR शीट) परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की छपाई, कई दिनों तक बैंकों के स्ट्रॉन्ग रूम में भंडारण और ट्रकों के जरिए परिवहन के दौरान पेपर लीक होने का सबसे बड़ा जोखिम रहता था। इस खतरे को हमेशा के लिए समाप्त करने के लिए समिति ने ‘कंप्यूटर-असिस्टेड सिक्योर पेन-एंड-पेपर टेस्टिंग’ (CPPT) मॉडल लागू करने की सिफारिश की है।

इस तकनीक के तहत प्रश्नपत्रों को कई दिन पहले छापने और ट्रकों से भेजने के बजाय परीक्षा शुरू होने से कुछ ही मिनट पहले उच्च-स्तरीय एन्क्रिप्शन (Encrypted Digital Transmission) के जरिए सीधे परीक्षा केंद्र के सुरक्षित डिजिटल कंसोल पर भेजा जाएगा। परीक्षा केंद्र पर ही विशेष सिक्योर प्रिंटरों द्वारा तुरंत पेपर प्रिंट कर छात्रों में बांटे जाएंगे और छात्र उत्तर OMR शीट पर ही भरेंगे। इसके अलावा, नीट-यूजी जैसी 24 लाख से अधिक छात्रों वाली विशाल परीक्षाओं के लिए भविष्य में ‘मल्टी-स्टेज’ (प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा) या कई दिनों में मल्टी-सेशन परीक्षा आयोजित करने का विकल्प भी तैयार किया जा रहा है, ताकि एक ही दिन में पूरे सिस्टम पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव को कम किया जा सके।

16 नए वरिष्ठ प्रशासनिक पद, CISF सुरक्षा और 600 एक्सपर्ट्स का पैनल बदला

एनटीए को केवल तकनीकी रूप से ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक रूप से भी बेहद सख्त और जवाबदेह बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति (ACC) ने एजेंसी में संयुक्त सचिव, डायरेक्टर और जॉइंट डायरेक्टर स्तर के 16 नए वरिष्ठ पदों को मंजूरी दी है, जिन पर अनुभवी आईएएस, आईपीएस और आईआरएस अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है।

इसके साथ ही, परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को सुरक्षा प्रबंधन में शामिल किया गया है। प्रश्नपत्र तैयार करने, मॉडरेशन और अनुवाद करने वाले पुराने 600 से अधिक विषय विशेषज्ञों के पैनल को हटाकर नए उच्च स्तरीय शिक्षाविदों का पूल बनाया गया है। एजेंसी के भीतर 10 अलग-अलग समर्पित वर्टिकल बनाए जा रहे हैं, जिनमें इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी (साइबर सुरक्षा), विजिलेंस एंड फॉरेंसिक्स, नेशन-वाइड टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) शामिल हैं, जिससे हर विंग की जवाबदेही तय की जा सके।

छात्रों के लिए मेंटल हेल्थ सेल, एआई चैटबॉट और कोचिंग माफिया पर नकेल

राधाकृष्णन समिति ने केवल परीक्षा सुरक्षा ही नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया है। प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव में छात्रों द्वारा उठाए जाने वाले आत्मघाती कदमों को रोकने के लिए एनटीए के भीतर एक विशेष ‘मेंटल हेल्थ सपोर्ट सेल’ और 24 घंटे चलने वाली टेली-काउंसलिंग हेल्पलाइन शुरू की जा रही है।

छात्रों की समस्याओं और आपत्तियों के त्वरित समाधान के लिए एआई (AI) और मशीन लर्निंग आधारित मल्टी-लिंगुअल चैटबॉट लॉन्च किए जा रहे हैं, जो छात्रों को उनकी अपनी मातृभाषा में तुरंत सही जानकारी उपलब्ध कराएंगे। इसके अतिरिक्त, समिति ने अनियंत्रित और भ्रामक प्रचार करने वाले कोचिंग संस्थानों की फीस व दावों को नियंत्रित करने के लिए एक सख्त विनियामक तंत्र (Regulatory Oversight) बनाने का भी सुझाव दिया है, ताकि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम किया जा सके।

राज्य सरकारों के साथ जिला स्तरीय समन्वय और सीएटी (CAT) की ओर कदम

एनटीए के विकेंद्रीकरण के तहत अब राज्य सरकारों को भी परीक्षा संचालन का सीधा साझीदार बनाया गया है। हर राज्य में ‘राज्य स्तरीय समन्वय समिति’ (SLCC) और हर जिले में जिलाधिकारी (DM) व पुलिस अधीक्षक (SP) की अध्यक्षता में ‘जिला स्तरीय समन्वय समिति’ (DLCC) गठित की गई हैं, जो स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक, ट्रैफिक, सुरक्षा और फ्लाइंग स्क्वॉड की निगरानी करेंगी।

दीर्घकालिक सुधारों के तहत एनटीए धीरे-धीरे ‘कंप्यूटर एडेप्टिव टेस्टिंग’ (Computer Adaptive Testing) की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां जीमैट या जीआरई की तर्ज पर उम्मीदवार के प्रदर्शन के आधार पर प्रश्नों का कठिनाई स्तर सिस्टम द्वारा स्वतः निर्धारित होता है। केंद्र सरकार के इन साहसिक और बहुस्तरीय सुधारों से यह तय है कि आने वाले समय में देश की प्रतियोगी परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और कदाचार-मुक्त बनेंगी, जिससे देश के लाखों मेधावी छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा पुनः सुदृढ़ होगा।

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