PoK (रावलकोट) में खूनी संघर्ष: सैन्य अस्पताल पर कब्जे की कोशिश, 11 की मौत और ‘महासंग्राम’ का अलर्ट

रावलकोट/मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात एक बार फिर बेहद विस्फोटक और बेकाबू हो गए हैं। ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भड़की हिंसा ने रावलकोट को युद्ध के मैदान में तब्दील कर दिया है। 9 जून को बुलाए गए पूर्ण ‘शटर-डाउन’ और क्षेत्रव्यापी बंद से पहले हुई हिंसक झड़पों में 4 पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि 70 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए आज एक बड़े ‘महासंग्राम’ और भारी बवाल की आशंका जताई जा रही है।

CMH अस्पताल पर कब्जे की कोशिश और ‘गोरिल्ला युद्ध’ जैसा हमला

डिविजनल कमिश्नर सरदार वहीद खान ने रावलकोट में हुई हिंसा के बारे में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उनके मुताबिक:

  • अस्पताल पर कब्जा: प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) के रास्तों को ब्लॉक कर दिया, बल्कि लगभग पूरे अस्पताल परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया था। स्थिति इतनी भयावह थी कि डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को अपनी जान बचाने के लिए वहां से भागना पड़ा।

  • गोरिल्ला रणनीति: कमिश्नर ने बताया कि हमलावर पूरी तरह से हथियारों, पेट्रोल बम और गोला-बारूद से लैस थे। उन्होंने गलियों और संकरे रास्तों का इस्तेमाल करते हुए सुरक्षाबलों पर ‘गोरिल्ला युद्ध’ की तर्ज पर घात लगाकर हमले किए।

हिंसा का कारण और मरने वालों का आंकड़ा

यह ताजा हिंसा तब भड़की जब प्रदर्शनकारी एक साथी कार्यकर्ता के शव के साथ अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर जमा हुए थे। पुलिस चीफ लियाकत मलिक और स्थानीय प्रशासन के अनुसार:

  • मृतकों की संख्या: इस संघर्ष में 4 पुलिसकर्मियों, 6 प्रदर्शनकारियों और 1 राहगीर की मौत की पुष्टि हुई है।

  • घायल: करीब 23 सुरक्षाकर्मी और 50 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हैं, जिनका इलाज चल रहा है।

  • गिरफ्तारी: प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अब तक 200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि संगठन के शीर्ष नेता फिलहाल भूमिगत हैं।

क्यों जल रहा है PoK? मुख्य विवाद की जड़ें

JAAC के नेतृत्व में हो रहे इन प्रदर्शनों के पीछे कई गंभीर कारण और जनता का संचित आक्रोश है:

  1. आरक्षित सीटों का विवाद: 45 सदस्यों वाली विधानसभा में उन शरणार्थियों के लिए 12 सीटें आरक्षित करने का फैसला, जो पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं। स्थानीय लोग इसे अपने प्रतिनिधित्व को कमजोर करने की साजिश मान रहे हैं।

  2. महंगाई और बिजली संकट: आटे की आसमान छूती कीमतें और बिजली की भारी किल्लत ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है।

  3. सरकार का दमन: पिछले हफ्ते JAAC को ‘प्रतिबंधित संगठन’ घोषित करना, इंटरनेट सेवाएं ठप करना और संगठन के नेताओं की धरपकड़ ने आग में घी का काम किया है।

JAAC का ‘लॉन्ग मार्च’ और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

प्रशासन की पाबंदी के बावजूद JAAC अपने आंदोलन पर अड़ा है। संगठन की योजना भिंबर से ‘लॉन्ग मार्च’ शुरू कर मीरपुर, कोटली और पुंछ होते हुए 10 जून को मुजफ्फराबाद विधानसभा के घेराव की है।

इस बीच, बिगड़ते हालातों को देखते हुए ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने अपने नागरिकों के लिए ‘ट्रैवल एडवाइजरी’ जारी की है। इन देशों ने अपने नागरिकों को विरोध प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहने और संचार सेवाएं ठप होने की चेतावनी दी है। वहीं, पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने भी आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रदर्शनों को दबाने की निंदा की है और एक फैक्ट-फाइंडिंग टीम भेजने का निर्णय लिया है।

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