सपा ऑफिस के बाहर लगे ‘राजभर हत्या’ पोस्टर पर गरमाई सियासत: ओम प्रकाश राजभर का तीखा हमला

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगे एक नए पोस्टर ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सपा कार्यालय के बाहर लगे इस बैनर में साल 2024 से 2026 के बीच राजभर समाज के लोगों की हुई हत्याओं की एक विस्तृत सूची जारी की गई है। इस पोस्टर के सामने आते ही योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने मोर्चा खोल दिया है और सपा पर तीखा पलटवार किया है।

पोस्टर में क्या है?

समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज राजभर की ओर से लगाए गए इस बैनर में साल 2024 से 2026 के दौरान हुई राजभर समुदाय के लोगों की हत्याओं का ब्यौरा है। इसमें वाराणसी, बलिया, गाजीपुर, मऊ, जौनपुर, बाराबंकी, कुशीनगर और संत कबीर नगर सहित कई जिलों के कुल 22 पीड़ितों के नाम अंकित हैं। इस पोस्टर के माध्यम से सपा ने भाजपा सरकार में कानून-व्यवस्था और विशेष रूप से राजभर समाज की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।

ओम प्रकाश राजभर का तीखा पलटवार

इस पोस्टर पर प्रतिक्रिया देते हुए ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, “अगर सपा वाले इस पोस्टर पर हत्याओं की गिनती दिखा रहे हैं, तो उन्हें उन कातिलों के नाम भी लिखने चाहिए जिन्होंने ये अपराध किए हैं। ज्यादातर मामलों में आरोपी यादव समाज से हैं, फिर सपा क्यों चुप है?”

राजभर ने बाराबंकी और मऊ की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सपा वाकई राजभर समाज के प्रति गंभीर है, तो उसे अपराधी का नाम सार्वजनिक करने का साहस दिखाना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर आप मर्द हैं और आपमें दम है, तो पोस्टर में हत्या करने वाले का नाम भी लिखें। सिर्फ गिनती दिखाकर जनता को बरगलाने की कोशिश न करें।”

सपा के ‘PDA’ पर उठाया बड़ा सवाल

पोस्टर विवाद के बहाने ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को ‘परिवारवाद’ का मुखौटा करार दिया। उन्होंने कहा, “सपा के लिए PDA का अर्थ है ‘पहला दावा अहिर’ और वह भी सिर्फ सैफई परिवार का। अगर सपा सच में पिछड़ों की हितैषी होती, तो आजमगढ़, बदायूं और कन्नौज जैसी सीटों पर राजभर, चौहान, निषाद, बिंद और कश्यप समाज के लोगों को सांसद बनाया जाता, न कि अपने परिवार के सदस्यों को।”

क्या है इस विवाद का निहितार्थ?

यह वाकया उत्तर प्रदेश की राजनीति में बढ़ती जा रही जातिगत गोलबंदी को दर्शाता है। एक तरफ सपा जहां इन आंकड़ों के जरिए राजभर वोट बैंक को भाजपा के खिलाफ लामबंद करने की कोशिश कर रही है, वहीं ओम प्रकाश राजभर इसे ‘राजनीतिक ठगी’ बताते हुए सपा के पारिवारिक नेतृत्व पर हमला कर रहे हैं। इस पोस्टर वॉर ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़ी जातियों का मुद्दा केंद्र बिंदु रहने वाला है।

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