महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में मूसलाधार बारिश का कहर जारी है। मौसम विभाग (IMD) द्वारा अगले 24 घंटों में 300 मिमी तक बारिश का रेड अलर्ट और बादल फटने जैसी स्थिति की चेतावनी जारी की गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन ने ऐतिहासिक त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग और प्रसिद्ध सप्तश्रृंगी मंदिर को अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही स्थानीय स्कूलों में भी छुट्टी घोषित कर दी गई है।
स्वयंभू शिवलिंग और गोदावरी का पावन तट
गोदावरी नदी के तट पर स्थित त्र्यंबकेश्वर मंदिर की महिमा अपरंपार है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है, यानी यह किसी मानव द्वारा स्थापित नहीं किया गया बल्कि स्वयं प्रकट हुआ था।
दुनिया का एकमात्र स्थान जहाँ विराजते हैं त्रिदेव
इस ज्योतिर्लिंग की सबसे अनूठी विशेषता इसका त्रिमुखी रूप है। मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग में तीन छोटे मुख (छेद) हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) के प्रतीक हैं। पूरी दुनिया में यह एकमात्र ऐसा पवित्र स्थान है जहाँ सृष्टि के तीनों रचयिता एक साथ वास करते हैं।
गौतम ऋषि की तपस्या और कुशावर्त कुंड की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि गौतम की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गोदावरी नदी को पृथ्वी पर अवतरित किया था। महर्षि गौतम ने नदी के तीव्र वेग को नियंत्रित करने के लिए ‘कुश’ (घास) का उपयोग किया था, जिसके कारण यहाँ ‘कुशावर्त कुंड’ का निर्माण हुआ। इसे गोदावरी का प्रतीकात्मक उद्गम स्थल माना जाता है, जहाँ स्नान का विशेष महत्व है।
मोक्ष की प्राप्ति और दोष निवारण का केंद्र
त्र्यंबकेश्वर धाम को लेकर अटूट विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से दर्शन करने मात्र से भक्तों के जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, कुंडली के पितृ दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए इस मंदिर परिसर में विशेष पूजा और अनुष्ठान कराए जाते हैं। प्रशासन ने स्थिति सामान्य होने तक भक्तों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
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