सपा का ‘मास्टरस्ट्रोक’ या मजबूरी? कमाल अख्तर के इस्तीफे के पीछे आजम खान और रुचि वीरा का ‘कनेक्शन’

उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर चल रहा ‘मुरादाबाद घमासान’ अब एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। कांठ विधानसभा सीट से विधायक कमाल अख्तर के मुख्य सचेतक (Chief Whip) पद से हटने की खबर जितनी चौंकाने वाली है, उसके पीछे की इनसाइड स्टोरी उतनी ही गहरी है।

राजनीतिक गलियारों और सपा के आंतरिक सूत्रों की मानें तो कमाल अख्तर का यह इस्तीफा महज एक रूटीन संगठनात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि इसके पीछे दिग्गज नेता आजम खान के गुट की नाराजगी को शांत करने और आगामी यूपी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को किसी भी बड़े डैमेज से बचाने की अखिलेश यादव की सोची-समझी रणनीति है। आइए समझते हैं कि कमाल अख्तर को हटाए जाने के पीछे क्या सियासी समीकरण काम कर रहे हैं।

आजम खान और रुचि वीरा के गुस्से को शांत करने की कोशिश

मुरादाबाद लोकसभा सीट से सपा सांसद रुचि वीरा को समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता है। पिछले कुछ समय से मुरादाबाद मंडल में विधायक कमाल अख्तर और सांसद रुचि वीरा के बीच चल रही तनातनी से यह संदेश जा रहा था कि आजम खान का गुट अखिलेश नेतृत्व से खफा है।

  • टिकट का इतिहास: गौरतलब है कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में आजम खान के कड़े रुख के बाद ही मौजूदा सांसद एसटी हसन का टिकट काटकर रुचि वीरा को मुरादाबाद से उम्मीदवार बनाया गया था।

  • बगावत का डर: यूपी चुनाव के मुहाने पर खड़ी सपा मुरादाबाद और रामपुर जैसे अपने मजबूत गढ़ों में आजम खान समर्थकों की नाराजगी मोल लेकर कोई रिस्क नहीं उठाना चाहती थी। कमाल अख्तर के इस्तीफे को रुचि वीरा और आजम गुट को साधने के तौर पर देखा जा रहा है।

‘पीडीए सम्मेलन’ का वो विवाद, जिसने लखनऊ में मचाई रार

दोनों नेताओं के बीच विवाद की असली चिंगारी तब भड़की जब पिछले दिनों मुरादाबाद ग्रामीण क्षेत्र में एक बड़े ‘पीडीए (PDA) सम्मेलन’ का आयोजन किया गया, लेकिन उसमें स्थानीय सांसद रुचि वीरा को न्योता तक नहीं दिया गया।

  • अखिलेश से शिकायत: इस उपेक्षा से नाराज रुचि वीरा ने सीधे सपा मुखिया अखिलेश यादव से शिकायत दर्ज कराई।

  • बंद कमरे में तकरार: अखिलेश यादव ने मामले को रफा-दफा करने के लिए दोनों नेताओं को लखनऊ तलब किया। सूत्रों के मुताबिक, इस हाई-लेवल मीटिंग में दोनों के बीच तीखी तकरार भी हुई। हालांकि, कमाल अख्तर ने सफाई दी कि वह कार्यक्रम सिर्फ अमजद पठान को महानगर उपाध्यक्ष बनाए जाने का एक छोटा सा समारोह था, न कि कोई आधिकारिक पीडीए सम्मेलन। लेकिन रुचि वीरा का गुस्सा शांत नहीं हुआ।

विधानसभा अध्यक्ष को भेजा गया पत्र, अब ओबीसी चेहरे पर दांव!

समाजवादी पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को कमाल अख्तर के पद से हटने के संबंध में आधिकारिक पत्र भेज दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सपा का नया मुख्य सचेतक कौन होगा?

  • जातीय समीकरण दुरुस्त करने की तैयारी: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव अब मुरादाबाद मंडल के क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को संतुलित करने के लिए किसी कद्दावर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) विधायक को मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।

  • चुनावी संदेश: चुनाव से ठीक पहले किसी बड़े पिछड़े नेता को चीफ व्हिप बनाकर सपा अपने ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और मजबूत संदेश देना चाहती है।

कमाल अख्तर की सफाई: “नेता का आदेश सर्वोपरि, रुचि वीरा से कोई बैर नहीं”

पद छोड़ने के बाद कमाल अख्तर ने बेहद सधे हुए अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने रुचि वीरा से किसी भी तरह के मनमुटाव से साफ इनकार किया।

  • क्या बोले कमाल अख्तर: “यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। ऐसे समय में अक्सर सांगठनिक और चुनावी रणनीतियों के तहत जिम्मेदारियां बदली जाती हैं। राज्यसभा चुनाव के समय जब मनोज पांडेय ने बगावत की थी, तब नेताजी (अखिलेश यादव) ने मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी थी। अब उनके निर्देश पर ही मैंने यह पद छोड़ा है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष का आदेश हमारे लिए सर्वोपरि है।”

अब देखना यह होगा कि कमाल अख्तर की इस ‘कुर्बानी’ से मुरादाबाद सपा का अंदरूनी झगड़ा पूरी तरह खत्म होता है या टिकट बंटवारे के समय यह गुटबाजी एक बार फिर सिर उठाएगी।

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