तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री का नाम तय न कर पाने पर राज्य की राजनीति गरमा गई है। भाजपा विधायक वी मुरलीधरन ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए आरोप लगाया कि पार्टी को राज्य के लोगों की कोई परवाह नहीं है और वह केवल सत्ता के पीछे भाग रही है।
मुस्लिम लीग के प्रभाव पर सवाल
मुरलीधरन ने कांग्रेस के सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा:
“अगर कांग्रेस के मुख्यमंत्री का चयन मुस्लिम लीग के इशारे पर होगा, तो वह सरकार में स्वतंत्र फैसले कैसे ले पाएंगे? साफ है कि पूरा एजेंडा मुस्लिम लीग द्वारा ही तय किया जाएगा।”
‘जनता का अपमान और सत्ता का मोह’
भाजपा विधायक ने मुख्यमंत्री चयन में हो रही देरी को केरल की जनता का अपमान बताया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु:
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सत्ता प्राथमिकता: मुरलीधरन के अनुसार, कांग्रेस के लिए प्राथमिकता ‘लोग’ नहीं बल्कि ‘सत्ता’ है।
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विफलता का दावा: उन्होंने भविष्यवाणी की कि यह सरकार एक साल से ज्यादा नहीं चल पाएगी क्योंकि लोग इसके आंतरिक कलह के खिलाफ खड़े हो जाएंगे।
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माफी की मांग: उन्होंने कहा कि इस अनिश्चितता के लिए कांग्रेस को केरल के लोगों से माफी मांगनी चाहिए।
कांग्रेस में क्यों फंसा है पेंच?
केरल में यूडीएफ (UDF) गठबंधन ने 140 में से 102 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए तीन कद्दावर नेताओं के बीच खींचतान जारी है:
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वीडी सतीशन: निवर्तमान विपक्ष के नेता।
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केसी वेणुगोपाल: एआईसीसी महासचिव (संगठन)।
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रमेश चेन्निथला: पूर्व विपक्ष के नेता और वरिष्ठ नेता।
आलाकमान की बैठक और समर्थक भिड़े
पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने शनिवार को दिल्ली में इन तीनों दावेदारों के साथ लंबी चर्चा की थी। हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति तनावपूर्ण है। पिछले सप्ताह सतीशन और वेणुगोपाल के समर्थकों के बीच हिंसक झड़पें भी देखने को मिलीं, जिसके कारण आलाकमान माहौल शांत होने का इंतजार कर रहा है।
कब तक होगा फैसला?
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मुलाकात करने के बाद अंतिम निर्णय की घोषणा की जाएगी।
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कार्यकाल की दलील: कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 मई को समाप्त हो रहा है, इसलिए संवैधानिक रूप से अभी कोई जल्दबाजी नहीं है।
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चेन्निथला का स्टैंड: रमेश चेन्निथला ने सोमवार को स्पष्ट किया कि आलाकमान का जो भी फैसला होगा, उसे सभी कार्यकर्ता और सहयोगी दल स्वीकार करेंगे।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
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बहुमत: यूडीएफ गठबंधन (102 सीटें)।
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दावेदार: वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथला।
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भाजपा का आरोप: देरी के पीछे मुस्लिम लीग का दबाव और अंदरूनी गुटबाजी।
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