प्रकृति जब अपने सबसे रौद्र और विध्वंसकारी रूप में होती है, तो इंसानी बस्तियां कांप उठती हैं। समुद्र की उठती भयावह लहरें, 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चीखती हवाएं, उखड़ते हुए विशालकाय पेड़ और आसमान से बरसती आफत के बीच जब जिंदगी की उम्मीदें धुंधली पड़ने लगती हैं, तब कुदरत का ही एक दूसरा रूप उम्मीद का नया …
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Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया