नई दिल्ली/ग्रेटर नोएडा: मातृत्व का सुख हर महिला के जीवन का सबसे अनमोल सपना होता है। लेकिन जब यह सपना बार-बार टूटता है, तो मन में डर और निराशा घर कर लेती है। ‘मिसकैरेज’ या गर्भपात न केवल शारीरिक कष्ट देता है, बल्कि मानसिक रूप से भी महिला को तोड़ देता है। अक्सर समाज में यह धारणा बनी हुई है कि अगर किसी महिला का एक से ज्यादा बार मिसकैरेज हो गया है, तो उसके दोबारा मां बनने की संभावनाएं खत्म या कम हो जाती हैं। लेकिन क्या विज्ञान भी यही कहता है? इस गंभीर विषय पर हमने डॉ. काजल सिंह (एसोसिएट प्रोफेसर, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग, NIIMS मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल) से खास बातचीत की, जिन्होंने इस डर के पीछे की पूरी सच्चाई उजागर की है।
क्या है ‘रिकरेंट मिसकैरेज’ और क्यों बढ़ जाती है चिंता?
चिकित्सा विज्ञान की भाषा में जब किसी महिला का लगातार दो या तीन बार गर्भपात हो जाता है, तो उसे ‘रिकरेंट मिसकैरेज’ (Recurrent Miscarriage) की श्रेणी में रखा जाता है। डॉ. काजल सिंह के अनुसार, “यह स्थिति किसी भी महिला के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि अब आप कभी मां नहीं बन पाएंगी। सच्चाई यह है कि बार-बार मिसकैरेज होने के बावजूद 60 से 70 प्रतिशत महिलाओं में बाद में एक स्वस्थ और सफल प्रेगनेंसी की पूरी संभावना होती है।”
इन कारणों से गर्भ में ही दम तोड़ देता है भ्रूण
डॉक्टर बताती हैं कि मिसकैरेज के पीछे कई शारीरिक और जेनेटिक कारण हो सकते हैं, जिन्हें समय रहते पहचानना जरूरी है:
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क्रोमोसोमल असामान्यता: अक्सर भ्रूण के जींस (Chromosomes) में गड़बड़ी होने के कारण उसका विकास रुक जाता है। यह प्रकृति का अपना तरीका है जिससे अस्वस्थ भ्रूण आगे नहीं बढ़ पाता।
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हार्मोनल इम्बैलेंस: थायरॉइड, प्रोजेस्टेरोन की कमी या PCOS जैसी बीमारियां गर्भ को सहारा देने वाले हार्मोन में बाधा डालती हैं।
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गर्भाशय (Uterus) की बनावट: बच्चेदानी का आकार सही न होना, उसमें फाइब्रॉयड्स या सेप्टम (पर्दा) होना भी गर्भपात की बड़ी वजह बनता है।
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इम्यून सिस्टम और इंफेक्शन: कई बार शरीर का रक्षा तंत्र खुद ही भ्रूण को बाहरी तत्व मानकर रिजेक्ट कर देता है। इसके अलावा कुछ छिपे हुए इन्फेक्शन भी इसका कारण हो सकते हैं।
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लाइफस्टाइल और उम्र: 35 साल की उम्र के बाद रिस्क बढ़ जाता है। साथ ही तनाव, नींद की कमी, धूम्रपान और खराब खानपान इस खतरे को और बढ़ा देते हैं।
जांच और सही इलाज से संभव है मातृत्व का सुख
अगर कोई महिला इस दौर से गुजर रही है, तो घबराने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलकर कुछ जरूरी टेस्ट करवाने चाहिए। इनमें ब्लड टेस्ट, जेनेटिक स्क्रीनिंग (पति-पत्नी दोनों की), अल्ट्रासाउंड, HSG और इम्यून सिस्टम की जांच शामिल है। डॉ. काजल कहती हैं कि आज की तकनीक इतनी उन्नत है कि हार्मोनल गड़बड़ी को दवाइयों से, शुगर-थायरॉइड को कंट्रोल करके और गर्भाशय की जटिलताओं को सर्जरी के जरिए ठीक किया जा सकता है।
मानसिक मजबूती और परिवार का साथ है अनिवार्य
बार-बार गर्भपात होने पर महिलाएं अक्सर खुद को दोषी मानने लगती हैं। डॉक्टर स्पष्ट करती हैं कि यह आपकी गलती नहीं है। इस समय महिला को सबसे ज्यादा जरूरत भावनात्मक सहयोग की होती है। खुद को तनावमुक्त रखना, योग-ध्यान करना और फोलिक एसिड युक्त संतुलित आहार लेना एक स्वस्थ भविष्य की नींव रखता है। अगर आपको भी ऐसी समस्या है, तो उम्मीद न छोड़ें, क्योंकि सही इलाज और सकारात्मक सोच के साथ मातृत्व का सपना आज भी मुमकिन है।
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