भारतीय सिनेमा में जब भी किसी बड़ी फिल्म की बात होती है, तो हमारे दिमाग में करोड़ों का बजट, आलीशान लोकेशन्स, चमचमाती लाइट्स और बड़े-बड़े सुपरस्टार्स का नाम आता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी फिल्म के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने इन सभी पारंपरिक नियमों को तोड़कर इतिहास रच दिया था। इस फिल्म का बजट इतना कम था कि उतने पैसों में आज एक अच्छी शॉर्ट फिल्म भी नहीं बन पाती। बिना किसी प्रोफेशनल एक्टर, बिना लाइटमैन और बिना किसी भारी-भरकम क्रू के बनी इस साधारण सी फिल्म ने देश का सबसे बड़ा ‘नेशनल अवॉर्ड’ (National Award) अपने नाम किया था।
डायरेक्टर ने हाथ में उठाया सस्ता DSLR और गांव में ही रच दिया इतिहास
हम बात कर रहे हैं असमिया भाषा की कल्ट फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार्स’ (Village Rockstars) की। इस फिल्म का जादू जितना पर्दे पर दिखता है, उसके पीछे की मेकिंग स्टोरी उतनी ही प्रेरणादायक है। इस फिल्म की डायरेक्टर रीमा दास ने बिना किसी बड़े प्रोड्यूसर या बैनर के इस फिल्म को बनाने का फैसला किया।
रीमा दास ने कोई महंगा कैमरा या तामझाम किराए पर नहीं लिया, बल्कि उन्होंने एक साधारण और सस्ता सा DSLR कैमरा उठाया और सीधे अपने ही पैतृक गांव पहुंच गईं। छोटा कैमरा होने का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि गांव के सीधे-सादे लोग कैमरे के सामने बिल्कुल भी असहज नहीं हुए और रीमा को बिल्कुल नेचुरल शॉट्स मिले।
न लाइटमैन, न रिफ्लेक्टर: कुदरती रोशनी से किया कमाल
एक फिल्म को बनाने में सबसे ज्यादा खर्च लाइटिंग, कैमरा क्रू और लाइटमैन की टीम पर होता है। लेकिन रीमा दास के पास बजट न के बराबर था। ऐसे में उन्होंने अपनी सिनेमैटोग्राफी के लिए एक अनोखा दिमाग लगाया। उन्होंने फिल्म की पूरी शूटिंग केवल सुबह के सूर्योदय और शाम के सूर्यास्त की कुदरती रोशनी (Natural Light) में की। दोपहर के समय जब धूप तेज होती थी, तो वे शूटिंग रोक देती थीं। इस तरह उन्होंने बिना किसी लाइटमैन के पूरी फिल्म को बेहद खूबसूरती से अपने कैमरे में कैद कर लिया।
प्रोफेशनल एक्टर्स की जगह गांव के बच्चों ने निभाया लीड रोल
दूर-दराज के ग्रामीण इलाके में शूटिंग होने के कारण किसी प्रोफेशनल एक्टर को कास्ट करना मुमकिन नहीं था और न ही उनके पास एक्टर्स को देने के लिए मोटी फीस थी। ऐसे में रीमा दास ने गांव के ही कुछ चुनिंदा बच्चों को इकट्ठा किया। उन्होंने उन बच्चों को धीरे-धीरे कैमरे के सामने बात करने और एक्टिंग करने की ट्रेनिंग दी।
इन बच्चों ने कभी कैमरे का सामना नहीं किया था, लेकिन जब फिल्म स्क्रीन पर आई, तो बच्चों के मासूम और जीवंत अभिनय ने दर्शकों के साथ-साथ बड़े-बड़े समीक्षकों का भी दिल जीत लिया। डायरेक्टर रीमा दास ने अकेले ही इस फिल्म के डायरेक्शन, सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग और कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग की पूरी कमान संभाली थी।
नेशनल अवॉर्ड जीतकर दुनिया भर में लहराया परचम
जब ‘विलेज रॉकस्टार्स’ बनकर तैयार हुई और रिलीज हुई, तो इसने भारतीय सिनेमा जगत को हिलाकर रख दिया। इस बेहद कम बजट की फिल्म को भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए भी भेजा गया था और इसने 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म’ (Best Feature Film) का नेशनल अवॉर्ड जीता था।
इस फिल्म की अपार सफलता को देखते हुए साल 2024 में इसका सीक्वल (Village Rockstars 2) भी रिलीज किया गया, जिसे एक बार फिर वैश्विक स्तर पर काफी सराहना मिली। यदि आपने अब तक भारतीय सिनेमा की इस नायाब कलाकृति को नहीं देखा है, तो यह मास्टरपीस फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) पर देखने के लिए उपलब्ध है।
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