नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (ईरान-इजराइल तनाव) में जारी संघर्ष और वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल के बीच भारत सरकार ने नागरिकों से संसाधनों के संरक्षण की अपील तेज कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रविवार को की गई ‘सात अपीलों’ का समर्थन करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को स्पष्ट किया कि इस संकट का समाधान फिलहाल जल्द होता नजर नहीं आ रहा है।
केंद्रीय मंत्री का बयान: ‘शांति अभी दूर की कौड़ी’
एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दुनिया इस समय एक बेहद कठिन दौर से गुजर रही है।
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वैश्विक असर: उन्होंने कहा, “भले ही भारत इस संकट के लिए जिम्मेदार नहीं है, लेकिन इसके आर्थिक परिणाम हमारे ऊपर भी पड़ रहे हैं। पश्चिम एशिया में युद्धविराम अभी दूर की बात लग रही है।”
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नागरिक कर्तव्य: मंत्री ने भारतीयों से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री की अपील को गंभीरता से लें और अपने दैनिक जीवन व व्यवसायों में तेल व ऊर्जा की बचत के लिए हर संभव प्रयास करें।
पीएम मोदी की वो ‘7 अपील’ जिन पर सरकार दे रही जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद की रैली में देशवासियों से ‘राष्ट्रभक्ति’ के आधार पर कुछ सख्त लेकिन जरूरी कदम उठाने का आह्वान किया था। सरकार चाहती है कि नागरिक स्वेच्छा से निम्नलिखित कार्यों में सहयोग करें:
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ईंधन की बचत: निजी वाहनों के बजाय मेट्रो, बस और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें।
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वर्क फ्रॉम होम (WFH): जहां भी संभव हो, कार्यालयों और व्यवसायों में घर से काम करने की संस्कृति को बढ़ावा दें ताकि सड़कों पर ट्रैफिक और तेल की खपत कम हो।
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सोना खरीदने पर रोक: पीएम ने अपील की कि कम से कम एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचें, क्योंकि इससे भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) बाहर जाती है।
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विदेशी यात्रा टालें: विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए कम से कम एक साल तक विदेश पर्यटन की योजना टाल दें और भारत के ही पर्यटन स्थलों को चुनें।
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स्वदेशी उत्पादों का उपयोग: ‘लोकल फॉर वोकल’ को अपनाकर आयात पर निर्भरता कम करें।
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ऊर्जा संरक्षण: घरों और दफ्तरों में बिजली की अनावश्यक खपत को रोकें।
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खाद्य तेल की बचत: आयातित खाद्य तेलों के उपयोग में मितव्ययिता बरतें।
क्यों जरूरी हैं ये कदम?
सरकारी आंकड़ों और विशेषज्ञों के अनुसार:
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विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves): कच्चे तेल और सोने के आयात पर भारत का सबसे ज्यादा पैसा खर्च होता है। युद्ध की स्थिति में तेल की कीमतें बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है।
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ऊर्जा सुरक्षा: होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक रास्तों में व्यवधान से भारत की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
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