केजीएमयू के डॉक्टरों ने फिर रचा इतिहास, तीन साल के मासूम को दी नई जिंदगी

उत्तर प्रदेश की चिकित्सा राजधानी कहे जाने वाले लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के डॉक्टरों ने अपनी असाधारण प्रतिभा और चिकित्सीय कौशल का लोहा एक बार फिर मनवाया है। केजीएमयू के विशेषज्ञों ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक और दुर्लभ सफलता हासिल करते हुए मात्र तीन साल के एक छोटे से बच्चे के जबड़े में पनप रहे बेहद खतरनाक और विशाल ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया है। यह मामला सिर्फ एक सर्जरी की सफलता भर नहीं है, बल्कि उस गरीब परिवार की उम्मीदों की जीत है जो देश के कई बड़े अस्पतालों और शहरों में चक्कर काटने के बाद हार चुका था। इस जटिल और जोखिम भरी सर्जरी को अंजाम देकर केजीएमयू के डॉक्टरों ने साबित कर दिया है कि संस्थान के चिकित्सा विशेषज्ञ गंभीर से गंभीर और असाध्य मामलों में भी मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।

इस पूरे मामले की शुरुआत कुछ महीने पहले उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से हुई थी। पीड़ित परिवार के अनुसार, उनका तीन वर्षीय मासूम बेटा रोजाना की तरह घर के आंगन में खेल रहा था। खेलते-खेलते अचानक उसका संतुलन बिगड़ा और वह जमीन पर गिर गया, जिससे उसके चेहरे और जबड़े के हिस्से पर गंभीर चोट आई। शुरुआत में परिवारवालों को लगा कि यह सामान्य चोट है जो समय के साथ ठीक हो जाएगी। उन्होंने स्थानीय स्तर पर मरहम-पट्टी कराई और घरेलू उपचार किया। लेकिन वक्त बीतने के साथ बच्चे के चेहरे में एक अजीब सी सूजन उभरने लगी। धीरे-धीरे यह सूजन सामान्य चोट के घाव की तरह ठीक होने के बजाय लगातार बढ़ने लगी और देखते ही देखते बच्चे के दाहिने निचले जबड़े का आकार विकृत होने लगा। जब सूजन असहनीय हो गई और बच्चे को खाने-पीने व सांस लेने में भी दिक्कत महसूस होने लगी, तब परिजन उसे लेकर हमीरपुर के जिला अस्पताल पहुंचे।

हमीरपुर जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने जब बच्चे की स्थिति और उसके जबड़े में तेजी से बढ़ रहे असामान्य उभार को देखा, तो उनके हाथ-पांव फूल गए। इतनी कम उम्र के बच्चे के जबड़े में इतने बड़े आकार का ट्यूमर विकसित हो जाना स्थानीय स्तर पर इलाज के दायरे से बाहर था। डॉक्टरों ने फौरन बच्चे को किसी उच्च चिकित्सा संस्थान (हायर सेंटर) में ले जाने की सलाह दी। इसके बाद शुरू हुआ एक गरीब परिवार का दर्दनाक संघर्ष। माता-पिता अपने कलेजे के टुकड़े को लेकर उत्तर प्रदेश के कई अलग-अलग शहरों और निजी अस्पतालों के चक्कर काटते रहे। हर जगह डॉक्टरों ने कम उम्र और ट्यूमर की जटिलता का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए या फिर इलाज का ऐसा भारी-भरकम खर्च बताया जिसे चुकाना इस परिवार के वश में नहीं था। निराशा के इस अंधेरे में जब चारों तरफ से रास्ते बंद नजर आने लगे, तब किसी ने उन्हें लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) जाने की सलाह दी। परिवार ने अपनी आखिरी उम्मीद के साथ 21 अक्टूबर को केजीएमयू का रुख किया।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी (OMFS) विभाग में जब बच्चे को भर्ती कराया गया, तो चिकित्सकों ने उसकी गहन जांच शुरू की। शुरुआती क्लिनिकल एग्जामिनेशन और सीटी स्कैन तथा एमआरआई जैसी आधुनिक जांचों में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। डॉक्टरों ने पाया कि बच्चे के निचले जबड़े के दाहिने हिस्से में लगभग 9 गुना 8.5 सेंटीमीटर (9×8.5 cm) का एक विशालकाय ट्यूमर विकसित हो चुका था। तीन साल के एक दुबले-पतले और मासूम बच्चे के शरीर के अनुपात में इतने बड़े ट्यूमर का होना अपने आप में एक अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा स्थिति थी। ट्यूमर के कारण बच्चे का जबड़ा बुरी तरह प्रभावित हो चुका था और उसके चेहरे की बनावट भी बिगड़ने लगी थी। केजीएमयू के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, इतनी कम उम्र में इस आकार का ट्यूमर न केवल बच्चे की श्वास नली को प्रभावित कर सकता था, बल्कि सर्जरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होने का भी तगड़ा जोखिम था। ऐसे में बिना किसी देरी के एक पुख्ता सर्जिकल रणनीति तैयार की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए केजीएमयू प्रशासन ने तत्काल एक उच्चस्तरीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया। 26 अक्टूबर को इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को अंजाम देने के लिए ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. हरि राम के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक विशेष टीम बनाई गई। इस सर्जरी में बाल चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जे. डी. रावत और डॉ. आनंद पांडे ने भी सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी निभाई। दोनों विभागों के वरिष्ठ और युवा चिकित्सकों का यह संयुक्त प्रयास चिकित्सा जगत में टीम वर्क का बेहतरीन उदाहरण बना। सर्जिकल टीम में सीनियर रेजिडेंट्स के तौर पर डॉ. पूनम, डॉ. भावना और डॉ. अपेक्षा ने अहम जिम्मेदारी संभाली, जबकि जूनियर रेजिडेंट्स डॉ. अभिनव, डॉ. अनिका और डॉ. शफीक ने ऑपरेशन के दौरान हरसंभव चिकित्सीय सहयोग प्रदान किया। घंटों चली इस बेहद नाज़ुक और जटिल सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने अपनी बारीक कला का प्रदर्शन करते हुए बच्चे के जबड़े से स्वस्थ ऊतकों को बचाते हुए उस 9 सेंटीमीटर के भयानक ट्यूमर को पूरी तरह से काट कर बाहर निकाल लिया।

किसी भी मेजर सर्जरी में जितना महत्व सर्जन का होता है, उतना ही बड़ा योगदान एनेस्थीसिया (निश्चेतना) टीम का भी माना जाता है। तीन साल के बच्चे पर इतनी बड़ी सर्जरी करना एनेस्थीसिया विशेषज्ञों के लिए भी किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व प्रोफेसर डॉ. प्रेम राज ने किया, जिसमें उनके साथ डॉ. दीपाली, डॉ. अनुष्का और डॉ. एंजेल ने बेहद सतर्कता के साथ बच्चे के शरीर में रक्तचाप और ऑक्सीजन के स्तर को नियंत्रित रखा। ऑपरेशन थियेटर में माया राजपूत, रामदेव, नंद लाल, राकेश और अरविंद जैसे कुशल पैरामेडिकल स्टाफ ने भी पूरी तन्मयता से अपना सहयोग दिया। सफल सर्जरी के तुरंत बाद मरीज को किसी भी तरह के संक्रमण या पोस्ट-ऑपरेटिव कॉम्प्लिकेशन से बचाने के लिए पीडियाट्रिक्स विभाग के आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। वर्तमान में बच्चे की देखरेख बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज आनंद की कड़ी निगरानी में की जा रही है। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, बच्चा तेजी से रिकवर कर रहा है और उसकी हालत पूरी तरह स्थिर बनी हुई है।

इस सफल घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों में होने वाली शारीरिक अनियमिताओं और चोटों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। अक्सर बच्चे खेलते समय गिर जाते हैं और साधारण सूजन समझकर अभिभावक उसकी अनदेखी कर देते हैं, जो बाद में गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती है। जबड़े के ट्यूमर या सिस्ट शुरुआती दौर में सामान्य सूजन या दर्द के रूप में उभरते हैं, लेकिन यदि सूजन कुछ हफ्तों से ज्यादा समय तक बनी रहे और उसका आकार लगातार बढ़ता जाए, तो तुरंत किसी योग्य मैक्सिलोफेशियल सर्जन या बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। केजीएमयू की इस ऐतिहासिक सफलता ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश के सरकारी चिकित्सा संस्थानों की क्षमता का डंका बजा दिया है। गरीब और असहाय मरीजों के लिए केजीएमयू उम्मीद की एक मजबूत किरण बनकर उभर रहा है, जहां अत्याधुनिक तकनीक और अनुभवी डॉक्टरों के बलबूते पर नामुमकिन दिखने वाली जटिल सर्जरी भी पूरी सफलता के साथ संपन्न की जा रही हैं।

Check Also

दीपावली-छठ पर घर जाने वालों को रेलवे की बड़ी सौगात: यूपी के रास्ते दौड़ेंगी पुणे और खातीपुरा की दो स्पेशल ट्रेनें

दीपावली, धनतेरस, गोवर्धन पूजा और पूर्वांचल व बिहार के सबसे बड़े लोक आस्था के महापर्व …