गर्दन के पीछे निकल आया है भद्दा कूबड़? रोज करें ये 3 आसान एक्सरसाइज, सीधा हो जाएगा पोस्चर और गायब होगा दर्द

आधुनिक डिजिटल जीवनशैली में घंटों झुककर स्मार्टफोन स्क्रॉल करना, लैपटॉप पर गलत पॉस्चर में काम करना और बिना सहारे के सोफे पर लेटे रहना अब आम बात हो गई है। इसका सबसे खतरनाक दुष्प्रभाव हमारी रीढ़ की हड्डी और गर्दन पर पड़ रहा है। कई लोगों के गर्दन के पिछले हिस्से में, जहां गर्दन और पीठ का जोड़ होता है, एक असामान्य उभार या गांठ जैसा कूबड़ नजर आने लगता है। मेडिकल भाषा में इसे ‘डोवेजर हंप’ (Dowager’s Hump) या काइफोसिस (Kyphosis) कहा जाता है। आम बोलचाल में इसे ‘बफेलो हंप’ भी कहते हैं। जब हम लगातार गर्दन आगे झुकाए रखते हैं, तो हमारे सर्वाइकल स्पाइन (C7 वर्टिब्रा) पर सिर का वजन कई गुना बढ़ जाता है। इस अतिरिक्त खिंचाव को झेलने के लिए शरीर वहां अतिरिक्त फैट और मांसपेशियों के टिश्यूज जमा करने लगता है, जिससे वह हिस्सा बाहर उभर आता है। यह न सिर्फ दिखने में भद्दा लगता है, बल्कि गंभीर सर्वाइकल पेन, कंधों में अकड़न और सिरदर्द का कारण भी बनता है। अच्छी बात यह है कि शुरुआत में ही नियमित स्ट्रेचिंग और एक्सरसाइज से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

1. चिन टक (Chin Tucks): सर्वाइकल स्पाइन को सही सीध में लाने की सबसे कारगर एक्सरसाइज

चिन टक एक्सरसाइज गर्दन के आगे झुके हुए हिस्से (फॉरवर्ड हेड पोस्चर) को प्राकृतिक स्थिति में वापस लाने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट्स की पहली पसंद है। यह गर्दन की गहरी फ्लेक्सर मांसपेशियों को मजबूत करती है और पिछले हिस्से की अकड़न को खत्म करती है। इसे करने के लिए सबसे पहले अपनी पीठ और गर्दन को बिल्कुल सीधा करके बैठें या सीधे खड़े हो जाएं। अपने कंधे बिल्कुल ढीले रखें। अब अपनी नजर सामने की दीवार पर सीधी रखें और अपनी ठुड्डी (Chin) को धीरे-धीरे पीछे की तरफ इस तरह खींचें जैसे आप ‘डबल चिन’ बना रहे हों। ध्यान रहे कि सिर को ऊपर या नीचे नहीं झुकाना है, बल्कि सिर को सीधे पीछे की ओर स्लाइड करना है। इस स्थिति में 5 सेकंड तक रुकें, जिससे गर्दन के पिछले हिस्से में हल्का खिंचाव महसूस होगा। इसके बाद धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं। इस प्रक्रिया को दिन में 10 से 12 बार दोहराएं। ऑफिस की कुर्सी पर बैठे-बैठे भी इसे आसानी से किया जा सकता है।

2. वॉल एंजेल (Wall Angels): छाती और कंधों की जकड़न खोलकर कूबड़ दबाने का बेहतरीन तरीका

कूबड़ उभरने का एक बड़ा कारण छाती की पेक्टोरल मांसपेशियों का सिकुड़ जाना और पीठ के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों का कमजोर पड़ जाना होता है। ‘वॉल एंजेल’ एक्सरसाइज रीढ़ की हड्डी के कर्व को सीधा करने और कंधों को पीछे खींचने में रामबाण मानी जाती है। इसे करने के लिए किसी समतल दीवार के सहारे अपनी पीठ लगाकर खड़े हो जाएं। आपकी एड़ी, हिप्स, ऊपरी पीठ और सिर का पिछला हिस्सा दीवार से छूना चाहिए। अब अपनी दोनों बाहों को दीवार से सटाकर कोहनी से 90 डिग्री के कोण पर मोड़ें, जैसे आप ‘W’ आकार बना रहे हों। आपकी हथेलियां और कोहनियां भी दीवार से टिकी रहनी चाहिए। अब बहुत धीरे-धीरे दोनों हाथों को दीवार से सटाते हुए ऊपर की ओर ‘Y’ आकार में ले जाएं और फिर वापस नीचे लाएं। पूरे मूवमेंट के दौरान पीठ और हाथ दीवार से अलग नहीं होने चाहिए। इसे 10 से 15 बार के 2 सेट में रोजाना करें। इससे पीठ की मांसपेशियां सक्रिय होंगी और कूबड़ का दबाव कम होगा।

3. कोबरा स्ट्रेच और डोरवे चेस्ट स्ट्रेच: रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन के लिए अचूक व्यायाम

तीसरी बेहद असरदार कसरत है भुजंगासन यानी कोबरा स्ट्रेच और दरवाजे के सहारे चेस्ट स्ट्रेच करना। कोबरा स्ट्रेच करने के लिए पेट के बल फर्श पर लेट जाएं और हथेलियों को कंधों के पास रखें। गहरी सांस लेते हुए छाती और गर्दन को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और नजरें थोड़ी ऊपर की ओर रखें। 15 से 20 सेकंड तक इस स्थिति में रहें और सामान्य सांस लें, फिर धीरे-धीरे नीचे आएं। यह रीढ़ के ऊपरी हिस्से के कर्वेचर को उलटकर सीधा करता है। इसके साथ ही ‘डोरवे स्ट्रेच’ करें, जिसमें किसी दरवाजे के फ्रेम में खड़े होकर अपनी दोनों कोहनियों को चौखट पर रखें और शरीर को हल्का सा आगे की ओर धकेलें। इससे छाती और कंधों का अगला हिस्सा पूरी तरह स्ट्रेच हो जाता है। ये दोनों एक्सरसाइज रोजाना करने से ऊपरी पीठ में जमा हुआ फैटी टिशू धीरे-धीरे पिघलने लगता है और रीढ़ की हड्डी अपनी प्राकृतिक ‘S’ आकार की मुद्रा में लौटने लगती है।

स्क्रीन टाइम सुधारें और तकिए का सही चयन करें: दोबारा उभार न बनने देने के जरूरी नियम

सिर्फ एक्सरसाइज करना काफी नहीं है, बल्कि उन गलतियों को सुधारना भी जरूरी है जिनकी वजह से यह कूबड़ बनता है। मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते समय फोन को छाती के बजाय अपनी आंखों के लेवल पर ऊपर उठाकर रखें, ताकि गर्दन को 45 से 60 डिग्री नीचे न झुकाना पड़े। लैपटॉप या कंप्यूटर पर काम करते समय एक अलग कीबोर्ड और लैपटॉप स्टैंड का उपयोग करें जिससे स्क्रीन आपकी आंखों के ठीक सामने रहे। हर 45 मिनट के बाद 2 मिनट का ब्रेक लें और कंधों को पीछे की ओर घुमाएं। इसके अलावा सोते समय बहुत ऊंचा या मोटा तकिया लगाने से बचें। बहुत मोटा तकिया पूरी रात गर्दन को आगे की तरफ मोड़े रखता है, जिससे कूबड़ तेजी से बढ़ता है। एक पतला ऑर्थोपेडिक या मेमोरी फोम पिलो चुनें जो गर्दन के नेचुरल कर्व को सहारा दे। यदि कूबड़ बहुत सख्त हो चुका है या हाथों में सुन्नपन महसूस होता है, तो ऑर्थोपेडिक डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से जांच अवश्य कराएं।

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