जानिए किन एक्सरसाइज से रहता है दिल के दौरे का सबसे बड़ा खतरा और बचाव की जरूरी सावधानियां

शारीरिक रूप से सक्रिय रहना और नियमित व्यायाम करना हृदय स्वास्थ्य को मजबूत बनाने, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखने और लंबी उम्र पाने का सबसे बेहतरीन तरीका माना जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जिम में वर्कआउट करते समय, रनिंग ट्रैक पर दौड़ते वक्त या स्पोर्ट्स एक्टिविटी के दौरान अचानक हार्ट अटैक और सडन कार्डियक अरेस्ट (SCA) से होने वाली मौतों के मामलों ने हर किसी को हैरान और चिंतित कर दिया है। 25 से 45 वर्ष की युवा और फिट दिखने वाली आबादी में वर्कआउट के दौरान अचानक जान जाने की घटनाएं लगातार सुर्खियों में हैं।

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि एक्सरसाइज करना हमेशा सुरक्षित ही होता है, लेकिन हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiologists) का कहना है कि जब कोई व्यक्ति अपनी शारीरिक क्षमता का आकलन किए बिना, बिना किसी मेडिकल जांच के या गलत तकनीक के साथ अत्यधिक तीव्र (High-Intensity) एक्सरसाइज करता है, तो दिल की धमनियों पर जानलेवा दबाव पड़ता है। यदि व्यक्ति की रक्त वाहिकाओं में पहले से कोई छुपा हुआ ब्लॉकेज (Silent Blockage) या दिल की मांसपेशियों में कोई जन्मजात विकार है, तो अनियंत्रित वर्कआउट सीधे हार्ट अटैक का ट्रिगर बन जाता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि किस तरह की एक्सरसाइज दिल के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं और इनसे बचने के क्या उपाय हैं।

गलत एक्सरसाइज और अनकंट्रोल्ड वर्कआउट: जानिए कौन सी 5 एक्सरसाइज दिल पर डालती हैं जानलेवा दबाव

हर व्यक्ति के दिल की कार्यक्षमता और रक्त संचार का स्तर अलग होता है। बिना तैयारी और अत्यधिक आक्रामकता के साथ की जाने वाली ये 5 एक्सरसाइज दिल के लिए सबसे बड़ा जोखिम पैदा करती हैं:

  • अचानक अत्यधिक हेवी वेट लिफ्टिंग (Extreme Powerlifting & Valsalva Maneuver): जब कोई व्यक्ति अपनी क्षमता से अधिक भारी वजन उठाता है और सांस रोककर जोर लगाता है (जिसे मेडिकल भाषा में वलसाल्वा मैन्यूवर कहा जाता है), तो शरीर का सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर अचानक 120 से बढ़कर 250 से 300 mmHg तक पहुंच सकता है। ब्लड प्रेशर में आया यह अप्रत्याशित उछाल दिल की कोरोनरी धमनियों में मौजूद फैट के जमाव (Atherosclerotic Plaque) को फाड़ सकता है, जिससे सेकंडों में खून का थक्का जम जाता है और मैसिव हार्ट अटैक आ जाता है।

  • बिना कंडीशनिंग के अनकंट्रोल्ड एचआईआईटी (Extreme HIIT & Crossfit): हाई-इंटेन्सिटी इंटरवल ट्रेनिंग दिल के लिए तभी अच्छी है जब शरीर धीरे-धीरे इसके अनुकूल बना हो। जो लोग कई महीनों तक गतिहीन (Sedentary) जीवनशैली जीने के बाद अचानक पहले ही दिन से 100 मीटर की फुल-स्पीड स्प्रिंट, बर्पीज या क्रॉसफिट जैसी आक्रामक एक्सरसाइज शुरू कर देते हैं, उनके दिल की धड़कन (Heart Rate) खतरनाक स्तर (200+ बीट्स प्रति मिनट) तक पहुंच जाती है, जिससे दिल की लय बिगड़ जाती है (Arrhythmia)।

  • अल्ट्रा-एंड्योरेंस रनिंग और बिना ट्रेनिंग मैराथन: बिना 6 से 8 महीने के सुनियोजित प्रशिक्षण के हाफ-मैराथन या फुल मैराथन जैसी 21 से 42 किलोमीटर की दौड़ में भाग लेना हृदय की मांसपेशियों को अत्यधिक थका देता है। लंबे समय तक दिल पर पड़ने वाले इस तनाव से मायोकार्डियल डैमेज होता है और खून में कार्डियक एंजाइम ‘ट्रोपोनिन’ का स्तर बढ़ जाता है, जो दिल की विफलता का कारण बनता है।

  • कड़ाके की ठंड या अत्यधिक उमस में आउटडोर एक्सरसाइज: सर्दियों के मौसम में सुबह-सुबह अत्यधिक ठंड में तेज दौड़ने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ (Vasoconstriction) जाती हैं, जिससे दिल को खून पंप करने के लिए दोगुना जोर लगाना पड़ता है। वहीं अत्यधिक उमस और गर्मी में बिना पानी पिए इंटेंस वर्कआउट करने से डिहाइड्रेशन होता है, खून गाढ़ा हो जाता है और इलेक्ट्रोलाइट्स (पोटेशियम और सोडियम) का संतुलन बिगड़ने से दिल की धड़कन अचानक रुक सकती है।

  • स्टेरॉयड्स और हाई-कैफीन प्री-वर्कआउट ड्रिंक्स के साथ वर्कआउट: कई युवा जिम में ज्यादा वजन उठाने और जल्दी बॉडी बनाने के लिए एनाबॉलिक स्टेरॉयड्स, फैट बर्नर्स और अत्यधिक कैफीन युक्त ‘प्री-वर्कआउट’ पाउडर का सेवन करते हैं। ये सप्लीमेंट्स दिल की धमनियों में अचानक ऐंठन (Coronary Vasospasm) पैदा करते हैं और हृदय गति को अनियंत्रित कर अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण बनते हैं।

वर्कआउट के दौरान हार्ट अटैक आने का वैज्ञानिक कारण: प्लाक रप्चर और अचानक धड़कन का अनियंत्रित होना

व्यायाम के दौरान दिल का दौरा पड़ने के पीछे दो मुख्य जैविक और पैथोलॉजिकल कारण काम करते हैं:

  • प्लाक का फटना (Plaque Rupture): खराब खान-पान, तनाव, धूम्रपान या जेनेटिक्स के कारण धमनियों की दीवारों पर कोलेस्ट्रॉल की एक नरम परत (सॉफ्ट प्लाक) जमी होती है। यह प्लाक कई बार 20 से 40 प्रतिशत ही होता है, इसलिए सामान्य दिनों में इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन जब व्यक्ति अचानक अत्यधिक भारी एक्सरसाइज करता है, तो खून के तेज बहाव और हाई बीपी के घर्षण से यह नाजुक परत फट जाती है। शरीर इसे घाव समझकर तुरंत वहां प्लेटलेट्स भेजता है, जिससे रक्त का थक्का (Blood Clot) बनकर धमनी को 100% ब्लॉक कर देता है।

  • वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन (Ventricular Fibrillation): हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (दिल की मांसपेशियों का असामान्य रूप से मोटा होना) जैसी जन्मजात बीमारियों से पीड़ित युवाओं में जब इंटेंस वर्कआउट के दौरान एड्रेनालाईन हार्मोन की बाढ़ आती है, तो दिल का निचला हिस्सा खून पंप करने के बजाय तेजी से कांपने लगता है। इसे वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन कहते हैं, जिसमें 3 से 5 मिनट के भीतर सीपीआर (CPR) या डीफिब्रिलेटर न मिलने पर व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।

जिम में वर्कआउट के दौरान इन 5 ‘रेड फ्लैग’ लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज

व्यायाम करते समय शरीर कई तरह के चेतावनी भरे संकेत देता है। यदि वर्कआउट के दौरान निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो एक्सरसाइज तुरंत रोक दें और जमीन पर बैठ जाएं:

  • सीने में जकड़न या भारीपन: छाती के बीचों-बीच ऐसा महसूस होना मानो किसी ने भारी पत्थर रख दिया हो या सीने में तेज जलन और निचोड़ने जैसा दर्द होना।

  • दर्द का फैलना: सीने से शुरू होकर दर्द का बाएं कंधे, बांह, गर्दन, जबड़े, दांतों या पीठ के ऊपरी हिस्से तक जाना।

  • सांस का असामान्य रूप से फूलना: वर्कआउट की तीव्रता की तुलना में अत्यधिक हांफना और गहरी सांस लेने में असमर्थ होना।

  • अचानक चक्कर आना या आंखों के आगे अंधेरा छाना: सिर घूमना, संतुलन बिगड़ना, अत्यधिक ठंडा पसीना आना या बेहोशी (Syncope) जैसा महसूस होना।

  • अनियमित और तेज धड़कन (Palpitations): ऐसा महसूस होना कि दिल छाती से बाहर आ जाएगा या धड़कन की लय का अचानक मिस होना।

35 की उम्र के बाद जिम या इंटेंस वर्कआउट शुरू करने से पहले जरूरी मेडिकल टेस्ट

यदि आपकी उम्र 30 से 35 वर्ष से अधिक है या आप लंबे समय बाद दोबारा जिम, रनिंग या कोई भारी स्पोर्ट्स एक्टिविटी शुरू करने जा रहे हैं, तो सीधे वर्कआउट शुरू करने के बजाय अपने फिजिशियन या कार्डियोलॉजिस्ट से मिलकर ये बुनियादी टेस्ट जरूर करवाएं:

  • लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Lipid Profile): शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL), ट्राइग्लिसराइड्स और गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) का स्तर जांचने के लिए।

  • रेस्टिंग ईसीजी (ECG) और 2D इकोकार्डियोग्राफी (Echo): दिल की धड़कन की लय, वॉल्व्स की कार्यप्रणाली और हृदय की मांसपेशियों की मोटाई का सटीक पता लगाने के लिए।

  • ट्रेडमिल टेस्ट (TMT / Stress Test): यह सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट है, जिससे यह पता चलता है कि जब आप दौड़ते हैं या दिल पर दबाव पड़ता है, तो हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त खून मिल रहा है या नहीं।

  • ब्लड प्रेशर और एचबीए1सी (HbA1c): डायबिटीज और उच्च रक्तचाप की शुरुआती पहचान के लिए।

  • कोरोनरी सीटी एंजियोग्राफी (यदि डॉक्टर सलाह दें): यदि परिवार में किसी को कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास रहा हो, तो धमनियों में कैल्शियम और सॉफ्ट ब्लॉकेज की जांच के लिए।

सुरक्षित और हार्ट-फ्रेंडली वर्कआउट के 5 अचूक नियम: कार्डियोलॉजिस्ट्स की खास एडवाइजरी

व्यायाम से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसे सुरक्षित तरीके से अपनी दिनचर्या में शामिल करना ही बुद्धिमानी है। सुरक्षित वर्कआउट के लिए इन नियमों का पालन करें:

  • 10 से 15 मिनट का वार्म-अप और कूल-डाउन अनिवार्य: कभी भी जिम में घुसते ही भारी वजन न उठाएं और न ही ट्रेडमिल पर तेज दौड़ें। पहले 10 मिनट हल्की स्ट्रेचिंग, वॉकिंग और जॉगिंग से दिल को तैयार करें। वर्कआउट खत्म होने के बाद 5 से 10 मिनट कूल-डाउन करें ताकि हार्ट रेट धीरे-धीरे सामान्य हो।

  • टारगेट हार्ट रेट जोन का पालन करें: वर्कआउट के दौरान अपनी अधिकतम हृदय गति की सीमा तय करें। अधिकतम हार्ट रेट निकालने का फॉर्मूला है (220 – आपकी उम्र)। मध्यम इंटेंसिटी वर्कआउट के दौरान आपकी हार्ट रेट इस सीमा के 60 से 75 प्रतिशत के बीच ही रहनी चाहिए।

  • ‘प्रोग्रेसिव ओवरलोड’ का सिद्धांत अपनाएं: एक ही दिन में अपनी सीमाएं पार करने की कोशिश न करें। हर हफ्ते केवल 5 से 10 प्रतिशत की दर से वजन या रनिंग की दूरी बढ़ाएं।

  • उचित ब्रीदिंग तकनीक (सांस न रोकें): वेट लिफ्टिंग करते समय जोर लगाते वक्त सांस छोड़ें (Exhale) और वजन नीचे लाते समय सांस लें (Inhale)। कभी भी सांस रोककर लोड न उठाएं।

  • हाइड्रेशन और रिकवरी का ध्यान रखें: वर्कआउट के बीच-बीच में घूंट-घूंट करके पानी पिएं। सप्ताह में कम से कम 1 से 2 दिन का रेस्ट (आराम) लें और रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद सुनिश्चित करें, क्योंकि मांसपेशियों और दिल की रिकवरी केवल नींद के दौरान ही होती है।

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