
तमिलनाडु के सियासी गलियारों में उस वक्त बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया जब अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (TVK) के विधायकों को पाला बदलने के लिए 60 से 70 करोड़ रुपये तक की भारी-भरकम रिश्वत की पेशकश किए जाने का दावा किया गया। राज्य के कानून और बिजली मंत्री सी. निर्मल कुमार ने सार्वजनिक तौर पर यह सनसनीखेज आरोप लगाते हुए विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है। मंत्री का सीधा दावा है कि राज्य की स्थापित राजनीतिक पार्टियां टीवीके के नवनिर्वाचित विधायकों पर डोरे डालकर सरकार को अस्थिर करने और विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) की गहरी साजिश रच रही हैं।
मंत्री निर्मल कुमार का सीधा वार: 60 से 70 करोड़ रुपये के लालच का पर्दाफाश
कैबिनेट मंत्री निर्मल कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया ब्रीफिंग के दौरान आरोप लगाया कि चुनावी नतीजों के बाद से ही विरोधी दल टीवीके विधायकों से गुप्त रूप से संपर्क साधने की जुगत में लगे हैं। मंत्री ने दावा किया कि उनके विधायकों को सरकार के खिलाफ बगावत करने, अविश्वास प्रस्ताव के दौरान क्रॉस-वोटिंग करने अथवा विधायकी से इस्तीफा देने के एवज में 60 करोड़ रुपये से लेकर 70 करोड़ रुपये तक के लुभावने ऑफर दिए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे सियासी खेल के तार सीधे तौर पर डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) से जुड़े नेताओं से मिल रहे हैं।
पुलिस कार्रवाई और संदिग्धों की गिरफ्तारी का दिया हवाला
मंत्री निर्मल कुमार ने केवल मौखिक आरोप लगाने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इस मामले में हुई कानूनी कार्रवाई का भी हवाला दिया। उन्होंने बताया कि विधायकों को मिली धमकियों और रिश्वत की कॉल्स के संबंध में पुलिस में औपचारिक शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, जिसके बाद पुलिस ने करूर और चेन्नई सहित कई स्थानों पर छापेमारी कर कई बिचौलियों और संदिग्धों को पहले भी गिरफ्तार किया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि विधायकों के पास इन ऑफर्स और कॉल रिकॉर्ड्स के पुख्ता डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें जांच एजेंसियों को सौंपा जा चुका है।
टीवीके विधायकों ने भी ठोका दावा: ‘100 करोड़ भी मिले तो नहीं डिगेगी निष्ठा’
मंत्री के बयान के साथ ही टीवीके के अन्य विधायकों ने भी सामने आकर खरीद-फरोख्त की कोशिशों की पुष्टि की है। विधायक मुस्तफा और अन्य जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि उन्हें विधानसभा में फ्लोर टेस्ट या महत्वपूर्ण मुद्दों पर पार्टी लाइन के खिलाफ वोट डालने के लिए करोड़ों रुपये का प्रलोभन दिया गया। विधायकों ने दो टूक शब्दों में कहा कि विजय के नेतृत्व और उनके भ्रष्टाचार विरोधी सिद्धांतों के प्रति उनकी निष्ठा अटूट है, और यदि उन्हें 100 करोड़ रुपये का भी ऑफर दिया जाए तो भी पार्टी का कोई विधायक अपनी अंतरात्मा और जनता के जनादेश से सौदा नहीं करेगा।
डीएमके और एआईएडीएमके ने आरोपों को बताया ‘पब्लिसिटी स्टंट’
करोड़ों रुपये की खरीद-फरोख्त के इन गंभीर आरोपों पर विपक्षी दलों ने तीखा पलटवार किया है। डीएमके प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने इन दावों को पूरी तरह बेबुनियाद, हास्यास्पद और मनगढ़ंत करार दिया। विपक्ष का कहना है कि टीवीके नेता मीडिया का ध्यान आकर्षित करने, सनसनी फैलाने और अपनी कमजोर प्रशासनिक पकड़ से ध्यान भटकाने के लिए इस प्रकार की ‘विक्टिम कार्ड’ और पब्लिसिटी की राजनीति कर रहे हैं। डीएमके ने चुनौती दी है कि यदि आरोपों में तनिक भी सच्चाई है तो नेता हवा-हवाई बयानों के बजाय सार्वजनिक रूप से ठोस कानूनी दस्तावेज पेश करें।
2026 विधानसभा चुनाव के बाद तमिलनाडु में सत्ता का नया समीकरण
तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में शुमार थलपति विजय द्वारा तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के गठन और चुनावी मैदान में उतरने के बाद से ही तमिलनाडु का पारंपरिक द्विदलीय राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। दशकों से राज्य की सत्ता पर काबिज रहीं द्रविड़ पार्टियां टीवीके के तेजी से बढ़ते जनाधार को अपने वजूद के लिए सीधी चुनौती मान रही हैं। विधायकों को ₹70 करोड़ के ऑफर के इस ताजा विवाद ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की सियासत में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच यह टकराव और ज्यादा आक्रामक रूप लेने वाला है।
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