‘मोदी जी तो बाद में, हमारा युवा मोर्चा अध्यक्ष ही हरा देगा’: राहुल गांधी के डिबेट चैलेंज पर अमित शाह का करारा पलटवार

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमने-सामने खुली बहस (ओपन डिबेट) करने की सीधी चुनौती दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर तीखे शब्दों में पोस्ट साझा करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री विदेशी ताकतों और विदेशी सोशल मीडिया के प्रभाव के दम पर सत्ता में हैं। कांग्रेस नेता ने विदेशी रिश्तों, देश के वित्तीय तंत्र, अमेरिकी समझौतों, उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े मामलों और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े विवादों को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री में राजनीतिक साहस है, तो वे देश की जनता के सामने किसी भी मंच और किसी भी समय पर खुली बहस के लिए आगे आएं। राहुल गांधी ने तंज कसते हुए यह भी दावा किया कि उनके ऊपर दर्जनों मानहानि के मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन विदेशी संपर्कों के आरोपों पर सरकार कानूनी कदम उठाने से बच रही है।

अमित शाह का तीखा पलटवार: ‘मोदी जी तो दूर, युवा मोर्चा अध्यक्ष ही धूल चटा देगा’

राहुल गांधी के इस डिबेट चैलेंज पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हैदराबाद की जनसभा और छत्तीसगढ़ के मंच से बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया। अमित शाह ने दो टूक शब्दों में कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहस करने का ख्वाब देखना छोड़ देना चाहिए। गृह मंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि मोदी जी तो बहुत दूर की बात हैं, उनसे तो बाद में मिलना, राहुल गांधी को सार्वजनिक डिबेट में हराने के लिए भारतीय जनता पार्टी का एक सामान्य कार्यकर्ता और तेलंगाना युवा मोर्चा का अध्यक्ष ही काफी है। शाह के इस बयान के बाद चुनावी रैलियों में मौजूद कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की और राष्ट्रीय राजनीति में बयानबाजी का तापमान अचानक चरम पर पहुंच गया।

‘वेंटिलेटर पर पड़ी पार्टी मोदी जी के साथ मैराथन नहीं दौड़ सकती’

अमित शाह ने कांग्रेस के घटते जनाधार और चुनावी हार का हवाला देते हुए मुख्य विपक्षी दल पर तीखे राजनीतिक बाण चलाए। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी खुद राजनीतिक वेंटिलेटर पर अपनी अंतिम सांसें गिन रही है। गृह मंत्री ने सवाल उठाया कि क्या वेंटिलेटर पर संघर्ष कर रही कोई पार्टी प्रधानमंत्री मोदी जैसी अथक ऊर्जा और वैश्विक स्वीकार्यता वाले नेता के साथ विकास की मैराथन दौड़ सकती है? शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास न तो कोई ठोस जनहितकारी नीति है और न ही जनता के सामने रखने के लिए कोई सकारात्मक एजेंडा; यही कारण है कि चुनावी हार के बाद हताशा में कांग्रेस नेता केवल बेबुनियाद आरोप गढ़ने और भ्रामक मुद्दे उछालने का काम करते हैं।

स्पेशल सेशन की खुली चुनौती: ‘हिम्मत है तो संसद में आकर दो-दो हाथ करें’

सड़कों पर खुली बहस की मांग का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने राहुल गांधी को देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था यानी संसद के भीतर बहस करने की खुली चुनौती दी। अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार हर संवेदनशील मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने घोषणा की कि यदि विपक्ष में वाकई दम है, तो सरकार वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), ईवीएम (EVM) की विश्वसनीयता और सीमावर्ती इलाकों में अवैध घुसपैठ के गंभीर मुद्दों पर संसद का विशेष सत्र (Special Parliament Session) बुलाने के लिए भी तैयार है। शाह ने कहा कि राहुल गांधी संसद की कार्यवाही को बाधित करने और माइक बंद होने का रोना रोने के बजाय संसद के पटल पर आकर बहस करें, ताकि देश की जनता दूध का दूध और पानी का पानी खुद देख सके।

मॉक पार्लियामेंट पर बरसे गृह मंत्री: ‘संविधान हाथ में लेकर घूमने से कुछ नहीं होता’

विपक्ष द्वारा हाल ही में आयोजित ‘मॉक पार्लियामेंट’ (प्रतीकात्मक संसद) और ‘वोट बचाओ’ रैलियों को आड़े हाथों लेते हुए अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर का मखौल उड़ाया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ लाल रंग की संविधान की किताब हाथ में लेकर घूमने से कोई संविधान का रक्षक नहीं बन जाता; इसके लिए संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करना पड़ता है। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की ‘वोट बचाओ’ रैली असल में घुसपैठियों को बचाने की कवायद थी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब-जब देश की जनता कांग्रेस से हिसाब मांगती है, तब-तब ये लोग संस्थाओं पर हमला बोलकर अराजकता फैलाने की कोशिश करते हैं।

आगामी चुनावों और संसद सत्र से पहले आर-पार के मूड में दोनों दल

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे सहित कई शीर्ष नेताओं ने भी राहुल गांधी के बयान की तीखी आलोचना की और कहा कि शीर्ष स्तर की डिबेट्स परिपक्व राजनेताओं के बीच होती हैं। वहीं कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि सरकार असल जनहित के मुद्दों, वित्तीय संकट और महंगाई पर जवाब देने से डर रही है। गृह मंत्री अमित शाह और राहुल गांधी के बीच जुबानी जंग ने यह साफ कर दिया है कि आगामी संसद सत्र और विभिन्न राज्यों के आगामी चुनावों में ईवीएम, एसआईआर पुनरीक्षण, विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे सबसे बड़े सियासी अखाड़े बनने जा रहे हैं।

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