
देश के कई राज्यों में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विपक्ष के तीखे हमलों और सुप्रीम कोर्ट में चल रही बहसों के बीच भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक और बड़ा निर्णय लिया है। आयोग ने 6 और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण (Special Summary Revision w.r.t. 01.01.2027) की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है। विपक्षी दलों द्वारा मतदाता सूचियों में मनमाने ढंग से नाम काटे जाने और गैर-नागरिकों को शामिल किए जाने के आरोपों के बीच आयोग ने निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करने का संकल्प दोहराया है।
इन 6 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शुरू हुई पुनरीक्षण प्रक्रिया
केंद्रीय निर्वाचन आयोग के आधिकारिक निर्देशानुसार, इस नए चरण में पूर्वोत्तर और तटीय क्षेत्रों सहित 4 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है:
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ओडिशा (Odisha)
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अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh)
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मिजोरम (Mizoram)
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सिक्किम (Sikkim)
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चंडीगढ़ (Chandigarh)
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दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव (Dadra and Nagar Haveli & Daman and Diu)
इससे पहले आयोग ने देश के 17 बड़े राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर और पुनरीक्षण के निर्देश दिए थे, जबकि महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा और तेलंगाना जैसे राज्यों में समयसीमा को लेकर हाल ही में नए दिशा-निर्देश तय किए गए थे।
कब जारी होगा ड्राफ्ट और कब आएगी अंतिम मतदाता सूची?
चुनाव आयोग द्वारा घोषित आधिकारिक कार्यक्रम (Schedule) के अनुसार:
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एकीकृत ड्राफ्ट मतदाता सूची (Draft Electoral Rolls) का प्रकाशन: 30 नवंबर
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दावे और आपत्तियां (Claims and Objections) दर्ज करने की अवधि: ड्राफ्ट प्रकाशन के तुरंत बाद नागरिकों, राजनीतिक दलों और बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर्स) को नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा।
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अंतिम मतदाता सूची (Final Publication of Electoral Rolls) का प्रकाशन: 21 जनवरी
निर्वाचन आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिया है कि घर-घर सत्यापन (House-to-House survey) और दावों-आपत्तियों के निस्तारण के लिए पर्याप्त प्रशासनिक अमला और संसाधन तैनात किए जाएं।
गलत नाम विलोपन (Wrongful Deletion) रोकने के लिए कड़े सुरक्षा मानक
विपक्ष द्वारा बड़े पैमाने पर वोट काटे जाने के आरोपों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने इस बार सख्त सुरक्षा उपाय (Safeguards) लागू किए हैं। किसी भी पोलिंग स्टेशन पर यदि कुल वोटरों में से 2% से अधिक नाम हटाने (डिलीशन) के लिए फॉर्म-7 आते हैं, तो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) को खुद मौके पर जाकर व्यक्तिगत सत्यापन करना अनिवार्य होगा। साथ ही, किसी एक व्यक्ति द्वारा थोक में आपत्तियां दाखिल करने पर भी सख्त पाबंदी लगा दी गई है।
नागरिकों और पहली बार वोट करने वाले युवाओं के लिए विशेष अभियान
आयोग ने स्पष्ट किया है कि 1 जनवरी की अहर्ता तिथि के आधार पर 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले सभी नए व युवा मतदाताओं को फॉर्म-6 के जरिए वोटर लिस्ट में जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही जो पात्र नागरिक किसी कारणवश पूर्व-एसआईआर सूची से छूट गए थे, बीएलओ घर-घर जाकर उनका फॉर्म भरवाएंगे ताकि किसी भी वैध नागरिक का मताधिकार न छूटे।
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