
सिनेमाघरों में रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर जबर्दस्त कमाई कर रही और दर्शकों के दिलों पर छा जाने वाली निर्देशक नितेश तिवारी की भव्य फिल्म ‘रामायण’ (Ramayana) इन दिनों चारों तरफ चर्चा का विषय बनी हुई है। रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश के अभिनय से सजी इस महागाथा को दर्शकों और समीक्षकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। दो भागों में बनाई जा रही इस विशालकाय परियोजना के पहले भाग में रामायण के कई प्रसंगों को बेहद भव्यता और संवेदनशीलता के साथ स्क्रीन पर उतारा गया है। लेकिन इतनी लंबी अवधि और दो हिस्सों में बनने के बावजूद महाकाव्य रामायण के हर पात्र को सिनेमाई पर्दे पर जगह दे पाना निर्माताओं के लिए संभव नहीं हो सका। अब यह आधिकारिक तौर पर सामने आ गया है कि फिल्म के फाइनल एडिट (अंतिम संपादन) में रामायण के एक बेहद महत्वपूर्ण और आदरणीय पात्र के दृश्यों पर कैंची चला दी गई है। यह किरदार कोई और नहीं, बल्कि अयोध्या नरेश राजा दशरथ के सबसे विश्वसनीय मंत्री और सारथी ‘सुमंत्र’ (Sumantra) का है, जिनका पूरा हिस्सा फिल्म के अंतिम कट से बाहर कर दिया गया है।पौराणिक मान्यताओं और वाल्मीकि रामायण के अनुसार, सुमंत्र अयोध्या राजदरबार के आठ प्रमुख मंत्रियों में से एक थे और महाराज दशरथ के सबसे करीबी सलाहकार माने जाते थे। जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण को 14 वर्ष का वनवास मिला था, तो उन्हें अयोध्या की सीमा से बाहर तमसा नदी और गंगा तट तक अपने रथ पर ले जाने वाले सारथी भी सुमंत्र ही थे। भगवान राम के वन गमन के समय सुमंत्र का विलाप और अयोध्या वापस लौटकर महाराज दशरथ को राम का संदेश सुनाने का प्रसंग रामायण के सबसे भावुक अध्यायों में गिना जाता है। ऐसे में जब दर्शकों ने पर्दे पर इस केंद्रीय पात्र को नदारद पाया, तो कई सवाल खड़े हुए। अब खुद इस किरदार को जीवंत करने वाले अभिनेता ने सामने आकर इस बात की पुष्टि की है कि उनके सभी दृश्यों को फिल्म के फाइनल कट से हटा दिया गया है।
अभिनेता सत्येन चतुर्वेदी ने साझा किया अनुभव: ‘हर सीन स्क्रीन तक नहीं पहुंचता’
फिल्म ‘रामायण’ में मंत्री सुमंत्र का महत्वपूर्ण किरदार निभाने वाले प्रतिभाशाली अभिनेता सत्येन चतुर्वेदी ने इस बड़े फैसले के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक बेहद गरिमामय और भावुक पोस्ट साझा की है। सत्येन ने शूटिंग के दौरान के अपने लुक और सेट की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि एक कलाकार अपने करियर में जितने भी सीन कैमरे के सामने शूट करता है, वे सभी के सभी हमेशा सिनेमाई पर्दे तक नहीं पहुंच पाते, और यह सिनेमाई यात्रा का एक सामान्य हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में बताया कि नमित मल्होत्रा द्वारा निर्मित और नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित फिल्म ‘रामायण’ में सुमंत्र के रूप में उनके हिस्से को एडिटिंग टेबल पर हटा दिया गया है।रोल कट जाने के बावजूद सत्येन चतुर्वेदी के मन में निर्माताओं या निर्देशक के प्रति कोई नाराजगी या कड़वाहट नहीं दिखाई दी। उन्होंने अपने नोट में आगे लिखा कि हमारे देश के महानतम महाकाव्य के इतने पावन पात्र के लिए उनका चयन किया जाना और इतने विशाल स्तर की फिल्म का हिस्सा बनना ही अपने आप में एक अविश्वसनीय और जादुई अनुभव रहा है। सत्येन ने मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें इस ऐतिहासिक किरदार के लिए चुना था। अभिनेता ने कहा कि भले ही उनके सीन बड़े पर्दे पर दर्शकों तक न पहुंच सके हों, लेकिन इस सेट पर बिताए गए पल, सीखी गई बारीकियां और यादें हमेशा उनके दिल में जिंदा रहेंगी। उनके इस सकारात्मक और परिपक्व दृष्टिकोण की सोशल मीडिया पर फिल्म प्रेमियों और साथी कलाकारों द्वारा जमकर सराहना की जा रही है।
एडिटिंग टेबल पर क्यों चलानी पड़ी कैंची? रनटाइम और पेसिंग की मजबूरी
किसी भी बड़े पैमाने की पौराणिक या ऐतिहासिक फिल्म को बनाते समय निर्देशकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कहानी की गति (Pacing) और उसके कुल रनटाइम को संतुलित रखने की होती है। नितेश तिवारी की ‘रामायण: भाग 1’ की कहानी भगवान राम के जन्म, बाल्यकाल, ऋषि विश्वामित्र के साथ यात्रा, ताड़का वध, सीता स्वयंवर, कैकेयी के वरदान, वनवास और अंत में रावण द्वारा सीता हरण व जटायु मोक्ष तक फैली हुई है। इसके साथ ही फिल्म में रावण (यश) के प्रारंभिक जीवन, उसकी तपस्या और लंका विजय के बैकग्राउंड को भी विस्तार से दिखाया गया है। फिल्म समीक्षकों और जानकारों का मानना है कि जब फिल्म का पहला रफ कट तैयार हुआ, तो उसका कुल समय चार घंटे से भी अधिक बैठ रहा था। आज के दौर में जब दर्शक थिएटर में कसी हुई और तीव्र गति वाली कहानी की उम्मीद करते हैं, तब निर्माताओं को फिल्म को लगभग 3 घंटे के मानक समय में समेटने के लिए कई उप-कथानकों (Sub-plots) और सहायक चरित्रों के दृश्यों को संपादित करना पड़ा। भगवान राम के वनवास के समय अयोध्या के भावनात्मक विलाप और सुमंत्र के साथ रथ यात्रा के दृश्यों को छोटा करने के क्रम में अंततः सुमंत्र के पूरे ट्रैक को ही फिल्म से अलग करने का कठिन निर्णय लेना पड़ा, ताकि कहानी सीधे वनवास, शूर्पणखा प्रसंग और सीता हरण के मुख्य नाटकीय मोड़ों पर तेजी से आगे बढ़ सके।
4,000 करोड़ की महागाथा: दो दिनों में 100 करोड़ क्लब में एंट्री
किरदारों के संपादन और कुछ दृश्यों के कटने के बावजूद फिल्म ‘रामायण’ बॉक्स ऑफिस पर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। करीब ₹4,000 करोड़ के कुल बजट में दो भागों में तैयार हो रही इस फिल्म ने अपने रिलीज के शुरुआती दो दिनों के भीतर ही घरेलू बॉक्स ऑफिस पर ₹100 करोड़ नेट का आंकड़ा पार कर लिया है। फिल्म में रणबीर कपूर ने भगवान राम की सौम्यता और मर्यादा को जिस गहराई से जीया है, उसकी चारों तरफ प्रशंसा हो रही है। वहीं माता सीता के रूप में साई पल्लवी की सादगी और लंकापति रावण के रौद्र रूप में रॉकिंग स्टार यश के स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है।फिल्म के तकनीकी पक्ष की बात करें तो हॉलीवुड के विख्यात वीएफएक्स सुपरवाइजर डैन ग्लास और ऑस्कर विजेता संगीतकार ए. आर. रहमान व हांस जिमर की जुगलबंदी ने भारतीय सिनेमा को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का दृश्य और श्रव्य अनुभव प्रदान किया है। अरुण गोविल (राजा दशरथ), लारा दत्ता (कैकेयी), शीबा चड्ढा (मंथरा) और रवि दुबे (लक्ष्मण) जैसे दिग्गज कलाकारों ने अपने अभिनय से फिल्म को मजबूती दी है। फिल्म के अंत में सनी देओल की हनुमान के रूप में दी गई छोटी सी झलक ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं, जिससे अब हर किसी को साल 2028 में आने वाले इसके दूसरे भाग (Part 2) का बेसब्री से इंतजार है, जिसमें किष्किंधा कांड, रामसेतु निर्माण और लंका का महायुद्ध दिखाया जाएगा।
क्या ओटीटी या अनकट वर्जन में दिखेगा सुमंत्र का किरदार?
सिनेमाई इतिहास में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जब थियेट्रिकल रिलीज के समय हटाए गए दृश्यों को बाद में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाले ‘डायरेक्टर्स कट’ (Director’s Cut) या एक्सटेंडेड वर्जन में शामिल किया जाता है। जेम्स कैमरून की ‘अवतार’ से लेकर एस.एस. राजामौली की ‘बाहुबली’ तक में एडिट किए गए दृश्यों को बाद में दर्शकों के सामने पेश किया गया था।सत्येन चतुर्वेदी के प्रशंसकों और रामायण की पौराणिक कथा में रुचि रखने वाले दर्शकों को उम्मीद है कि जब यह फिल्म नेटफ्लिक्स या प्राइम वीडियो जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आएगी, तब निर्माता इसके एक्सटेंडेड वर्जन को रिलीज कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो दर्शक राजा दशरथ के मंत्री सुमंत्र के उन अनसीन दृश्यों को देख सकेंगे, जिन्हें शूट करने के लिए अभिनेता और पूरी क्रू ने महीनों तक कड़ी मेहनत की थी। फिलहाल, नितेश तिवारी की यह सिनेमैटिक कृति देश भर के सिनेमाघरों में एक सांस्कृतिक उत्सव की तरह देखी जा रही है और भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित हो रही है।
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