
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद राहुल गांधी ने अपने दिल्ली स्थित आवास पर भव्य ‘दिवाली मंगल मिलन’ समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर देशभर से कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के पदाधिकारियों, कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्यों, राज्यों के प्रभारियों और पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों का बड़ा जमावड़ा देखने को मिला।
त्योहारी माहौल में आयोजित इस गेट-टुगेदर में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, पार्टी महासचिव जयराम रमेश, सचिन पायलट, कुमारी सैलजा, मुकुल वासनिक और मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत कई प्रमुख चेहरे पहुंचे। नेताओं ने एक-दूसरे को दिवाली की शुभकामनाएं दीं और मिठाई खिलाकर त्योहार की खुशियां साझा कीं।
त्योहार की मिठास के बीच सियासी रणनीति पर मंथन: SIR और ‘वोट चोरी’ का मुद्दा
यूं तो यह कार्यक्रम औपचारिक रूप से दिवाली की बधाई देने के उद्देश्य से रखा गया था, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति और आगामी चुनावी समीकरणों के मद्देनजर यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, चाय और जलपान के दौरान नेताओं के बीच भविष्य के सियासी रोडमैप को लेकर गंभीर अनौपचारिक बातचीत हुई:
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‘वोट चोरी’ के खिलाफ देशव्यापी अभियान: राहुल गांधी और विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक की ओर से चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर छेड़े गए ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। बैठक में नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की रूपरेखा पर बात की।
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SIR (सामरिक व आंतरिक विषय) रणनीति: विपक्षी खेमे द्वारा संसद के आगामी सत्र में सरकार को घेरने के लिए SIR और आर्थिक मुद्दों पर एक संयुक्त आक्रामक रणनीति तैयार करने पर सहमति जताई गई।
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आगामी विधानसभा चुनाव और 2029 का रोडमैप: विभिन्न राज्यों में आने वाले विधानसभा चुनावों की जमीनी तैयारियों और बूथ स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर बल दिया गया।
‘पार्टी की ताकत ही देश की आवाज’: एकजुटता का कड़ा संदेश
बैठक के बाद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने सभी कार्यकर्ताओं और निष्ठावान नेताओं को एकजुट होकर देशहित में काम करने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यह केवल कांग्रेस की लड़ाई नहीं है, बल्कि देश के संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की सामूहिक लड़ाई है। वहीं, पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए विपक्ष पीछे नहीं हटेगा।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और अन्य नेताओं ने विश्वास जताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी हर राज्य में संघर्ष को तेज करेगी और आने वाले समय में जनता का भरोसा जीतकर मजबूत विकल्प पेश करेगी।
कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की कवायद
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के अनौपचारिक मिलन समारोहों के जरिए राहुल गांधी वरिष्ठ नेताओं और युवा चेहरों के बीच की दूरियों को पाटने का प्रयास कर रहे हैं। 26 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित ‘संविधान दिवस मार्च’ और संसद के शीतकालीन सत्र से ठीक पहले कांग्रेस के सभी शीर्ष सिपहसालारों का एक छत के नीचे जुटना यह दर्शाता है कि पार्टी त्योहारी अवकाश के तुरंत बाद पूरी ताकत के साथ सियासी मैदान में उतरने की तैयारी कर चुकी है।
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