नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन की भीषण तबाही के बीच फंसे किसान नेता राकेश टिकैत: भाकियू का 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पोखरा में सुरक्षित

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नेपाल के पर्वतीय इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, बादल फटने और भोटे कोशी समेत प्रमुख नदियों में आए उफान ने भारी तबाही मचा रखी है। बाढ़ और भूस्खलन की इस प्राकृतिक आपदा के बीच भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और देश के जाने-माने किसान नेता चौधरी राकेश टिकैत अपने 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ नेपाल के पोखरा क्षेत्र में फंस गए हैं। तीन दिन पहले नेपाल के दौरे पर सड़क मार्ग से पहुंचे किसान प्रतिनिधियों के सामने संपर्क मार्ग और पुल टूटने से सुरक्षित वापसी की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई। इस खबर के सामने आते ही उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित भाकियू के सिसौली मुख्यालय, शामली, हरियाणा और पंजाब के किसान कार्यकर्ताओं में भारी चिंता फैल गई। हालांकि, हालात की गंभीरता को देखते हुए राकेश टिकैत ने स्वयं पोखरा से एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी और पूरे प्रतिनिधिमंडल की सलामती की जानकारी साझा की, जिसके बाद समर्थकों और परिजनों ने राहत की सांस ली।

पोखरा में छोड़नी पड़ी गाड़ियां: पृथ्वी राजमार्ग बंद होने से सड़क मार्ग पूरी तरह ठप

नेपाल में आई फ्लैश फ्लड के कारण मुख्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। चितवन और पोखरा को राजधानी काठमांडू से जोड़ने वाला जीवन रेखा माना जाने वाला ‘पृथ्वी राजमार्ग’ कई स्थानों पर भारी भूस्खलन और मलबा गिरने के कारण यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

राकेश टिकैत ने वीडियो संदेश में बताया कि जिस क्षेत्र (पोखरा) में वे रुके हुए हैं, वहां मौसम बेहद खराब और लगातार बारिश जारी है, हालांकि बाढ़ का सीधा पानी इस रिहायशी इलाके में नहीं घुसा है और सभी लोग सुरक्षित होटल व शेल्टर में हैं। उन्होंने बताया कि आगे का सड़क संपर्क कट जाने के कारण वे जिस निजी स्कॉर्पियो व गाड़ियों से नेपाल पहुंचे थे, उन्हें अब पोखरा में ही छोड़ना पड़ेगा। सड़क मार्ग से काठमांडू तक का सफर अब पूरी तरह जोखिम भरा हो चुका है। ऐसे में प्रतिनिधिमंडल अब वैकल्पिक परिवहन और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से किसी तरह काठमांडू एयरपोर्ट पहुंचने की कोशिश में जुटा है, ताकि वहां से सीधी अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट पकड़कर नई दिल्ली और फिर मुजफ्फरनगर पहुंचा जा सके।

भाकियू युवा नेता गौरव टिकैत का बयान: मुजफ्फरनगर में समर्थकों की बेचैनी हुई दूर

राकेश टिकैत के नेपाल में फंसे होने की सूचना मिलते ही सिसौली स्थित उनके आवास पर फोन कॉल्स की बाढ़ आ गई थी। स्थिति को स्पष्ट करते हुए भाकियू युवा विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव टिकैत ने मीडिया को जानकारी दी कि राकेश टिकैत और उनके साथ गए अजय ठाकुर समेत सभी 9 किसान प्रतिनिधि पूरी तरह सुरक्षित हैं।

गौरव टिकैत ने बताया कि नेपाल में मौसम अत्यंत प्रतिकूल है और पहाड़ों से लगातार पत्थर व मलबा गिरने की चेतावनी जारी है। भारतीय दूतावास और स्थानीय संपर्कों के जरिए लगातार बातचीत हो रही है। प्रतिनिधिमंडल ने कोई भी अनावश्यक जोखिम न लेते हुए पोखरा में ही रुकने का बुद्धिमानी भरा फैसला लिया है। मौसम थोड़ा खुलते ही काठमांडू के रास्ते 28 अगस्त तक सभी के भारत लौटने की पूरी उम्मीद है।

नेपाल में भोटे कोशी और नारायणी नदी का रौद्र रूप: सैकड़ों रास्ते और पुल बहे

नेपाल के सिंधुपालचोक, बागमती, गंडकी और चितवन प्रांतों में नदियां खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर बह रही हैं। भोटे कोशी नदी में आए अचानक जलप्रलय ने दर्जनों बस्तियों, पुलों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को अपनी चपेट में ले लिया है।

पहाड़ी संकरी घाटियों में मलबे के साथ बहते पानी ने सड़क संपर्क को छिन्न-भिन्न कर दिया है। नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल (APF) और स्थानीय प्रशासन बड़े पैमाने पर हेलिकॉप्टरों और रबर बोट्स के जरिए रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। राकेश टिकैत ने दूरभाष पर बातचीत के दौरान बताया कि नेपाल में पहाड़ों की स्थिति बेहद डरावनी है और कई स्थानों पर स्थानीय नागरिकों व पर्यटकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।

भारतीय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों पर भी संकट: दूतावास हुआ सक्रिय

प्राकृतिक आपदा के समय नेपाल में भारत के हजारों पर्यटक, पशुपतिनाथ और मुक्तिनाथ दर्शन के लिए गए तीर्थयात्री भी अलग-अलग इलाकों में फंसे हुए हैं। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

भारत सरकार का गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय नेपाल सरकार के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए हैं। भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे लैंडस्लाइड प्रोन (भूस्खलन संभावित) पहाड़ी हाईवे पर सफर करने से बचें और मौसम सामान्य होने तक होटलों में ही प्रतीक्षा करें।

नेपाल की बाढ़ से भारत के सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट: यूपी-बिहार में प्रशासन मुस्तैद

नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) में हुई इस रिकॉर्डतोड़ बारिश का सीधा और विनाशकारी असर भारत के सीमावर्ती राज्यों—उत्तर प्रदेश और बिहार पर भी पड़ने लगा है। नेपाल की नदियों से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण उत्तर प्रदेश के महाराजगंज, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, बहराइच और सिद्धार्थनगर में गंडक, घाघरा और राप्ती नदियां उफान पर हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों और आपदा प्रबंधन टीमों (NDRF/SDRF) को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी गई है और बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में निचले इलाकों के ग्रामीणों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

सुरक्षित वापसी की तैयारी: 28 अगस्त तक भारत लौटने का लक्ष्य

नेपाल के पोखरा में फंसे राकेश टिकैत और किसान प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि वे स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं। योजना के अनुसार, पोखरा के क्षेत्रीय हवाई अड्डे से काठमांडू के लिए उड़ान भरने की तैयारी की जा रही है, जिसके बाद काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दिल्ली के लिए नियमित फ्लाइट ली जाएगी।

मुजफ्फरनगर और देश भर के किसान संगठनों ने राकेश टिकैत और पूरे दल की सकुशल व सुरक्षित स्वदेश वापसी की प्रार्थना की है। हिमालयी क्षेत्र में आई यह अचानक आपदा यह सबक देती है कि पहाड़ों पर मॉनसून के दौरान सफर करते समय मौसम और भूस्खलन की पूर्व चेतावनियों को गंभीरता से लेना कितना अनिवार्य है।

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